जब-जब दुनिया में आई TROUBLE, ये निवेश हो गया DOUBLE

जब-जब दुनिया में आई TROUBLE, ये निवेश हो गया DOUBLE

ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया में उथल-पुथ मची है, जंग की गुबार से बादल काले हो रहे हैं। शेयर बाजार की चाल औंधी हो चुकी है, रुपया पिघल रहा है, ठीक उसी वक्त कोई चीज चुपचाप, शान से दोगुना, तीन गुना, दस गुना हो रही है। वो चीज है – सोना!

सोने के ‘स्वर्णिम काल’

वही सोना जो आपकी-हमारी दादी-नानी की अलमारियों में पड़ा रहता है, शादियों में आपका रुतबा बढ़ाने के काम आता है। जिसे बताया गया कि ये एक सुरक्षित निवेश है जो संकट में काम आता है, भले ही रिटर्न कम मिले, लेकिन जोखिम बाकियों से कम है. उसने पिछले 20 सालों में इस परिभाषा को ही बदल दिया है।

दरअसल, सोने की अपनी कोई अलग चाल नहीं होती। जब-जब दुनिया में डर, अनिश्चितता और आशंकाओं का पारा चढ़ता है, सोने की चमक अपने आप बढ़ जाती है। यही कारण है कि कभी यह पलक झपकते ही दोगुना हो जाता है, तो कभी सालों-साल सुस्त पड़ा रहता है। हम यहां आपको यही बताने जा रहे हैं कि कौन से वो दौर थे जब सोना रॉकेट की तरह दोगुना हुआ, और किन दौरों में इसे दोगुना होने में लंबा इंतजार करना पड़ा। साथ ही समझेंगे कि इन तेजी और सुस्ती के पीछे दुनिया की कौन-सी बड़ी घटनाएं जिम्मेदार थीं

सोने की कीमतों का 20 साल का सफर

सोना सदियों से केवल एक मेटल नहीं, बल्कि संकट के समय भरोसे का प्रतीक रहा है। शेयर बाजार जब डगमगाता है, करेंसी कमजोर होती है या युद्ध और महामारी जैसे हालात बनते हैं, तब निवेशक अपनी जमा पूंजी लेकर सोने की शरण में ही जाते हैं। बीते दो दशकों में सोने की कीमतों की चाल इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यह एसेट समय नहीं, हालात देखकर दौड़ता है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX गोल्ड के डेटा के आधार पर अगर हम 2006 से अब तक का सफर देखें, तो पता चलता है कि सोना अलग-अलग चरणों में तेज उछाल और लंबी सुस्ती से गुजरा है। हर बड़ा उछाल किसी न किसी ग्लोबल संकट से जुड़ा रहा है।

पहला बड़ा डबलिंग फेज

2006 में MCX पर सोना करीब 10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। इसके बाद अगले करीब 1,623 दिनों यानी लगभग 4.4 साल में यह कीमत 20,000 तक पहुंची। यह वही दौर था जब दुनिया ने 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस देखी। अमेरिका का लीमन ब्रदर्स दिवालिया हुआ, दुनिया की बड़ी-बड़ी बैंकिंग संस्थाएं संकट में आ गईं और शेयर बाजारों में ऐतिहासिक गिरावट आई। भारत में सेंसेक्स 21,000 से फिसलकर 8,000 के करीब पहुंच गया।

जब-जब दुनिया में आई TROUBLE, ये निवेश हो गया DOUBLE

सितंबर-अक्टूबर 2008 में सोने की कीमतें पूरी दुनिया में करीब 30% टूट गईं थीं, भारत में भी सोना अक्टूबर 2008 में 13,000 रुपये से नीचे चला गया। क्योंकि लिक्विडिटी क्राइसिस की वजह से लोगों को तुरंत डॉलर की जरूरत थी, तो लोगों ने सोना बेचकर कैश उठाया। डॉलर मजबूत हुआ, सोने की कीमतें गिरती चली गईं।

इस संकट से उबरने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने पहली बार बड़े पैमाने पर Quantitative Easing (QE) यानी नोट छापने का सहारा लिया। ब्याज दरें तेजी से नीचे लाई गईं। करेंसी कमजोर हुई, महंगाई का डर बढ़ा। जब निवेशकों का भरोसा बैंकिंग सिस्टम और डॉलर पर कमजोर पड़ा, तब सोने की मांग अचानक बढ़ गई। यही वजह थी कि इस अवधि में सोने ने पहला बड़ा डबलिंग दिखाया।

दूसरा डबलिंग फेज

अक्टूबर 2010 में सोना ₹20,000 के स्तर को पार कर चुका था, लेकिन इसके बाद ₹40,000 तक पहुंचने में इसे करीब 2,772 दिन (लगभग 7.6 साल) लगे। यह सोने का सबसे लंबा और सुस्त डबलिंग फेज रहा।

इस दौरान 2011 में यूरोज़ोन डेट क्राइसिस सामने आई। ग्रीस, स्पेन और इटली जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाएं संकट में फंस गईं। यूरोजोन लगभग टूटने की कगार पर पहुंच गया था। सोना ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। उसी साल अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड हुई, जिसने बाजारों में डर जरूर पैदा किया, लेकिन इसके बाद दुनिया धीरे-धीरे इक्विटी बुल मार्केट की ओर बढ़ गई।

2013 से 2018 के बीच सबकुछ ठीक चलता रहा, अमेरिका और दूसरे विकसित देशों में शेयर बाजारों ने मजबूत रिटर्न दिए। डॉलर मजबूत हुआ और ब्याज दरें धीरे-धीरे ऊपर जाने लगीं। इससे सोना बस एक दायरे में ही घूमता रहा। फिर 2018-2019 का दौर आया, चीन और अमेरिका बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ने लगा। इससे सोने की कीमतों को एक बार फिर सहारा मिला।

जब-जब दुनिया में आई TROUBLE, ये निवेश हो गया DOUBLE

इसके बाद साल 2020 में आई कोविड महामारी। मार्च में लॉकडाउन लग गया। इकोनॉमी पूरी तरह से ठप हो गई। इसका असर ये हुआ कि सोना तेजी से ऊपर जाने लगा, शेयर बाजार का दम फूल गया। साल 2020 में सोना 38% से ज्यादा उछल गया। डिजिटल गोल्ड और ETF डिमांड की डिमांड ने नई ऊंचाई को छू लिया था।

हालांकि ये वो दौर था जब सोने में हमेशा तेजी नहीं रही, टुकड़ों में तेजी देखने को मिली। इसलिए 20 हजार से 40 हजार पहुंचने में सोने को साढ़े सात साल लग गए।

तीसरा डबलिंग फेज

3 जनवरी 2020 को MCX गोल्ड 40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, 24 जनवरी 2025 को वो ये 80,000 रुपये पहुंच गया, यानी 1847 दिनों में! ये वो दौर था जब दुनिया एक के बाद एक झटके झेल रही थी, और हर झटके ने सोने की चमक को बढ़ाया।

इस तेज उछाल की शुरुआत हुई COVID-19 महामारी से। पूरी दुनिया लॉकडाउन में चली गई, फैक्ट्रियां बंद हुईं, सप्लाई चेन टूट गई और वैश्विक अर्थव्यवस्था ठहर सी गई। सेंसेक्स 38% तक क्रैश हो गया। इस समय अनिश्चितता अपने चरम पर थी। सेंट्रल बैंक ने अर्थव्यवस्था बचाने के लिए इतिहास का सबसे बड़ा पैसा छापा। अमेरिका अकेले 6 ट्रिलियन डॉलर प्रिंट किए, ब्याज दरें जीरो की। इसका असर ये हुआ कि करेंसी की वैल्यू गिर गई, महंगाई का डर सताने लगा। लोग सोने की तरफ दौड़ने लगे, 2020 में ही सोना 40,000 से 48,000-₹50,000 तक पहुंच गया था।

इसके बाद 2022 में शुरू हुई रूस-यूक्रेन वॉर। 24 फरवरी 2022 को पुतिन ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। अमेरिका और यूरोप ने रूस पर भारी प्रतिबंध लगा दिए। उसे SWIFT से बाहर कर दिया गाय। तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं। दुनिया भर में महंगाई अपने आसमान पर पहुंच गई। अमेरिका में तो महंगाई 9.1% तक पहुंच गई थी। जियोपॉलिटिकल टेंशन ने सोने को “वॉर एसेट” बना दिया। सोना महंगा होता चला गया।

जब-जब दुनिया में आई TROUBLE, ये निवेश हो गया DOUBLE

यही वो समय था जब खबरें आईं कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने जमकर गोल्ड की खरीदारी शुरू कर दी है। रूस के रिजर्व फ्रीज होने के बाद कई देशों ने डॉलर पर भरोसा कम किया। चीन, तुर्की, भारत सबने रिकॉर्ड गोल्ड खरीदा। RBI ने भी 2022-2024 में सैकड़ों टन गोल्ड रिजर्व में जोड़ा। इससे भी सोने को सपोर्ट मिला।

फिर आया 2023-2024 का समय जब मिडिल ईस्ट में इजरायल-हमास संघर्ष ने जोर पकड़ा। सोना धीरे-धीरे 60,000 से 70,000 और देखते ही देखते 78,000 रुपये तक पहुंच गया। फिर 2025 की शुरुआत में अनिश्चितताओं की वजह से रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी आई, जिससे सोना 24 जनवरी 2025 को 80,000 रुपये के पार निकल गया।

कुल मिलाकर, ये 5 साल सोने की कीमतों के लिए ‘स्वर्णिम काल’ साबित हुआ। जो लोग इस दौर में सोने में टिके रहे या SIP करते रहे, उन्होंने शानदार रिटर्न कमाया।

अब तक की सबसे तेज छलांग
₹80,000 से ₹1,00,000

सोने में सबसे ज्यादा तेजी 80,000 रुपये से 1,00,000 रुपये तक पहुंचने में देखने को मिली। MCX गोल्ड वायदा ने 20,000 रुपये का ये उछाल सिर्फ 88 दिनों में पूरा किया। यानी तीन महीने से भी कम समय में सोने ने 20,000 रुपये की छलांग लगाई। यह अब तक के सबसे तेज उछालों में है।

अप्रैल 2025 तक आते-आते एक साथ कई ऐसे फैक्टर सक्रिय हो चुके थे, जिन्होंने सोने की कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचाया। जैसे- दुनिया भर में जियोपॉलिटिकल टेंशन चरम पर था। रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच चुका था और मिडिल ईस्ट में संघर्ष और फैलने की आशंका बनी हुई थी। इसके अलावा, अमेरिका और चीन के रिश्तों में फिर से तल्खी बढ़ने लगी थी। तभी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर भी भारी अनिश्चितता थी। बाजार इस बात को लेकर उलझन में था कि ब्याज दरें कब और कितनी घटेंगी। इस अनिश्चितता ने डॉलर को अस्थिर रखा और सोने को सपोर्ट मिला। निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया। नतीजा यह हुआ कि सोना बहुत ही कम समय में 1 लाख के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया।

अब सोना 2 लाख कब होगा?

बात अब ये होने लगी है कि सोना 2 लाख कब तक पहुंचेगा। इसका जवाब किसी तारीख में नहीं, बल्कि हालातों पर निर्भर करता है। जिस तरह से इस वक्त पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है, आगे भी जारी रहती है। तो सोना एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ सकता है। लेकिन अगर दुनिया स्थिर रहती है और इक्विटी बाजार मजबूत बने रहते हैं, तो सोना लंबे समय तक सीमित दायरे में भी रह सकता है।

इतिहास यही बताता है कि सोना कभी भी हर साल पैसा नहीं बनाता, लेकिन जब दुनिया कांपती है, तब यह निवेशकों की पूंजी की ढाल बन जाता है। यही वजह है कि सोना आज भी सिर्फ मेटल नहीं, बल्कि संकट का बीमा माना जाता है।

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