हफ्ते भर में चांदी की ‘आंधी’ हुई ‘आधी’! क्या चांदी क्रैश होने वाली है?

हफ्ते भर में चांदी की 'आंधी' हुई 'आधी'! क्या चांदी क्रैश होने वाली है?

चांदी में जो कुछ हो रहा है, काफी डरावना है. हफ्ते भर पहले यानी 29 जनवरी, 2026 को कॉमेक्स पर चांदी वायदा ने 121.785 डॉलर प्रति आउंस का रिकॉर्ड हाई बनाया था, लेकिन बीते कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा है, ऐसा लगता है कि उसने चांदी के बबल को फोड़ दिया है. कॉमेक्स पर चांदी वायदा 29 जनवरी से अब 48% तक टूट चुका है, यानी हफ्ते भर में भाव आधा साफ हो चुका है. जबकि बीते एक दिन में ही ये 28% से ज्यादा टूट चुकी है. तो सवाल ये है कि क्या चांदी में क्रैश का इशारा मिल रहा है?

चांदी के साथ कॉमेक्स पर सोना वायदा भी अपनी चमक खो रहा है. चांदी वायदा 4,670 से 4,860 डॉलर की रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो कि अभी तक की ऊंचाई 5,500–5,600 डॉलर से तकरीबन 750 डॉलर नीचे है. 29 जनवरी को कॉमेक्स सोना वायदा ने 5,626.80 डॉलर प्रति आउंस का रिकॉर्ड हाई बनाया था, इस ऊंचाई से सोना वायदा करीब 100 डॉलर फिसल चुका है.

चांदी का भविष्य आगे क्या होगा?

चांदी का भविष्य आगे क्या होगा, OCBC बैंक (Oversea-Chinese Banking Corporation) के एनालिस्ट्स की एक नोट में कहा गया है – ‘हम बार-बार कह रहे हैं कि अब चांदी की कीमत का 70 से 90 डॉलर वाला ज़ोन बहुत अहम हो गया है, यहां से कीमत स्थिर हो सकती है, लेकिन अगर कीमत इस 70–90 के स्तर को लगातार बनाए रखने में नाकाम रहती है, यानी बार-बार 70 के नीचे चली जाती है, तो आगे काफी तेज़ गिरावट आ सकती है और कीमत 58–60 डॉलर तक पहुँच सकती है’.

OCBC के नोट में 70 डॉलर को एक अहम लेवल बताया गया, लेकिन बीते दो दिनों से चांदी इस लेवल के नीचे ही ट्रेड कर रही है. यानी नोट को सही माना जाए तो चांदी का अगला लेवल 60 डॉलर होगा, अगर चांदी के भाव 70 डॉलर के ऊपर वापस नहीं लौटता है. इसी नोट में एक और बात कही गई है ‘अगर कीमतें इस रेंज में टिकी रहती हैं, तो बुलिश मोमेंटम कुछ समय बाद फिर से बन सकता है’.

हफ्ते भर में चांदी की 'आंधी' हुई 'आधी'! क्या चांदी क्रैश होने वाली है?

घरेलू मार्केट में भी सोना-चांदी टूटे

ग्लोबल मार्केट की तरह ही, घरेलू बाज़ार में भी सोने-चांदी की बुरी हालत है. आज यानी 6 फरवरी को MCX पर चांदी का मार्च वायदा 2,23,000 रुपये प्रति किलो के नीचे फिसल गया. चांदी वायदा गुरुवार को 2,43,815 रुपये पर बंद हुआ था. यानी चांदी वायदा आज 20,800 रुपये से ज्यादा टूट गया, यानी 8.5% की गिरावट देखने को मिली है. हालांकि सोना वायदा में उतनी बड़ी गिरावट नहीं है, सोना वायदा आज 6 फरवरी को 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे जरूर फिसल गया, लेकिन 1.7% की ही गिरावट है

जिस चांदी ने जनवरी के आखिरी में 4,20,048 रुपये की आसमानी ऊंचाई को छुआ और सोना करीब 2 लाख रुपये के करीब पहुंचा, अब अचानक इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतें पिघलनी क्यों शुरू हो गईं. वो भी हफ्ते भर की एक बेहद छोटी सी अवधि में. ये क्या था, क्या ये बबल है या प्रॉफिट बुकिंग या फिर कुछ ऐसा हो रहा है, जो अभी समझ नहीं आ रहा है.

क्यों आ रही है इतनी भारी गिरावट?

तो चलिए जो हमारे सामने मौजूद हैं, उनसे ही समझने की कोशिश करते हैं कि वो क्या कारण है, जिसने सोने और चांदी को उनकी रिकॉर्ड ऊंचाई से घसीटकर नीचे ला पटका है.

US-ईरान के बीच बातचीत
दुनिया में अस्थिरता और ग्लोबल वित्तीय संकट सोने और चांदी के फलने-फूलने का सबसे बढ़िया खाद-पानी होता है. अमेरिका और ईरान के बीच बीते कुछ समय से टकराव चल रहा था, अब उसका कुछ हल निकलता हुआ दिख रहा है, आज यानी शुक्रवार को ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होने वाली है, इसमें परमाणु कार्यक्रम को लेकर चर्चा होगी. जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ था, जैसे जून 2025 के इज़राइल-ईरान युद्ध और अमेरिकी बमबारी के बाद, तो सोना-चांदी सुरक्षित निवेश के रूप में चमके थे, कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं थीं. लेकिन जैसे ही अमेरिका-ईरान ने शुक्रवार को ओमान में बातचीत की पुष्टि की, जियो पॉलिटिकल तनाव कम होने लगा, इससे निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग घट गई, और वे प्रॉफिट बुकिंग करने लगे. जिससे सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिल रही है.

जल्द नहीं घटेंगी ब्याज दरें!
फेड चेयरमैन इसी साल के मध्य में अपने से रिटायर हो जाएंगे, डॉनल्ड ट्रंप से उनकी बनती नहीं, ट्रंप ने केविन वॉर्श का नाम नए फेड चेयरमैन के लिए आगे बढ़ाया है. वॉर्श को ब्याज दरों के मामले में हॉकिश माना जाता है, यानी ब्याज दरें अब ज्यादा आसानी से नीचे नहीं आएंगी. अभी हाल ही में फेड गवर्नर लीजा कुक का एक बयान भी सामने आया, जिसमें वो कह रही हैं कि महंगाई के बढ़ते जोखिम और धीमा होते लेबर मार्केट को देखते हुए वो ब्याज दरों में कटौती को समर्थन नहीं करती हैं. यानी इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि ब्याज दरें निकट भविष्य में तो कम नहीं होने वाली. जिसका असर सोने और चांदी पर निगेटिव पड़ना तय है.

डॉलर की मजबूती से डिमांड घटी
डॉलर की मजबूती से सोने और चांदी की कीमतों को चोट पहुंची है. डॉलर दो हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों की करेंसीज के मुकाबले डॉलर ज्यादा कीमती हो जाता है. ऐसे में विदेशी खरीदारों को सोना-चांदी खरीदने के लिए अपनी करेंसी में ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं. इसलिए वो खरीदारी से बचते हैं डिमांड कम जाती है, जिससे कीमतें गिरने लगती हैं.

कॉमेक्स पर मार्जिन बढ़ा
एक बेहद जरूरी डेवलपमेंट ये हुआ है कि CME यानी Chicago Mercantile Exchange ने हाल की बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को देखते हुए COMEX गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर शुरुआती मार्जिन बढ़ा दिया है. कॉमेक्स 100 गोल्ड फ्यूचर्स पर शुरुआती मार्जिन 8% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है, जबकि 5000 सिल्वर फ्यूचर्स पर 15% से बढ़ाकर 18% कर दिया है. इसका मतलब ये हुआ कि ट्रेडर्स को पोजीशन खोलने-रखने के लिए अब ज्यादा पैसा जमा करना पड़ेगा. इससे स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाती है, कई लोग मजबूरी में आकर अपनी पोजीशन बेच देते हैं, जिससे कीमतों पर और सेलिंग प्रेशर बढ़ता है और गिरावट जारी रह सकती है, यही चीज़ हमने बीते कुछ दिनों में देखी है.

डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल केवल आपकी जानकारी के लिए लिखा गया है, सोने और चांदी या किसी भी तरह के असेट में हमारी खरीदारी तरफ से खरीद या बिक्री की सलाह नहीं है. ये फैसला आप अपने वित्तीय सलाहकार के मशवरे पर करें.

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