तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल और क्लाउड की जरूरत ने एक नई दुनिया को जन्म दिया है, लेकिन घरेलू IT कंपनियों को Anthropic AI के एक टूल ने हिलाकर रख दिया है, ट्रेडिशनल IT सर्विसेज देने वाली कंपनियों को लेकर निवेशकों का भरोसा इस वक्त थोड़ा डगमगाया हुआ है. मगर, इसका दूसरा पहलू भी है, बीते 1–2 साल में AI के ChatGPT जैसे मॉडल, क्लाउड सर्विसेज देने वाली कंपनियों जैसे कि AWS, Azure, Google की डिमांड एकदम से बढ़ी है. इसलिए ये टेक कंपनियां लाखों-करोड़ों डॉलर खर्च करके नए-नए बड़े डेटा सेंटर बना रही हैं. लेकिन डेटा सेंटर का इकोसिस्टम तैयार करना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन ये वक्त की जरूरत है. इसलिए जो कंपनियां डेटा सेंटर के इकोसिस्टम से जुड़ी हैं, फ्यूचर उन्हीं कंपनियों का है.
JM Financial Services की रिसर्च टीम ने डेटा सेंटर वैल्यू चेन के कई हिस्सों में मजबूत पोजिशन वाली कंपनियों को पिक्स के रूप में हाइलाइट किया गया है. ये कंपनियां सिर्फ डेटा सेंटर बनाने वाली नहीं हैं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, कूलिंग, नेटवर्किंग, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस में एक्सपोजर रखती हैं, जिन्हें सेक्टर की ग्रोथ से सीधा फायदा मिल सकता है. इन सभी कंपनियों में JM Financial ने खरीदारी की राय के साथ टारगेट प्राइस भी दिया है, जो कि 15-20% अपसाइड पर हैं. ये कौन सी कंपनियां आर्टिकल में आगे हम डिस्कस करेंगे, लेकिन पहले डेटा सेंटर्स के कुछ जरूरी पहलुओं को समझना जरूरी है.
डेटा सेंटर के मोर्चे पर तेजी से उभरता भारत
JM फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के मुताबिक – दुनिया भर में डेटा सेंटर की कुल क्षमता दोगुनी होने वाली है, जो लगभग 78 GW तक पहुंच जाएगी. यह बढ़ोतरी खासतौर पर बड़े-बड़े हाइपरस्केलर जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन के विस्तार और AI-क्लाउड जैसी चीजों की बहुत ज्यादा मांग से हो रही है. डेटा सेंटर के मामले में भारत भी बहुत तेजी से उभर रहा है. 2025 में भारत का कुल डेटा सेंटर कैपेसिटी लगभग 1.1-1.3 GW पहुंच चुकी है, और 2026 तक ये 2 GW से ज्यादा होने की उम्मीद है.2030 तक ये 5 GW या इससे ज्यादा हो सकती है. इसके लिए करीब 30-40 बिलियन डॉलर यानी करीब 2.5-3.3 लाख करोड़ रुपये के भारी भरकम निवेश की जरूरत होगी. ये सब AI, 5G, क्लाउड और डिजिटल इंडिया जैसी वजहों से हो रहा है, जिससे भारत ग्लोबल स्तर पर मजबूत डिजिटल हब बन रहा है.
डेटा सेंटर्स के लिए पॉलिसी सपोर्ट
सरकार ने अपने बजट में डेटा सेंटर के लिए कई बड़े ऐलान भी किए हैं. इसमें विदेशी कंपनियों को टैक्स हॉलिडे का ऐलान किया गया है, जिसका फायदा 2047 तक मिलेगा. ये छूट उन विदेशी कंपनियों को मिलेगी जो ग्लोबल क्लाउड सर्विसेज भारत में बने डेटा सेंटर से ऑफर करती हैं. इसके अलावा, अगर डेटा सेंटर सर्विस देने वाली कंपनी भारत में रिलेटेड एंटिटी है, तो रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन में लागत पर 15% सेफ हार्बर दिया गया है. इससे टैक्स विवाद कम होंगे और कंपनियों को ज्यादा भरोसा मिलेगा. इसका नतीजा ये होगा कि भारत में डेटा सेंटर की क्षमता तेजी से बढ़ेगी और देश ग्लोबल डिजिटल हब बनने की ओर मजबूती से बढ़ेगा.सरकार ने इसमें 100% FDI ऑटोमैटिक रूट के जरूर मंजूर किया है, यानी विदेशी निवेशकों को भारत में डेटा सेंटर या इससे जुड़े बिजनेस में 100% तक निवेश करने के लिए पहले से सरकार से कोई मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी.
समझिए डेटा सेंटर्स का इकोसिस्टम
एक डेटा सेंटर का इकोसिस्टम तैयार करने के लिए कई मोर्चों पर काम करना पड़ता है. जैसे –
सर्वर और स्टोरेज सिस्टम: ये वे मुख्य मशीनें हैं जो काम संभालती हैं, जैसे वेबसाइट चलाना, ऐप्लिकेशन चलाना और क्लाउड स्टोरेज का मैनेजेंट करना
नेटवर्किंग उपकरण: राउटर, स्विच और फायरवॉल ये चीजें सर्वर्स को आपस में और बाहर की दुनिया से जोड़ती हैं ताकि डेटा आसानी से आ-जा सके
पावर सप्लाई सिस्टम: UPS और बैकअप जनरेटर, इनसे बिजली सप्लाई में रुकावट नहीं आती है, डेटा सेंटर 24 घंटे लगातार चलते रहते हैं
कूलिंग सिस्टम: ठंडा रखने की मशीनें, ये बहुत जरूरी हैं क्योंकि सर्वर बहुत गर्म हो जाते हैं, जिससे कामकाज पर असर पड़ सकता है
सुरक्षा व्यवस्था: फिजिकल सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे फायरवॉल, एंटीवायरस, एन्क्रिप्शन, ये सब डेटा और सिस्टम को हैकिंग, चोरी से बचाते हैं.
किस पर कितना खर्च
इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर बनाने में कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) यानी शुरुआती निवेश का ब्रेकडाउन कैसे होता है, इसको भी समझने की जरूरत है, ताकि ये समझा जा सके कि डेटा सेंटर के कौन से हिस्से पर सबसे ज्यादा खर्च आता है और क्यों. JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट बताती है कि
IT हार्डवेयर: सर्वर, GPU, स्टोरेज, स्विच पर सबसे ज्यादा खर्च होता है, कुल कैपेक्स का ये 65% से 75% तक हो सकता है. मतलब, डेटा सेंटर का मुख्य हिस्सा कंप्यूटिंग और स्टोरेज के हार्डवेयर पर जाता है, क्योंकि ये AI, क्लाउड और प्रोसेसिंग के लिए सबसे जरूरी हैं.
पावर और कूलिंग: UPS, जेनरेटर, चिलर, कूलिंग सिस्टम पर 20% से 25% खर्च आता है. ये हिस्सा डेटा सेंटर का सबसे जरूरी हिस्सों में से एक है. क्योंकि बिजली सप्लाई हर वक्त चाहिए होती है
सिविल और शेल: जमीन, बिल्डिंग, परमिट वगैरह पर सबसे कम सिर्फ 5% से 10% का खर्च आता है, मतलब, इमारत और जमीन का खर्च कुल निवेश का छोटा हिस्सा है, बाकी सब टेक्निकल और इक्विपमेंट पर जाता है.

डेटा सेंटर पर JM Financial की टॉप पिक्स
तो ये बात साफ हो जाती है कि जैसे जैसे दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और क्लाउड का कारोबार बढ़ेगा, डेटा सेंटर्स की डिमांड भी उतनी ही तेजी के साथ बढ़ेगी और जाहिर है कि जो भी कंपनियां इस इकोसिस्टम से जुड़ी हैं, उन्हें इसका फायदा मिलेगा. JM Financial Services की रिसर्च टीम ऐसी ही कंपनियों की एक लिस्ट निकाली है. इसमें ब्लैक बॉक्स, पॉलीकैब इंडिया, सीमेंस इंडिया, टाटा कम्यूनिकेशंस, नेटवेब टेक्नोलॉजीज, CG Power जैसी कंपनियां शामिल हैं. जिसमें खरीदारी की राय दी गई है.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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