जो कंपनी की नस-नस से वाकिफ हो, उसे प्रमोटर कहते हैं। उसे ही सबसे ज्यादा पता होता है कि उसकी कंपनी का आगे क्या भविष्य होने वाला है। ऐसे में प्रमोटर अपनी ही कंपनी के शेयरों को बेचकर निकलता जाए तो ये निवेशकों के लिए सोचने का विषय हो सकता है। हालांकि प्रमोटरों के हिस्सा बेचने के पीछे हमेशा कोई निगेटिव कारण ही हो, ऐसा भी नहीं है और न हम ऐसा कह रहे है। कभी कर्ज चुकाने के लिए पैसों की जरूरत हो सकती है, कोई नया बिजनेस शुरू करने के लिए पैसा चाहिए या कुछ और कारण हो सकते हैं।
मगर, जब प्रमोटर के हिस्सा बेचने के बाद शेयर टूटने लगे तो निवेशकों को भी सोचना चाहिए। हम यहां पर 5 ऐसी ही कंपनियों का जिक्र कर रहे हैं, जिनके प्रमोटर्स ने जब हिस्सा बेचा उसके बाद शेयरों में गिरावट का दौर शुरू हो गया। महज 6-8 महीने में ही इन कंपनियों के शेयर 25-60% तक टूट गए। इन शेयरों को लेकर हमारी कोई राय नहीं है, बस डेटा के हिसाब से एक नतीजा जो सामने आया, वो आपके सामने रख रहे हैं।
Cohance Lifesciences

18 सितंबर, 2025 को कंपनी के एक प्रमोटर Jusmiral Holdings ने Cohance Lifesciences में 3.41 लाख शेयरों को बेच दिया जो कि 8.9% हिस्सा होता है। ये शेयर बिक्री 906 रुपये के औसत भाव पर हुई, जिससे उसे 3,094 करोड़ रुपये मिले। शेयरबिक्री के बाद ही स्टॉक 5.5% से ज्यादा टूट गया, लेकिन गिरावट थमी नहीं। इस शेयर ने आज यानी 27 जनवरी को 369.30 रुपये का 52वीक लो बनाया है। डील से एक दिन पहले शेयर का भाव 966 रुपये के करीब था। यानी प्रमोटर के हिस्सा बिक्री के बाद से अबतक शेयर 62% तक टूट चुका है। इस प्रमोटर की जून 2025 तक शेयरहोल्डिंग 33.08% थी, जो अब घटकर 24.15% हो गई है।
PG Electroplast

27 मई, 2025 को PG Electroplast के तीन प्रमोटर्स विशाल गुप्ता, विकास गुप्ता और अनुराग गुप्ता ने करीब 1.5 करोड़ शेयर बेच दिए जो कि करीब 5.3% हिस्सेदारी बनती है। तीनों ने ही 50-50 लाख शेयर ब्लॉक डील के जरिए बेचे थे। ये डील 780 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुई थी। डील के बाद ही शेयर करीब 0.75% तक टूट गया। डील से पहले ये 770 रुपये के ऊपर ट्रेड कर रहा था, लेकिन उस ऊंचाई से अब ये करीब 35% तक टूट चुका है। मार्च 2025 तक प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग 49.37% हुआ करती थी, जो कि अब घटकर 43.41% पर आ चुकी है। सिंगापुर गवर्नमेंट और मोतीलाल ओसवाल असेट मैनेजमेंट कंपनी इस ब्लॉक डील में खरीदार थे। दोनों ने ही 754.8 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयरों को खरीदा था।
Suzlon Energy

9 जून, 2025 को सुजलॉन एनर्जी के प्रमोटर Tanti Family & Trust ने ब्लॉक डील के जरिए 19.81 करोड़ बेचे, जो कि कंपनी में कुल इक्विटी का करीब 1.43% हिस्सा होता है। ये डील 64.75 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुई, जो कि पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस से 2.9% डिस्काउंट पर है। जिसकी वैल्यू करीब 1,309 करोड़ रुपये बैठती है। इस ब्लॉक डील के बाद ये शेयर टूटता चला गया। प्रमोटर्स की हिस्सा बिक्री के बाद से अबतक ये 33% तक टूट चुका है। मार्च 2025 में प्रमोटर्स की होल्डिंग 13.25% हुआ करती थी, जो कि अब घटकर 11.73% पर आ चुकी है।
Whirlpool of India

27 नवंबर, 2025 को अमेरिकी अप्लायंस मैन्युफैक्चरर Whirlpool Corp ने अपनी भारतीय लिस्टेड यूनिट Whirlpool of India में ब्लॉक डील के जरिए 11.2% हिस्सेदारी बेची थी। हालांकि ये हिस्सा बिक्री अपनी शेयरहोल्डिंग को 51% से घटाकर 20% तक लाने की योजना के तहत की गई थी। BSE डेटा के मुताबिक, Whirlpool Mauritius ने भारतीय यूनिट में 14.25 मिलियन शेयरों को 1,044.97 रुपये पर बेचा। इस भाव पर डील की वैल्यू करीब 1,490 करोड़ रुपये बैठती है. Whirlpool Corp ने हिस्सा बिक्री के जरिए जो रकम पाई उसका इस्तेमाल कर्ज़ चुकाने में किया। ब्लॉक डील के बाद से ये शेयर 35% तक टूट चुका है। सितंबर 2025 तक Whirlpool Corp की भारतीय यूनिट में हिस्सेदारी 51% हुआ करती थी, जो कि अब घटकर 39.76% हो गई है।
IndiGo

27 अगस्त, 2025 को कंपनी के को-प्रमोटर राकेश गंगवाल और उनकी चिंकरपू फैमिली ट्रस्ट ने इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन में करीब 91 लाख शेयर जो कि 2.35% हिस्सा होता है ब्लॉक डील के जरिए बेच दिया। ये ब्लॉक डील 5,838 रुपये के औसत भाव पर हुई थी, जिससे 5,135 करोड़ रुपये जुटाए गए। इस ब्लॉक डील के बाद ही शेयर करीब 5% तक टूट गया। गिरावट इसके आगे भी जारी रही। ब्लॉक डील के बाद से शेयर अबतक 23% तक टूट चुका है। राकेश गंगवाल और उनके परिवार ने साल 2022 से लेकर कई मौकों पर अपनी हिस्सेदारी बेची है और करीब 45,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
















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