आजकल पत्नी जी अपनी साड़ियों और ज्वेलरी को लेकर कुछ ज्यादा ही व्यस्त दिख रही हैं. ज्यादातर वक्त उनका शीशे के सामने साड़ियों और लहंगों के ट्रायल में निकल रहा है. मैंने शुरू में तो इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन तभी मुझे ये अहसास हुआ कि बीते कुछ हफ्ते में मेरे पास 5-7 शादियों के कार्ड आ चुके हैं, और पत्नी जी इन शादियों में क्या पहनकर जाएंगी, इसकी तैयारियों में अभी से जुट गईं हैं. पत्नी जी की तैयारियां तो चलती रहेंगी, मगर अपना दिमाग तो सीधे काम पर लग गया. इंटरनेट पर शादियों को लेकर कुछ डेटा खोजने लगा, जैसा कि मैं हर बार करता हूं. CAIT का डेटा मेरी नजर में आया, जिसको पढ़ने के बाद लगा कि आपको ये बताना चाहिए.
इस साल होंगी 46 लाख शादियां
भारत, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश, जहां शादियों का सीजन एक लंबे फेस्टिव सीजन जैसा होता है, जो नवंबर से शुरू होकर दिसंबर और जनवरी तक भी चलता है. दुनिया में सबसे ज्यादा शादियां भी भारत में ही होती हैं. अगर आप इसको साधारण चश्मे से देखेंगे तो आपको सिर्फ बैंड बाजे, दूल्हा-दुल्हन, लाइटिंग, खाना-पीना यही सब दिखेगा, लेकिन असल में ये देश की इकोनॉमी का ईंधन है. कन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की रिपोर्ट बताती है कि 1 नवबर से 14 दिसंबर 2025 तक 75 शहरों में तकरीब 46 लाख शादियां होंगी. हालांकि पिछले साल 48 लाख शादियां हुईं थीं, लेकिन इस बार इन शादियों की वैल्यू 6.5 लाख करोड़ रुपये है, जो कि पिछले साल के 5.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. साल 2023 में 38 लाख शादियां हुईं थीं, जिसकी कुल वैल्यू 4.74 लाख करोड़ रुपये थी. साल 2022 में 32 लाख शादियां हुई थीं और वैल्यू थी 3.75 लाख करोड़ रुपये.
शादियां और खर्चे
इसमें भी सबसे ज्यादा शादियां दिल्ली में होंगी, जो कि 4.8 लाख है और इस बार 1.8 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. गुजरात और राजस्थान में डेस्टिनेशन वेडिंग का क्रेज और बढ़ने की उम्मीद है.
वैसे भी राजस्थान के हेरिटेज वेन्यू हमेशा से ही डिमांड लिस्ट में ऊपर रहते हैं. जहां शादियों के लिए होटल बुकिंग अब पीक सीजन के दौरान रेवेन्यू में 20-30% का योगदान देती है, जिसमें एक शादी की औसत लागत 25 लाख रुपये से 90 लाख रुपये के बीच होती है. यानी अगर आप इस सीजन में राजस्थान जाएंगे तो आपको होटल में ठहरने के लिए बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. पिछले साल से डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए लग्जरी ट्रेन ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ भी मिल रही थी, जिसकी वजह से राजस्थान में शादी को लेकर सातवें आसमान पर पहुंच गया था. थॉमस कुक (इंडिया) की एक रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान के महलों के अलावा वायनाड, कूर्ग, ऋषिकेश, सोलन और शिलांग के ठंडे इलाके भी वेडिंग डेस्टिनेशन में अपनी जगह बना रहे हैं.
उत्तर प्रदेश, पंजाब में कैटरिंग और ट्रेडिशनल सेटअप पर सबसे ज्यादा खर्च होने वाला है. दक्षिण भारत के राज्यों में मंदिर और हेरिटेज वेडिंग का कल्चर तेजी से बढ़ा है. जिससे लोकल क्राफ्ट और हॉस्पिटैलिटी बिजनेस में नए मौके पैदा हो रहे हैं. एक बात आपने भी जरूर नोटिस की होगी, हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री का बीते कुछ सालों में बहुत तेजी से उदय हुआ है, इसकी वजह डेस्टिनेशन वेडिंग्स का तेजी से बढ़ता क्रेज है. बीते कुछ सालों में जो शादियां मैंने अटेंड की हैं, उसमें से ज्यादातर डेस्टिनेशन वेडिंग थीं. पिछले कुछ वर्षों में भारत में शादी के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. वेडिंग प्लानर की भूमिका बढ़ी है. ये वेडिंग प्लानर शादियों में देसी ऊर्जा को प्रवाहित करने, उसे आकर्षक, आधुनिक और ग्लोबल बनाने पर फोकस करते हैं. ताकि शादी को यादगार बनाया जा सके.
जब भी शादियां होती हैं सबसे ज्यादा खर्च जिन सेक्टर्स पर होता है उनमें ज्वेलरी, कपड़े, कैटरिंग बिजनेस शामिल हैं. इस साल भी ज्वेलरी सेक्टर (15%), अपैरल और साड़ी (10%), केटरिंग (10%) और इवेंट मैनेजमेंट (5%) पर सबसे ज्यादा खर्च होने वाला है. यानी कपड़े, ज्वेलरी, फुटवियर और फैशन आइटम्स पर कुल खर्च का 34% खर्च होगा. खाना-मिठाई पर 5%, ग्रॉसरी और सब्जियों पर 5%, गिफ्ट्स पर 4% खर्च होगा, बाकी चीजों पर 6% खर्च होने का अनुमान है. एक बात और नोटिस करने वाली ये है कि शहरी और अर्ध-शहरी दोनों बाजारों में छोटे और मध्यम आकार के सर्विस प्रोवाइडर्स की ओर से ज्यादा भागीदारी देखी जा रही है.
कहां होंगे सबसे ज्यादा खर्च
•Apparel, jewellery, footwear & fashion items: 34%
•Food & sweets: 5%
•Grocery & vegetables: 5%
•Gifts: 4%
•Other goods: 6%
सर्विसेज पर खर्च
•Event management: 21%
•Catering:10%
•Photography & videography: 2%
•Travel & hospitality: 3%
•Floral decoration: 4%
•Music & lighting: 3% each
•Other services: 3%
शादियों का सीजन लोगों के लिए रोजगार के मौके भी लेकर आता है. रिपोर्ट के मुताबिक 1 करोड़ से ज्यादा अस्थायी नौकरियां पैदा होने का अनुमान है. जिनमें केटरिंग, इवेंट सेटअप, लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर शामिल हैं. इससे सरकार को लगभग ₹75,000 करोड़ का टैक्स मिलने की संभावना है.
एक अच्छी ये भी है कि शादी के लिए की जाने वाली करीब 70% खरीदारी घरेलू सामानों से बनी है. रिपोर्ट्स में वोकल फॉर लोकल की पहल को क्रेडिट दिया गया है और ये बताया गया कि फैशन, ज्वेलरी और डेकोर आइटम्स का इंपोर्ट शादियों में घटा है. देश में घरेलू कपड़ों, हैंडक्राफ्ट आभूषण और लोकल डेकोर आइटम्स की डिमांड बढ़ी है.
















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