आज (6 जनवरी, 2026) रिलायंस के शेयरों में सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट देखने को मिली, 1 लाख करोड़ रुपये एक झटके में साफ हो गए। आज रिलायंस का शेयर इंट्राडे में 5.1% तक टूटकर 1,496.30 रुपये तक चला गया, जो कि 4 जून, 2025 के बाद सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट है।
लेकिन आज की गिरावट से ठीक एक दिन पहले रिलायंस के शेयरों ने 1,611.8 रुपये का रिकॉर्ड हाई बनाया था। तो फिर अचानक ये गिरावट क्यों आई है, इसे लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। जब मुसीबत आती है तो चारों तरफ से आती है, इसलिए रिलांयस की गिरावट में कई कारणों ने थोड़ा-थोड़ा योगदान दिया है। आपको जो पसंद आए कारण चुन लीजिए, लेकिन सवाल इससे आगे का है, क्या रिलायंस में आगे भी गिरावट आएगी, क्या अभी रिलायंस में एंट्री मारने का मौका है या फिर इंतजार करना चाहिए।
रिलायंस की इस गिरावट से एनालिस्ट और ब्रोकरेज सभी हैरान हैं। कुछ एनालिस्ट्स की राय पर नजर डालते हैं।
CLSA ने RIL को पोर्टफोलियो से हटाया
खबर है कि CLSA ने RIL को अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से हटा दिया है। CLSA नोट के हवाले से ब्लूमूबर्ग ने लिखा है कि ब्रोकरेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (RIL) को अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से हटाकर उसकी जगह कंजम्पशन, रेट सेंसिटिव और IT सेक्टर के शेयरों को तरजीह दी है। CLSA ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की जगह पोर्टफोलियो में Eternal और DMart को शामिल किया है।
ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, रिलायंस के शेयरों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट देखने को मिली और इस दौरान इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके 30-दिन के एवरेज वॉल्यूम से करीब 6.5 गुना रहा। हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद, बीते एक साल में यह शेयर 26% चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50 के 11% के रिटर्न से बेहतर प्रदर्शन है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹20.6 लाख करोड़ है। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि CLSA ने रिलायंस का कवरेज बंद कर दिया है, या फिर कंपनी को लेकर ब्रोकरेज बियरिश हो गया है, ये किसी भी तरह का कोई डाउनग्रेड नहीं है।
आनंदराठी की राय
आनंदराठी के जिगर एस पटेल ने रिलायंस के शेयरों आई गिरावट पर कहा है कि इसका सपोर्ट लेवल 1,500 रुपये होगा, जबकि रेसिस्टेंस 1,555 रुपये होगा। अगर शेयर 1,555 रुपये से ऊपर मजबूती दिखाता है, तो यह 1,600 रुपये तक की और तेजी दिखा सकता है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग रेंज 1,500 से 1,600 रुपये के बीच रहने की संभावना है।
मोतीलाल ओसवाल की राय
मोतीलाल ओसवाल ने रिलायंस के शेयर का टारगेट प्राइस 1,765 रखा है। ब्रोकरेज के मुताबिक, रिलायंस की लॉन्ग-टर्म में सबसे बड़ी ताकत इसकी नई ऊर्जा और बैटरी निर्माण में है। इसमें कंपनी के पास तीन प्रमुख फायदे हैं- बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, टेक्नोलॉजीली जटिल प्रोजेक्ट्स संभालने की क्षमता और इंटीग्रेटेड न्यू एनर्जी इकोसिस्टम।
रेलिगेयर की BUY रेटिंग
रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा का इस शेयर पर पॉजिटिव रुख है। उन्होंने शेयर पर BUY की सलाह दी है और इसका लॉन्ग-टर्म टारगेट प्राइस ₹1,625 रखा है।
उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव हो सकता है, खासकर जब कोई नई खबर आए, लेकिन अगर शेयर थोड़ा नीचे आता है तो लॉन्ग टर्म निवेशकों को इसे जोखिम नहीं बल्कि खरीदारी का अच्छा मौका मानना चाहिए। अजीत मिश्रा को उम्मीद है कि O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स) बिजनेस में धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिलेगी। इसकी वजह यह है कि तेल और गैस सेक्टर में हालात स्थिर होते जा रहे हैं। खबरें या अफवाहें शॉर्ट टर्म में शेयर की कीमत को ऊपर-नीचे करती रह सकती हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म नजरिए से अब भी इस शेयर को लेकर पॉजिटिव हैं।
UBS की राय
स्विस इन्वेस्टमेंट बैंक UBS ने रिलायंस के लिए ‘Buy’ की रेटिंग दी है। और टारगेट प्राइस 1,820 प्रति शेयर रखा है। UBS के मुताबिक रिलायंस का शेयर लॉन्ग-टर्म में खरीदने लायक है और इसमें अभी और ग्रोथ की संभावना है।
रिलायंस में गिरावट आई क्यों
जैसा कि ऊपर बताया कि इसकी कोई एक वजह नहीं है।
वजह नंबर 1: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी कच्चा तेल लेकर तीन टैंकर रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर आ रहे हैं। इस खबर के बाद निवेशकों मे डर फैल गया कि कहीं रिलायंस पर कोई नया रेगुलेटरी या जियो-पॉलिटिकल दबाव न आ जाए। क्योंकि रूस पर अमेरिकी और यूरोप के प्रतिबंध लागू हैं। लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस रिपोर्ट का जोरदार खंडन किया। कंपनी ने इसे “पूरी तरह से गलत और भ्रामक” बताया। रिलायंस ने साफ कहा कि उसकी जामनगर रिफाइनरी में पिछले तीन हफ्तों से कोई भी रूसी क्रूड नहीं आया है, और जनवरी 2026 के लिए भी ऐसी किसी डिलीवरी का कोई शेड्यूल नहीं है।
कंपनी ने यह भी समझाया कि वेसल-ट्रैकिंग डेटा (जहाजों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी) सिर्फ यह दिखाता है कि कोई जहाज किस दिशा में जा सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उस तेल की खरीद हो चुकी है या डिलीवरी तय है। रिलायंस का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से बाजार में गलतफहमी फैलती है, निवेशकों में अनावश्यक घबराहट पैदा होती है, और कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचता है।
वजह नंबर 2: वेनेजुएला संकट
अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया। वेनेजुएला दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है, इसलिए इन घटनाओं से ग्लोबल कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिलायंस जैसी बड़ी रिफाइनरी कंपनी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बदलाव सीधा मुनाफे पर असर डाल सकता है। अगर कच्चा तेल तेजी से महंगा हो जाए और पेट्रोल-डीजल या अन्य प्रोडक्ट्स की कीमतें उतनी तेजी से न बढ़ें, तो रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव आता है। हालांकि ये सिर्फ आशंका हो, लेकिन तेल की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना भी निवेशकों को सतर्क कर देती है। यही वजह है कि कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए शेयर बेचे, जिससे रिलायंस के शेयर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
वजह नंबर 3: तेजी के बाद मुनाफावसूली
आज रिलायंस के शेयर में गिरावट का एक बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग को भी माना जा रहा है। सोमवार को रिलायंस के शेयर ने नया 52वीक हाई 1,611 रुपये बनाया। इतने ऊंचे स्तर पर शॉर्ट-टर्म और पोजिशनल निवेशक अक्सर अपने मुनाफे को भुनाना पसंद करते हैं। जब इतनी बड़ी कंपनी के शेयर में प्रॉफिट बुकिंग होती है, तो बिकवाली का दबाव चार्ट्स पर साफ दिखता है। इस तरह की बिकवाली अचानक तेजी के बाद सामान्य होती है और इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ या संभावनाओं पर कोई निगेटिव असर है।
मतलब कहने का ये है कि आज रिलायंस के शेयर में आई भारी गिरावट मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म कारणों की वजह से देखने को मिली है, न कि कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स में किसी बड़े नकारात्मक बदलाव की वजह से। इसको सिर्फ किसी न्यूज पर रिएक्शन या फिर नैचुरल तरीके से चर्बी घटाना मान सकते हैं. आपको रिलायंस में क्या करना चाहिए, अपने निवेश सलाहकार से पूछें, ये आर्टिकल सिर्फ आपकी जानकारी के लिए है। ये किसी भी तरह से खरीदने या बेचने की राय नहीं है।
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