चीन ने सोलर एक्सपोर्ट छूट खत्म की! भारत की इन सोलर कंपनियों के लिए होगा गेम-चेंजर?

चीन ने सोलर एक्सपोर्ट छूट खत्म की, भारत की किन सोलर कंपनियों के लिए होगा गेम-चेंजर?

चीन ने सोलर PV प्रोडक्ट्स के लिए वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) एक्सपोर्ट छूट को पूरी तरह से वापस ले लिया है। ये छूट सोलर सेल्स, सोलर पैनल्स और वेफर्स जैसे प्रोडक्ट्स पर मिलती थी। अब 1 अप्रैल, 2026 के बाद ये सारे प्रोडक्ट्स बनाकर एक्सपोर्ट करने वाली चीन की सोलर कंपनियों को छूट नहीं मिलेगी। अभी चीन की सरकार इन सोलर PV उत्पादों पर 9% का एक्सपोर्ट डिस्काउंट देती है। हालांकि इससे पहले ये छूट 13% हुआ करती थी, जिसे घटाकर 9% किया गया था। मगर अब ये छूट पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

चीन ने आखिर ऐसा किया क्यों?

यक्ष प्रश्न यही है कि चीन ऐसा कर क्यों रहा है, जब पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की होड़ है, तो चीन अपने देश की कंपनियों को हताश क्यों कर रहा है। दरअसल, चीन में सोलर कंपनियां इतनी ज्यादा हो गई हैं कि उत्पादन क्षमता डिमांड से कहीं ज्यादा है। दूसरी तरफ चीन की कंपनियां अपनी ही सरकार की ओर से मिल रही छूट का गलत फायदा उठा रही हैं। जो भी छूट चीन की सरकार इन कंपनियों को देती है. ये कंपनियां उस छूट के पैसे को विदेशी खरीदारों को डिस्काउंट के रूप में दे रहीं थीं, जिससे कीमतें गलत तरीके से कम हो रहीं थीं। जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय विवाद बढ़ रहे थे, जैसे एंटी डंपिंग और सब्सिडी विरोधी कार्रवाई का खतरा बढ़ गया था।

चीन के इस कदम से भारत पर क्या असर होगा

चीन के इस फैसले का भारत की कंपनियों पर क्या असर होगा, अब जरा इसको समझते हैं। सोलर सेल्स, मॉड्यूल्स और वेफर्स पर VAT निर्यात छूट पूरी तरह खत्म करने का फैसला भारत की सोलर इंडस्ट्री पर मिला-जुला असर डालेगा। भारत चीन से बड़े पैमाने पर सोलर इक्विपमेंट इंपोर्ट करता है। चीन के एक्सपोर्ट पर नकेल कसने से ये इक्विपमेंट भारत को महंगे मिलेंगे, शॉर्ट टर्म में भारत के लिए ये तकलीफ से भरा हो सकता है। लेकिन ये फैसला आगे चलकर भारत के लिए अच्छा साबित होगा।

किन कंपनियों को होगा फायदा

अब आप पूछेंगे क्यों? वो इसलिए क्योंकि चीन जब 9-13% की छूट हटा देगा तो चीन के सोलर उपकरण महंगे होंगे, भारत के डेवलपर्स और मैन्युफैक्चरर्स जो चीन से सेल्स/मॉड्यूल्स इंपोर्ट करते हैं, उनकी लागत बढ़ेगी। इससे सोलर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 5-9% तक बढ़ सकती है। तो कंपनियां घरेलू मैन्युफैक्चरर्स की ओर रुख करेंगी। चीनी उत्पाद महंगे होने से डंपिंग रुकेगी। इसका फायदा भारतीय कंपनियां जैसे Waaree Energies, Premier Energies, Adani Solar, Tata Power Solar को होगा।

भारत में अभी मॉड्यूल क्षमता ज्यादा है, जो कि साल 2025 के हिसाब से 144 GW है, लेकिन सेल क्षमता कम है, जो कि 29-30 GW है, इसलिए 70-80% सेल्स चीन से इंपोर्ट होते हैं। मतलब ये कि भारत बहुत से उपकरणों के लिए अभी चीन के ऊपर निर्भर है, लेकिन हम घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिश भी कर रहे हैं। भारत की PLI स्कीम और ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) नीति पहले से ही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट कर रही हैं। ALMM List-II (सेल्स के लिए) जुलाई 2026 से अनिवार्य होगी, जो चीनी सेल इंपोर्ट को कम करेगी। इससे भारत की सेल क्षमता 2030 तक 65 GW तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे भारतीय निर्माताओं को घरेलू और ग्लोबल मार्केट में खुलकर खेलने का मौका मिलेगा, वो ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगी। ये चारों कंपनियां जिनका ऊपर जिक्र किया गया है, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग यानी सेल और मॉड्यूल पर फोकस कर रही हैं और PLI स्कीम और ALMM से सपोर्टेड हैं।

किन कंपनियों को नुकसान

इससे उन कंपनियों को नुकसान होगा जो मैन्युफैक्चरर नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से सोलर प्रोजेक्ट डेवलपर हैं। जैसे कि NTPC Renewable Energy जो कि NTPC की सब्सिडियरी है और एक EPC कंपनी है। जो बड़े पैमाने पर सोलर प्रोजेक्ट्स डेवलप करती है, जैसे कि जैसे खावड़ा, नोख और शाजापुर। कंपनी का लक्ष्य 2032 तक 60 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी को हासिल करने का है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा सोलर का है। अभी 13 GW+ रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स अंडर कंस्ट्रक्शन हैं। चीन की VAT एक्सपोर्ट छूट पूरी तरह खत्म होने से चीनी सोलर मॉड्यूल्स/सेल्स की कीमतें 9% तक बढ़ेंगी। इससे NTPC रीन्युएबल्स को शॉर्ट टर्म में नुकसान हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में ये कम हो जाएगा। वो ऐसे कि NTPC रीन्युएबल्स घरेलू सप्लायर्स की तरफ शिफ्ट कर रही है, NTPC ने हाल ही में GREW Solar जैसी भारतीय कंपनी से बड़ा ऑर्डर दिया है। इससे चीन के फैसले का असर कम होगा।

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