Neysa में Blackstone का दांव सिर्फ डील नहीं, ग्लोबल AI रेस में भारत की एंट्री है!

Blackstone's Big Bet on Neysa

ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन ने अपने को-इन्वेस्टर्स के साथ मिलकर भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्लाउड प्लेटफॉर्म Neysa में मेजोरिटी हिस्सेदारी हासिल कर ली है. कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं को फंड करने के लिए 1.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 10,900 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें कर्ज और इक्विटी दोनों शामिल हैं. इसके लिए एक समझौता किया गया है. Neysa एक तेजी से बढ़ता हुआ प्लेटफॉर्म है जो इंडस्ट्रीज के लिए और सरकारी संस्थाओं को जरूरी सॉल्यूशंस मुहैया कराता है.

डील क्या है?

कंपनी ने अब तक 600 मिलियन डॉलर की इक्विटी पूंजी जुटा ली है, और Neysa ब्लैकस्टोन की अगुवाई में अतिरिक्त 600 मिलियन डॉलर का कर्ज जुटाने की कोशिश कर रही है. इस सौदे में अन्य इक्विटी निवेशकों में टीचर्स वेंचर ग्रोथ, TVS कैपिटल, 360 ONE Assets और Nexus Ventures शामिल हैं. इसके अलावा, मौजूदा निवेशकों में Z47, Blume Ventures और जापान की टेक्नलॉजी दिग्गज NTT शामिल है. Neysa की एंटरप्राइज वैल्यूएशन करीब 1.4 बिलियन डॉलर बताई जा रही है, और ये भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा फंडिंग राउंड माना जा रहा है. सिर्फ 2 साल पुरानी के लिए ये बेहद कमाल की बात है.

Neysa क्या है?

Neysa शरद संघी का दूसरा बिजनेस है, जिन्होंने 1998 में Netmagic की शुरुआत की थी. ये भारत की सबसे पुरानी डेटा सेंटर सर्विस कंपनियों में से एक है. बाद में Netmagic इतनी बड़ी हो गई कि 2012 में NTT ने इसे खरीद लिया था. शरद संघी और पूर्व सीनियर नेटमैजिक एक्जिक्यूटिव अनिंद्य दास ने 2023 में Neysa को लॉन्च किया था. Neysa AI के लिए पूरा सेटअप देती है, जैसे कि ट्रेनिंग, रनिंग, मॉनिटरिंग वगैरह. ये अपनी सर्विसेज बड़े-बड़े बिजनेसेज से लेकर स्टार्टअप और सरकार तक को मुहैया कराती है.

Neysa कंपनी GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) पर बेस्ड क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करती है. ये बड़े-बड़े बिजनेस को इतनी ताकतवर कम्प्यूटिंग पावर देती है कि वे बड़े स्केल पर आर्टिफिशियल इंटेंलीजेंस पर काम कर सकें, जैसे कि जैसे AI मॉडल ट्रेन करना, चलाना और उसका इस्तेमाल करना. इसके क्लाइंट्स की फेहरिस्त काफी लंबी है. जैसे कि बैंक, हेल्थकेयर कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां वगैरहा, साथ ही स्टार्टअप्स और डिजिटल-नेटिव बिजनेस को भी सर्विस देती है. उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि कोई बैंक AI से फ्रॉड पकड़ना चाहता है, कोई अस्पताल कैंसर डिटेक्ट करने वाला AI बनाना चाहता है, कोई फैक्टरी प्रोडक्ट डिजाइन को तेज करना चाहती है या कोई मीडिया हाउस वीडियो एडिटिंग और कंटेट बनाने में AI का इस्तेमाल करना चाहती है. ये सभी को GPU पावर देती है.

भारत के लिए डील के क्या मायने?

जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल चलाने के चार्जिंग स्टेशन, बैटरीज का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए होता है, वैसे ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए भी एक पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए होता है, जिसकी फिलहाल तो काफी कमी है. आज की तारीख में भारत में IndiaAI Mission के तहत 38,000 GPUs ऑपरेशनल हैं यानी कामकाज कर रहे हैं, जबकि 10,000 GPUs साल 2026 के अंत तक और जोड़े जाएंगे. Neysa 20,000 से ज्यादा GPU लगाने वाली है, जबकि अभी सिर्फ 1,200 हैं. ये एक झटके में भारत की AI कम्प्यूटिंग कैपेसिटी को कई गुना बढ़ा देगा. 20,000 GPU का मतलब हजारों AI प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप्स और रिसर्च के अथाह मौके बनेंगे. इससे नई जॉब्स, नई स्किल्स, नया इकोसिस्टम तैयार होगा.

अभी सरकार भी इस दिशा में काफी जोर दे रही है, IndiaAI Mission चला रही है जिसका मकसद ही है AI को देश में ही विकसित करना और विदेशी क्लाउड पर निर्भरता को खत्म करना. देखा जाए तो Neysa इसी सोच का एक हिस्सा है. डेटा भारत में रहेगा, स्पीड ज्यादा होगी, लागत कम और सबसे बड़ी बात प्राइवेसी की फुल गारंटी मिलेगी. सरकार का विजन एक है कि 2047 तक भारत को AI-सुपरपावर बनाना, इसके लिए इंफ्रा चाहिए यानी GPU, डेटा सेंटर और क्लाउड, यही वजह है कि इस बार के बजट में ग्लोबल क्लाउड सर्विसेज देने वाली कंपनियों के लिए 2047 टैक्स हॉलीडे का ऐलान किया गया. ये छूट विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे Google Cloud, AWS, Microsoft Azure जैसी बड़ी कंपनियां को मिलेगी, लेकिन शर्त ये कि वे भारत में बने डेटा सेंटर का इस्तेमाल करके ग्लोबल सर्विस दें.

ब्लैकस्टोन ने OpenAI, Anthropic जैसी कंपनियों में भी पैसा लगाया है. यही कंपनियां अब भारत में AI के लिए बड़ा मौका देख रही हैं, उनका मानना है कि भारत AI का अगला बड़ा प्लेयर है. मतलब साफ है कि विदेशी निवेशकों को ये इशारा है कि भाई आओ, भारत में AI इंफ्रा में पैसा लगाओ. देखिए मोटे तौर पर ये समझ लीजिए कि ये डील सिर्फ एक स्टार्टअप का फंडिंग नहीं है, ये भारत को AI में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया एक जरूरी कदम है.

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