बाज़ार की उथल-पुथल के बीच म्यूचुअल फंड निवेशक कहां लगा रहे हैं पैसा?

Where Are Indian Mutual Fund Investors Parking Their Money

जनवरी 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश में भले ही गिरावट आई हो, लेकिन रिटेल निवेशक उल्टे पैर वापस नहीं हुए हैं, वो सिस्टम में ही मौजूद हैं, और आंख मूंदकर खरीदारी करने की बजाय अपना पैसा सोच समझकर लगा रहे हैं. जनवरी 2026 को लेकर अभी AMFI की रिपोर्ट आई, जिसके आधार पर नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की है. जिसमें ये दिखता है कि म्यूचुअल फंड में निवेशकों का पैसा आखिर जा कहां रहा है. इक्विटी से लेकर हाइब्रिड, डेट, SIP ट्रेंड्स, AUM ग्रोथ और निवेशकों का क्या बर्ताव रहा है.

इक्विटी MF में हल्की सुस्ती के मायने क्या हैं?

सबसे पहले इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की ही बात कर लेते हैं, जिसने जनवरी 2026 में 24,000 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया, जो दिसंबर 2025 के 28,100 करोड़ रुपये से करीब 14% कम है. यह दूसरा लगातार महीना है जब इक्विटी इनफ्लो में गिरावट आई है. सालाना आधार पर यह 39% कम है, क्योंकि जनवरी 2025 में 39,687 करोड़ रुपये था. ये गिरावट सेलेक्टिव रिस्क लेने को दर्शाती है. यानी निवेशक रिस्क तो ले रहे हैं, लेकिन सिर्फ उन जगहों पर जहां वैल्यूएशन अच्छी लग रही है या फिर जिस जगह पर उन्हें ग्रोथ स्ट्रक्चरल दिख रही है. जबकि हाइब्रिड में आई तेज रिकवरी और SIP ने साफ किया कि घरेलू रिटेल निवेशक कहीं नहीं जा रहा, बल्कि अपनी चाल बदल रहा है. यानी निवेशक अब ज्यादा बैलेंस्ड और रिस्क-मैनेज्ड अप्रोच अपना रहे हैं, खासकर मार्केट कंसोलिडेशन और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच.

इक्विटी म्यूचु्अल फंड्स: फ्लेक्सीकैप पर भरोसा कायम

ये पैसा पैसा कई तरह के इक्विटी फंड्स में फैला, खासकर फ्लेक्सीकैप, जिसमें सबसे ज्यादा 7,672.36 करोड़ रुपये का निवेश आया, हालांकि ये दिसंबर 2025 में आए 10,019 करोड़ रुपये से कम है, इसके अलावा, लार्जकैप, लार्ज एंड मिडकैप कैटेगरी में भी ठीक-ठाक पैसा आया है हालांकि रफ्तार जरूर कम हुई है, फिर भी, फ्लो पॉजिटिव और ब्रॉड-बेस्ड रहा, जो दिखाता है कि रिटेल निवेशक अभी भी शेयर बाजार में भरोसा रखते हैं, लेकिन मार्केट की अनिश्चितता के कारण थोड़ा सतर्क हो गए हैं.

इक्विटी MF में हल्की सुस्ती

लार्जकैप में भी निवेश बढ़ा

लार्जकैप स्कीम्स में जनवरी 2026 में 2,005 करोड़ का इनफ्लो आया, दिसंबर 2025 में 1,567 करोड़ रुपये था, यानी 28% की बढ़ोतरी हुई. यानी निवेशक स्टेबल और कम वोलेटाइल सेगमेंट में चुनिंदा तरीके से पैसा डाल रहे हैं. जबकि मल्टीकैप स्कीम में जनवरी में करीब 2,000 करोड़ का इनफ्लो आया है. दिसंबर में ये 2,300 करोड़ करोड़ रुपये था. भले ही करीब 13% कम हुआ है, लेकिन ऐसे माहौल में ये सामान्य माना जा सकता है, ये कोई बड़ा बदलाव नहीं है.

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हाइब्रिड फंड्स में दमदार इनफ्लो

हाइब्रिड फंड्स में जनवरी में 17,400 करोड़ रुपये का इनफ्लो देखने को मिला. जो दिसंबर के 10,800 करोड़ रुपये से 61% ज्यादा है. इसका साफ मतलब है कि निवेशक पूरी तरह इक्विटी या पूरी तरह डेट में नहीं जा रहा है. YoY भी 98% बढ़ोतरी दिखाता है.

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इसमें मल्टी एसेट एलोकेशन में सबसे ज्यादा 10,485 करोड़ रुपये का निवेश आया है, आर्बिट्राज में 3,293 करोड़ रुपये, बैलेंस एडवांटेज/डायनामिक एसेट में 1,839 करोड़ रुपये का निवेश आया है. कुल मिलाकर हाइब्रिड (आर्बिट्राज को छोड़कर) में 14,100 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जो दिसंबर के 10,600 करोड़ रुपये से ज्यादा है. मल्टी एसेट और डायनामिक एसेट एलोकेशन जैसे फंड्स में बढ़ता निवेश ये साफ दर्शाता है कि लोग उतार चढ़ाव के दौर में एक बैलेंस अप्रोच चाहते हैं. मतलब कि जहां गिरावट से सुरक्षा भी मिले और जब बाजार ऊपर जाए तो मौका भी मिले.

डेट फंड्स की जोरदार वापसी

दिसंबर 2025 में डेट फंड्स से -1,32,410 करोड़ रुपये का एक बहुत बड़ा आउटफ्लो देखने को मिला था, तब लिक्विड फंड्स से 47,307 करोड़ रुपये और मनी मार्केट फंड से -40,464 करोड़ रुपये निकल गए थे. कारणों पर नहीं जाऊंगा मगर, जनवरी 2026 में कहानी पूरी तरह से उलट गई. इस महीने 74,827 करोड़ रुपये का दमदार इनफ्लो देखने को मिला है. लिक्विड फंड में 30,681 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जबकि मनी मार्केट फंड में 12,763 करोड़ रुपये का निवेश लौटा. जिस अल्ट्रा शॉर्ट फंड से दिसंबर में 17,648 करोड़ रुपये निकले थे, जनवरी में 255 करोड़ रुपये का निवेश आया है. यह दिखाता है कि निवेशक ब्याज दरों के मोर्चे पर नए समीकरणों को देखते हुए शॉर्ट टर्म पार्किंग को प्राथमिकता भी दे रहा है.

SIP निवेश रिकॉर्ड स्तरों पर

SIP में मंथली निवेश रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है. जनवरी 2026 में भी ये 31,002 करोड़ रुपये रहा है, जो कि इसके पिछले महीने दिसंबर 2025 के 31,002 करोड़ रुपये के बराबर है, जो अब तक का ऑल टाइम हाई लेवल है और नवंबर 2025 के 29,445 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा है. मतलब SIP का इंजन अपना दमखम बरकरार रखे हुए है. रिटेल निवेशकों अपने नियमित निवेश को जारी रखे हुए हैं, भले ही मार्केट में गिरावट हो या उतार-चढ़ाव आया हो, उन्होंने अपनी SIP को बंद नहीं किया है. जिसकी वजह से जनवरी 2026 में SIP का कुल AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) बढ़कर 16.634 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह ट्रेंड दिखाता है कि भारतीय रिटेल निवेशक अब लॉन्ग-टर्म और सिस्टेमेटिक तरीके से सोच रहे हैं, जो इंडस्ट्री के लिए बहुत पॉजिटिव है.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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