भारतीय IT सेक्टर की हालत इस वक्त काफी बुरी स्थिति में है. निफ्टी IT इंडेक्स पिछले कुछ हफ्तों में 10-12% तक गिर चुका है, और 2026 की शुरुआत से ही ये इंडेक्स लगभग 11% नीचे है. TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCL टेक जैसी बड़ी कंपनियां एक-एक दिन में 4-8% तक गिर रही हैं. वजह? Anthropic जैसे US AI स्टार्टअप्स के नए टूल्स ने निवेशकों में डर पैदा कर दिया है कि ट्रेडिशनल IT आउटसोर्सिंग, कोडिंग, कंसल्टिंग और बिलेबल आवर्स का मॉडल अब खतरे में है.
दूसरी तरफ, अमेरिका की Magnificent 7 यानी Alphabet, Amazon, Apple, Tesla, Meta Platforms, Microsoft, Nvidia और सर्विसेज देने वाली कंपनियां Accenture, IBM, Oracle, Salesforce में हालत उतनी बुरी नहीं, बल्कि कह सकते हैं कि मजबूत है. कुछ कंपनियां Nvidia, Alphabet AI बूम से फायदा उठा रही हैं, जबकि दूसरी Amazon, Microsoft में भी हालिया करेक्शन के बावजूद लॉन्ग-टर्म ग्रोथ नैरेटिव बरकरार है.
सस्ता हुआ है, फिर भी महंगा है?
अगर भारतीय IT कंपनियों और US IT कंपनियों की तुलना करें तो हमें साफ दिखता है कि भारतीय IT कंपनियां रिटर्न के मामले में काफी पिछड़ रही हैं, लेकिन वैल्यूएशन खासकर PEG रेश्यो पर कई मामलों में US की कंपनियों से ज्यादा महंगी लग रही हैं. वो इसलिए क्योंकि भारतीय सेक्टर की ग्रोथ धीमी है, जबकि US टेक दिग्गज AI से हाई ग्रोथ वाली कंपनियां हैं.
अब जरा नीचे दिया गया डेटा देखिए- ज्यादातर IT कंपनियों के शेयर बीते एक महीने में 12-16% तक टूटे हैं. जहां तक 1 साल की बात है, तो 7-29% तक की गिरावट है. इंफोसिस और विप्रो तो एक साल में 25-30% तक टूटे हैं. मगर, इतनी सुस्ती और गिरावट के बावजूद जब हम वैल्युएशन पर नजर डालते हैं तो अब भी ये महंगे लगते हैं, क्योंकि इनमें से ज्यादातर के PEG रेश्यो 3-7.5% तक बढ़े हुए हैं. अब ऐसा क्यों है, जरा इसको समझिए.


वैल्युएशन महंगे क्यों हैं?
देखिए PEG रेश्यो यानी Price/Earnings to Growth रेश्यो, ग्रोथ के हिसाब से वैल्यूएशन को मापता है. मतलब कंपनी की कमाई के मुकाबले स्टॉक की कीमत कितनी है. ग्रोथ रेट आमतौर पर 5 साल की अनुमानित EPS ग्रोथ पर आधारित होती है. जबकि शेयरों का रिटर्न हाल-फिलहाल गिरा है. यानी PEG फॉरवर्ड लुकिंग है, भविष्य की ग्रोथ पर आधारित होता है. मौजूदा समय में AI भले ही IT कंपनियों के लिए दुखती नब्ज़ हो, जिसकी वजह से इनके प्राइसेज पर दबाव दिख रहा है, लेकिन बाजार ये उम्मीद कर रहा है कि IT कंपनियां AI के इस मुश्किल दौर से भी बाहर निकल जाएंगी, जैसा कि पहले भी हुआ, Y2K या फिर डॉट कॉम बबल के समय. यही वजह है कि ग्रोथ अनुमान काफी ऊंचे बने हुए हैं, वैल्युएशन अब भी महंगे लग रहे हैं.
मगर, AI डील्स अगर बढ़ते हैं, तो ग्रोथ रीसेट नहीं होगा और PEG में गिरावट आ सकती है और शेयर फिर से रीबाउंड हो सकते हैं. TCS का कहना है कि AI सर्विसेज का सालाना रेवेन्यू रन रेट बढ़ा है. कंपनी कह रही है कि AI-डील्स सभी सेक्टर्स में बढ़ रहे हैं. कंपनी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी AI-लेड टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी बनाने की दिशा में है. दूसरी तरफ, इंफोसिस है, जिसने कई बड़ी डील्स जीती हैं, जिसमें AI भी हैं. FY27 में हायरिंग AI-फोकस्ड होंगी. यानी डील्स तेजी से बढ़ेंगी तो ग्रोथ रेट में तेजी आएगी और PEG अपने आप सामान्य हो जाएगा.
एनालिस्ट्स क्या कहते हैं?
इन्वेस्टर्स और एनालिस्ट्स अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि TCS, Infosys, HCL Tech जैसी कंपनियां AI में अपनी पैठ बनाएंगी, मतलब, वे अब सिर्फ पुराने तरीके से कोडिंग या आउटसोर्सिंग नहीं करेंगी, बल्कि AI सर्विसेज, GenAI डील्स जैसे AI एजेंट्स, ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म्स में शिफ्ट हो रही हैं. ये भरोसा इसलिए है क्योंकि इंफोसिस ने हाल ही में FY26 गाइडेंस बढ़ाई है, TCS और HCL ने भी AI-लेड डील्स और मजबूत डिमांड का भरोसा दिया है. एनालिस्ट्स Nomura, HSBC, गोल्डमैन सैक्स FY27 में 4-6% या 5.5%+ ग्रोथ की उम्मीद लगाए हुए हैं. गार्टनर के मुताबिक 2026 में AI पर खर्च 44% बढ़ेगा. ब्रोकरेज फर्म्स JM फाइनेंशियल, मोतीलाल ओसवाल, HDFC सिक्योरिटीज भी मान रहे हैं कि मिड 2026 से AI सर्विसेज का टर्निंग प्वाइंट आएगा और FY27 में ग्रोथ 6% से ज्यादा हो सकती है.ऐसे में बाजार को भी ये उम्मीद है कि शॉर्ट टर्म तकलीफ के बाद लॉन्ग टर्म ग्रोथ भी आएगी और वो भी AI से.
















Leave a Reply