सिर्फ ITC नहीं, पहले भी दूसरों की आग में हाथ जला चुकी है LIC

सिर्फ ITC नहीं, पहले भी दूसरों की आग में हाथ जला चुकी है LIC

आग कहीं भी लगे, आंच LIC तक पहुंच ही जाती है। हाल का ही मामला ITC का है, सरकार ने सिगरेट पर टैक्स बढ़ाया तो ITC के मार्केट कैप से दो दिनों में 72,000 करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। मगर, सिगरेट के धंधे में नुकसान के डर से ITC का फेफड़ा जला तो जला, LIC ने पैसिव स्मोकिंग में ही करीब 11,500 करोड़ रुपये फूंक दिए, क्योंकि ITC में देश की इस सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी की 15.86% हिस्सेदारी है।

LIC के निवेशक बिना कुछ किए ही अपना पोर्टफोलियो लाल कर बैठे। मगर LIC के साथ ऐसा पहली बार नहीं है, जब उसने दूसरे की टूटी नाव में सवारी की हो और उसने नुकसान हुआ हो। तारीख़ में ऐसे कई मौके आए हैं जब LIC को फायर ब्रिगेड की जिम्मेदारी दी गई, दूसरों की आग बुझाने में उसका अपना पानी भी खत्म होता रहा। नीचे कुछ ऐसे ही मामलों के बारे में बता रहा हूं।

IL&FS संकट (2018)


साल 2018 का IL&FS संकट याद है आपको? इस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ‘Too Big To Fail’ माना गया था। इसमें भी LIC की 25.34% हिस्सेदारी थी, ये सबसे बड़ी शेयरहोल्डर थी। IL&FS पर 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे वो चुका नहीं पाई, इसमें बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां सब फंसी थीं. ऐसा लगा जैसे अमेरिका में लीमन संकट आया था, वैसा ही कुछ भारत में हो गया। बाद में IL&FS बोर्ड का टेकओवर हुआ. सरकार की ओर LIC से फंड्स डालने के लिए कहा गया। हालांकि LIC को इससे कितना नुकसान हुआ इसका सटीक फिगर तो कहीं नहीं मिलता, लेकिन IL&FS ग्रुप की कंपनियों के डिफॉल्ट डेट इंस्ट्रूमेंट्स में LIC का 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का एक्सपोजर था।

DHFL संकट (2019)


अपने समय की दिग्गज हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Dewan Housing Finance यानी DHFL जब वित्तीय संकट में फंसी तब भी LIC चपेट में आई थी. ये कंपनी होम लोन देती थी। 2019 में कंपनी लिक्विडिटी स्ट्रेस और रिस्क बढ़ने के चलते कई डिबेंचर/बॉन्ड भुगतान देरी से करने लगी और आखिर में डिफॉल्ट कर गई। DHFL ने बकाये ब्याज भुगतान नहीं किये जिससे रेटिंग एजेंसियों ने उसके बॉन्ड्स को “D” (default) रेटिंग दे दी। इससे DHFL की मार्केट वैल्यू और डेट इंस्ट्रूमेंट्स दोनों ही जमीन पर आ गए। निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।

LIC ने DHFL के डेट इंस्ट्रूमेंट्स में बड़ा एक्सपोजर रखा था। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि LIC का DHFL में एक्सपोजर करीब 6,500 करोड़ रुपये था, जिसे उसने प्रॉविजन यानी की संभावित नुकसान के लिए रिज़र्व बनाया था। इसी दौरान LIC के पोर्टफोलियो में DHFL के कुछ पेपर्स D रेटिंग माने गए, इससे LIC को लॉस प्रॉविजन करना पड़ना, क्योंकि DHFL के इंस्ट्रूमेंट्स की वैल्यू घट गई थी। मतलब ये कि DHFL पैसा नहीं लौटा पा रही थी, इसलिए LIC ने मान लिया कि उसका कुछ पैसा डूब सकता है। DHFL के शेयरों में 2019 में करीब 38% तक गिरावट देखी, जिससे उसके निवेशकों को भी बड़ा नुकसान हुआ, जिसमें LIC भी शामिल है।

Yes Bank संकट (2020)


राणा कपूर की Yes Bank में भी LIC अपने हाथ जला चुकी है। इस बैंक की असलियत 2018–19 के बाद सामने आने लगी। बढ़ते NPAs, बदतर कॉरपोरेट गवर्नेंस और दनानदन लेंडिंग ने बैंक की बैलेंस शीट तहस-नहस कर दी। 2019 के अंत तक Yes Bank का ग्रॉस NPA 18% से ज्यादा पहुंच गया, ये बहुत बड़ा खतरा था। मार्च 2020 में हालात इतने खराब हो गए कि RBI को बैंक पर मोरटोरियम लगाना पड़ा।

सरकार और RBI के कहने पर LIC ने यस बैंक को बचाने का बीड़ा उठाया। LIC ने करीब 8,000–9,000 करोड़ रुपये का निवेश कर बैंक में बड़ी हिस्सेदारी ली। ये निवेश भारी पड़ा, Yes Bank का शेयर, जो कभी 200 से ऊपर था, 10 रुपये तक चला गया। इससे LIC को अनुमानित 6,000–7,000 करोड़ का नुकसान हुआ। हालांकि ये निवेश उस समय बैंकिंग सिस्टम को गिरने से बचाने के लिए किया गया था। यस बैंक को बाद में SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्शियम ने टेकओवर किया.

अदाणी ग्रुप हिंडनबर्ग संकट (2023)


2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों की गिरावट से LIC को भारी नुकसान हुआ था। जनवरी 2023 में US शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने अदाणी ग्रुप पर ढेरों गंभीर आरोप लगाए, जिससे अदाणी की 10 लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप 23 जनवरी, 2023 को 19 लाख करोड़ रुपये से गिरकर फरवरी 2023 तक 10 लाख करोड़ तक पहुंच गई, यानी करीब 60% क्रैश देखने को मिला।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 24 फरवरी 2023 तक LIC का अदाणी पोर्टफोलियो करीब 82,970 करोड़ से घटकर 33,242 करोड़ तक गिर गया, यानी तकरीबन 50,000 करोड़ रुपये का मार्क टू मार्केट नुकसान। हालांकि अब काफी रिकवरी हो चुकी है। LIC ने अदाणी ग्रुप की कंपनियों की डेट सिक्योरिटीज में निवेश किया है। इसमें मुख्य रूप से Adani Ports & SEZ के NCDs शामिल हैं, मई 2025 में LIC ने अकेले 5,000 करोड़ का बॉन्ड इश्यू सब्सक्राइब किया।

हालांकि यहां पर एक बात मैं साफ कर दूं कि ITC पर कोई संकट नहीं है, न कर्ज को लेकर कोई समस्या है और न ही कारोबार को लेकर, ये एक खबर का असर है, जो उसके शेयरों पर दिखना लाजिमी था। वक्त के साथ, कंपनी इस झटके से उबर जाएगी। जबकि बाकी जो चार मामले ऊपर बताए हैं, वो कंपनी विशेष के लिए संकट का ही दौर था। मगर ऐसा नहीं है कि LIC ने अपने निवेशकों का सिर्फ नुकसान ही किया है या यूं कहें कि अपने निवेश से नुकसान ही उठाया है, अपने निवेश से मोटा मुनाफा भी कमाया है, लेकिन ये कहानी फिर कभी।

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