20 जनवरी को हमने उन शेयरों की लिस्ट बताई थी जो अपने 200-डे मूविंग एवरेज (DMA) के नीचे फिसल गए थे। बीते कुछ दिनों से बाजार में जिस भारी दबाव के साथ कामकाज हो रहा है, इसने कई स्टॉक्स को 200 DMA से नीचे धकेल दिया था, लेकिन 21 जनवरी को बाजार में आई शार्प रिकवरी के बाद इन स्टॉक्स ने भी बाउंस बैक किया और 200 DMA से ये फिर से ऊपर आ गए हैं।
21 जनवरी को NSE में 1,000 करोड़ से ज्यादा मार्केट कैप वाली 9 कंपनियों के शेयर 200-DMA के ऊपर बंद हुए हैं। जबकि 19-20 जनवरी 2026 के दौरान ये 200 DMA के नीचे फिसल गए थे। यह एक बहुत शॉर्ट-टर्म डिप था। ज्यादातर सिर्फ 1-2 दिन में ही रिकवर हो गए। यह बाजार की तेज रिकवरी को दिखाता है, जहां ब्रॉड सेल-ऑफ के बाद बाउंसबैक आया।
| Company | 200 DMA (Rs.) | LTP (Rs.) |
| Arman Financial Services | 1565.36 | 1576.1 |
| ONGC | 241.89 | 242.37 |
| MRPL | 142.44 | 152.16 |
| Escorts Kubota | 3516.6 | 3575.4 |
| Le Travenues Technology | 230.79 | 239.4 |
| Zydus Wellness | 420.68 | 425.4 |
| Timken India | 3036.57 | 3056.8 |
| Uniparts India | 412.42 | 418.25 |
| CreditAccess Grameen | 1270.36 | 1355.2 |
इसका क्या मतलब है?
टेक्निकल एनालिसिस में 200 डे मूविंग एवरेज (200 DMA) को लॉन्ग-टर्म ट्रेंड का सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर माना जाता है। यह पिछले 200 ट्रेडिंग दिनों के औसत क्लोजिंग प्राइस को दिखाता है।
जब कोई स्टॉक 200 DMA के नीचे फिसल जाता है, तो इसे बेयरिश सिग्नल समझा जाता है, यानी लॉन्ग-टर्म डाउनट्रेंड या कमजोरी का संकेत। लेकिन अगर स्टॉक वापस 200 DMA के ऊपर आ जाता है, तो इसे बुलिश सिग्नल माना जाता है।
इसका मतलब ये होता है कि लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड की वापसी हो गई है, स्टॉक अब ओवरऑल बुलिश जोन में है। संस्थागत निवेशक अक्सर इसे “BULLS LIVE ABOVE THE 200 DMA” कहते हैं। कई ट्रेडर्स इसे खरीदारी का संकेत मानते हैं, खासकर अगर यह शॉर्ट-टर्म डिप के बाद हो, जैसा कि इस केस में हुआ है। लेकिन यह हमेशा 100% सही नहीं होता, फॉल्स सिग्नल भी आ सकते हैं खासकर उतार-चढ़ाव वाले मार्केट में। इसलिए जरूरी होता है कि दूसरे इंडिकेटर्स को भी देखना चाहिए, जैसे वॉल्यूम, RSI, 50 DMA को भी देखकर फैसला लेना चाहिए।


गोल्ड क्रॉस और डेथ क्रॉस
अगर 50 DMA भी 200 DMA के ऊपर क्रॉस करे, तो इसे गोल्डन क्रॉस कहते हैं। गोल्डन क्रॉस आमतौर पर तब भरोसेमंद माना जाता है जब स्टॉक पहले से 200-DMA के ऊपर ट्रेड कर रहा हो और ये क्रॉसओवर अच्छे वॉल्यूम के साथ होना चाहिए। इसे मीडियम से लॉन्ग टर्म में तेजी जारी रहने की संभावना होती है. तब इंस्टीट्यूशनल और टेक्निकल खरीदारों की एंट्री होती है। मगर, इसका उल्टा हुआ यानी जब 50-DMA, 200-DMA के नीचे आ जाए तो इसे डेथ क्रॉस कहते हैं। जो कि कमजोरी और गिरावट का संकेत माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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