AI से ग्रीन हाइड्रोजन तक: ये 3 थीम्स लिखेंगी भारत की ग्रोथ स्टोरी; आपके पोर्टफोलियो में हैं ये स्टॉक्स?

भारतीय अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिफिकेशन, हेल्थकेयर, डिफेंस- ये सभी मेगा ट्रेंड्स हैं. जिनको सरकार का पूरा साथ मिल रहा है, विदेशी पैसा भी खूब आ रहा है और कंपनियां भी इन्हें भुनाने के लिए तैयार हैं. ये सेक्टर सिर्फ चर्चा या हाइप की वजह से नहीं चल रहे हैं, हर एक सेक्टर के पीछे ठोस और लंबे समय तक चलने वाले कारण (structural tailwinds), सरकार का मजबूत पॉलिसी सपोर्ट और भारत में बड़े पैमाने पर निवेश पहले से ही शुरू हो चुका है.

अगर आप अगले 10 सालों के लिए मजबूत पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं, तो इन 7 उभरते हुए थीम्स और उनके शेयरों को देखिए. इन कंपनियों को कई पैरामीटर्स पर मापा गया है. मुनाफा, फ्यूचर ग्रोथ, कर्ज, बैलेंस शीट और ऑर्डर बुक वगैरह.

थीम: डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर
कंपनियां: Siemens | ABB | Honeywell Automation

देश में AI को लेकर तेजी से काम हो रहा है, कंपनियां नए डेटा सेंटर्स बना रही हैं, इन डेटा सेंटर्स की कुछ खास जरूरतें होती हैं, जिनको पूरा करती हैं ये कंपनियां.
Siemens गैस और भाप टर्बाइन, रीन्युएबल एनर्जी और बैटरी सहित पावर सॉल्यूशंस का एक फुल पोर्टफोलियो देती है, ताकि डेटा सेंटर्स को एक स्थिर और बिना रुकावट बिजली सप्लाई मिल सके. ABB मीडियम वोल्टेज स्विचगियर, लो वोल्टेज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और ट्रांसफॉर्मर बनाती है और
Honeywell Automation कूलिंग और बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम मुहैया कराती है.

इसलिए ये तीनों ही कंपनियां सीधे उस बिजनेस से जुड़ी हैं जो डेटा सेंटर्स, AI इंफ्रास्टक्चर के लिए बेहद जरूरी है.

इन कंपनियों के ऊपर कर्ज नहीं के बराबर है जबकि ROE मजबूत है. खासतौर पर ABB का जो कि 28.8% है. कंपनियों मुनाफा भी अच्छा कमा रही हैं और फ्यूचर ग्रोथ भी काफी अच्छी है, क्योंकि जैसे जैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जोर पकड़ेगा, डेटा सेंटर्स की जरूरत बढ़ेगी और इन कंपनियों का बिजेनस और फलेगा फूलेगा. Macquarie Equity Research की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2027 तक भारेत के डेटा सेंटर्स की क्षमता दोगुना हो जाएगी और 2030 तक तो ये 5 गुना हो जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक भारत के डेटा सेंटर्स की ऑपरेशनल क्षमता 1.4 GW है, जबकि 1.4 GW ही अंडर कंस्ट्रक्शन है, जबकि 5 GW योजना के स्तर पर है.

गूगल तो भारत में 15 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान कर चुका है. गूगल आंध्र प्रदेश में AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाएगा. जिसमें अदाणी ग्रुप के साथ साझेदारी में एक गीगावाट स्केल डेटा सेंटर भी शामिल होगा. गूगल का भारत में ये अबतक का सबसे बड़ा निवेश होगा.

थीम: ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी
कंपनियां: L&T | Thermax | Reliance New Energy

भारत ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग, कार्बन कैप्चर और रीन्युएबल एनर्जी सिस्टम्स का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना होगा. इलेक्ट्रोलाइज़र मशीनों का ज्यादा से ज्यादा निर्माणी करना होगा, जो पानी से हाइड्रोजन बनाती हैं. कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकें बढ़ेंगी जिससे हवा में मौजूद खराब गैसों को कम किया जाएगा और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सोलर, विंड से जुड़े बड़े सिस्टम तैयार करने होंगे. ये सभी मिलकर भारत में ग्रीन एनर्जी-क्लीन एनर्जी का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करते हैं.

सरकार इस सेक्टर को बढ़ाने के लिए PLI स्कीम के जरिए खुलकर सपोर्ट कर रही है. हजारों करोड़ रुपये हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स पर लग रहे हैं. दुनिया भर से बड़ा फंड एनर्जी ट्रांजिशन पर खर्च हो रहा है. यानी ये गेम लंबी अवधि का है. इसलिए इस थीम को सपोर्ट करने वाली या इससे जुड़ी कंपनियां भी लंबी अवधि के खिलाड़ी हैं.

L&T एनर्जी ग्रीनटेक, IOC के लिए पानीपत रिफाइनरी में भारत का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगा रही है. जो रीन्युएबल एनर्जी का इस्तेमाल करके सालाना 10,000 टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा.
Thermax छत और जमीन पर लगाए जाने वाले सोलर फोटोवोल्टिक (PV) सिस्टम्स के साथ-साथ सोलर हाइब्रिड सिस्टम्स को डिजाइन और इंस्टॉल करता है. जिन्हें कूलिंग और हीटिंग के साथ जोड़ा जा सकता है.
Reliance New Energy क्लीन एनर्जी के लिए इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है जिसमें सोलर एनर्जी, ग्रीन एनर्जी, बैटरी और दूसरी रीन्युएबल सॉल्युशंस शामिल हैं.

थीम: इलेक्ट्रिकल व्हीकल और बैटरी इकोसिस्टम
कंपनियां: Exide | Amara Raja | Tata Motors | Olectra Greentech

भारत सरकार जिस तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दे रही है और ऑटो कंपनियों ने भी अब इलेक्ट्रिक व्हीकल को तवज्जो देना शुरू किया है वो काबिले तारीफ जो कि इस बात की तस्दीक करता है कि फ्यूचर तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग अपने चारों तरफ एक पूरा इको सिस्टम लेकर चलती है. गाड़ियों की बैटरी से लेकर चार्जिंग स्टेशन तक, इस मुहिम का अहम हिस्सा हैं. इसलिए इस सेक्टर में 15-20 बिलियन डॉलर के मौके खुल रहे हैं. 2-व्हीलर्स और बसें तेजी से EV की ओर शिफ्ट हो रही हैं. ग्लोबल सप्लाई चेन में डायवर्सिफिकेशन आ रहा है, यानी चीन से हटकर सप्लाई चेन अब भारत की ओर मुड़ रही है.

इस थीम के सबसे बड़े खिलाड़ियों में Exide, Amara Raja है, जो कि लीथियम आयन बैटरी में भारी निवेश कर रहीं हैं और इनकी बैलेंस शीट भी काफी मजबूत है. टाटा मोटर तो EV क्रांति में काफी आगे है, इसने हर प्राइस सेगमेंट में अपनी EV उतारी हैं. Olectra Greentech एक ऐसी कंपनी है जो EV चार्ट में भले शांत दिखे, लेकिन इलेक्ट्रिक बसों में ये भारत की सबसे बड़ी कंपनी है. अगर आपने किसी शहर में इलेक्ट्रिक बस देखी होगी—बहुत ज्यादा संभावना है कि वह Olectra ने बनाई हो.

ऊपर बताए गए स्टॉक्स सिर्फ आपका ज्ञान बढ़ाने के लिए हैं. इसको किसी भी शेयर में निवेश की सलाह के तौर पर लें. निवेश के लिए अपने निवेश सलाहकार से बात करें.

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