‘Multibagger’ से ‘Multibeggar’ तक: इन 8 शेयरों ने लूटी निवेशकों की 90% वेल्थ, क्या अब दांव लगाना सही?

From Multibaggers to Multi-beggars

शेयर मार्केट के एक बहुत पुरानी और मशहूर कहावत है, “भाव भगवान छे” यानी Price is God. मगर यही भगवान जब आपकी मनोकामनाएं पूर करना बंद कर दे तो आपके पोर्टफोलियो का भरोसा भगवान से उठने लगता है. ऐसे कई शेयर हुए हैं, जो एक समय में दलाल स्ट्रीट के डार्लिंग हुआ करते थे, जिन्हें अपने पोर्टफोलियो में भरने की होड़ लगती थी, इस उम्मीद में कि ये भी एक दिन रिलायंस या HDFC बनेंगे. इन शेयरों ने निवेशकों को 10-10 गुना तक रिटर्न दिया, मगर बाज़ार बड़ा ज़ालिम होता है, मल्टीबैगर का तमगा टांगे इन शेयरों की असल कीमत वो नहीं थी, जो निवेशकों ने आंकी थी, बल्कि वो थी, जो बाज़ार ने आखिरकार उन्हें दिया.

यस बैंक से लेकर ओला इलेक्ट्रिक तक, और सुजलॉन से लेकर स्पाइसजेट तक, ये कुछ कंपनियां हैं जिस पर निवेशकों ने भरोसा किया, अपनी कमाई लगाई, लेकिन आखिर में अपने हाथ जला बैठे.
अपने पीक से ऐसे शेयर 90% से 95% तक टूट चुके हैं. मगर, एक उम्मीद अब भी बाकी है कि वो एक दिन आएगा कि ये वापस उठेंगे और अपनी पुरानी चमक को हासिल करेंगे. लेकिन क्या वाकई ऐसा हो सकता है, क्या ऐसा संभव है. ऐसे ही 8 शेयरों का एनालिसिस करेंगे.

1: Yes Bank
जब बैंकिंग का ‘पोस्टर बॉय’ बना विलेन

यस बैंक को कभी प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर अगला ‘HDFC’ माना जाता था. अगस्त 2018 में इस शेयर ने 404 रुपये का ऑल टाइम हाई बनाया था, लेकिन अब ये 17-18 रुपये के बीच घूम रहा है. यानी पीक से ये 95% से ज्यादा टूट चुका है.

शेयर क्यों टूटा: यस बैंक के पतन की असल वजह थी इसके फाउंडर और पूर्व CEO राणा कपूर के नेतृत्व में खराब कॉर्पोरेट गवर्नेंस, स्ट्रेस्ड कंपनियों को बिना उचित ड्यू डिलिजेंस के भारी भरकम लोन देना, जिससे NPAs का पहाड़ खड़ा हो गया, जिसे बैंक ने छुपाया. RBI की एसेट क्वालिटी रिव्यू में ये सच्चाई सामने आई. जब RBI ने मैनेजमेंट बदला, तब तक निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका था.

मार्केट कैप: यस बैंक का मार्केट कैप जो कभी 1 लाख करोड़ रुपये के पार हुआ करता था, अब वो सिर्फ 56,000 करोड़ रुपये रह गया है. हालांकि, SBI और अन्य बैंकों के साथ आने से बैंक बच तो गया, लेकिन पुराने निवेशकों का पैसा वापस उस स्तर पर आने में शायद दशकों लग जाएं.

अभी क्या हाल है? स्टॉक का 3 साल का रिटर्न ऑन इक्विटी सिर्फ 3.62% है. हालांकि कंपनी लगातार प्रॉफिट बनाकर दे रही है. ब्याज से आय भी स्थिर है. कंपनी का NPA भी काबू में है और ग्रॉस NPA 2% के नीचे है.

2: SpiceJet
आसमान की ऊंचाइयों से जमीन पर ‘क्रैश-लैंडिंग’

एविएशन सेक्टर को वैसे भी ‘कैश बर्निंग’ बिजनेस माना जाता है, स्पाइसजेट की कहानी किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रही. एक समय में अजय सिंह के नेतृत्व में स्पाइसजेट ने एविएशन के आसमान में तरक्की की उड़ान भरी थी. लेकिन पिछले कुछ सालों में यह शेयर निवेशकों के लिए एक बुरा ख्वाब बन चुका है. साल 2017-18 के दौरान स्पाइसजेट का शेयर ₹150-160 के बीच था, आज यह शेयर ₹9-10 के करीब है. यानी अपने पीक से ये 94% के करीब टूट चुका है.

शेयर क्यों टूटा: स्पाइसजेट की आज जो हालत है, उसके पीछे कई वजहें हैं, कंपनी लगातार कर्ज के जाल में फंसी रही. विमानों के लीज रेंटल्स और वेंडर्स का बकाया चुकाने में कंपनी को भारी मुश्किलें आईं. पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन के साथ चल रहे लंबे कानूनी विवाद और आर्बिट्रेशन सेटलमेंट ने कंपनी की बैलेंस शीट को बिखेर कर रख दिया.

बोइंग 737 मैक्स विमानों का ग्राउंडेड होना और तकनीकी खामियों के कारण DGCA की सख्ती ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया. इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस के बढ़ते दबदबे और नई एयरलाइंस के आने से स्पाइसजेट के लिए मुश्किलें बढ़ती चली गईं.

मार्केट कैप: जो कंपनी कभी मिड-कैप सेगमेंट की जान हुआ करती थी, इसकी मार्केट कैप महज 1,569 करोड़ रुपये रह गई है. निवेशकों ने हर गिरावट पर इसे ‘सस्ता’ समझकर खरीदा, लेकिन धोखा ही मिला.

अभी क्या हाल है?: कंपनी अब फंड जुटाने (Fundraising) की कोशिश कर रही है ताकि अपने पुराने बकायेदारों को भुगतान कर सके और ग्राउंडेड विमानों को फिर से हवा में उड़ा सके. हालांकि, कंपनी का नेट वर्थ नेगेटिव है, कंपनी लगातार घाटे में है. प्रमोटर होल्डिंग लगातार कम हो रही है. प्रमोटर्स ने अपनी होल्डिंग का 47.7% गिरवी रखा हुआ है.

3: Rajesh Exports

एक जमाने में राजेश एक्सपोर्ट्स दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों में से एक मानी जाती थी. Fortune500 की लिस्ट में शामिल इस कंपनी ने निवेशकों को भर-भरकर रिटर्न दिया. लेकिन पिछले कुछ समय में इसकी चमक पूरी तरह फीकी पड़ गई है. साल 2023 की शुरुआत में ये शेयर ₹1,030 के करीब ट्रेड कर रहा था, जो अब टूटकर ₹60-70 के दायरे में आ गया है. यानी अपने पीक से इसमें लगभग 93% की भारी गिरावट हो चुकी है.

शेयर क्यों टूटा: कंपनी के लिए सबसे बड़ी समस्या रही खराब कॉर्पोरेट गवर्नेंस, SEBI की ओर से बार-बार फाइन और फॉरेंसिक ऑडिट के नोटिस, फाइनेंशियल डिसक्लोजर में देरी, कैश फ्लो में गड़बड़ी, हाई ट्रेड रिसीवेबल्स और कम प्रॉफिट मार्जिन. निवेशकों के बीच कंपनी के बिजनेस मॉडल और मुनाफे को लेकर हमेशा संशय रहा. पिछली कई तिमाहियों से मुनाफे में भारी गिरावट और रेवेन्यू में सुस्ती ने रही-सही कसर पूरी कर दी.

मार्केट कैप: साल 2021-22 के दौरान जब यह शेयर अपने ऊपरी स्तरों पर था, तब इसका मार्केट कैप ₹30,000 करोड़ के पार निकल गया था, जो कि अब गिरकर लगभग ₹2,580 करोड़ रह गया है. यानी निवेशकों के लगभग ₹27,000 करोड़ से ज्यादा की वैल्यू स्वाहा हो चुकी है.

अभी क्या हाल है? फंडामेंटल्स अभी भी कमजोर हैं और गवर्नेंस के सवाल बने हुए हैं, जिसने इसे रिटेल निवेशकों के लिए काफी रिस्की बना दिया है. हालांकि अच्छी बात ये है कि कंपनी करीब करीब कर्जमुक्त है. कंपनी का मुनाफा धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है. Q3 में कंपनी का YoY PAT 101% बढ़कर 72 करोड़ रुपये रहा है.

4: Suzlon Energy

सुजलॉन कभी भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्रांति का ‘पोस्टर बॉय’ था. Wind Energy सेक्टर में तुलसी तांती की इस कंपनी ने ऐसी रफ़्तार पकड़ी कि निवेशकों को इसमें भविष्य का ‘रिलायंस’ दिखने लगा था. साल 2008 के आसपास ये शेयर ₹460 पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब ये 1.70 रुपये तक टूट गया था. मगर इसने वापसी की फिलहाल ये 40 रुपये के आस-पास है, यानी अपने पीक से ये 91% नीचे है.

शेयर क्यों टूटा: गिरावट की सबसे बड़ी वजह थी कंपनी पर लगातार बढ़ता कर्ज और आक्रामक तरीके से किया जा रहा एक्सपैंशन, कंपनी ने विदेशी कंपनियों को खरीदने के लिए भारी लोन लिया, जो बाद में इसके लिए गले की हड्डी बन गया. लगातार घाटा, बार-बार डेट रिस्ट्रक्चरिंग और ऑपरेशनल दिक्कतों ने निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया. इसके अलावा विंड एनर्जी सेक्टर में सरकारी नीतियों के बदलाव और सुस्त डिमांड ने कंपनी की कमर तोड़ दी.

मार्केट कैप: अपने सुनहरे दौर में सुजलॉन का मार्केट कैप ₹68,000 करोड़ के पार था, जो गिरावट के चरम पर महज ₹2,000-3,000 करोड़ रह गया था, मगर फिलहाल रिकवरी के बाद यह ₹55,000 करोड़ के आसपास है, लेकिन पुराने निवेशकों की वेल्थ अभी भी रिकवर नहीं हुई है.

अभी क्या हाल है? अच्छी बात ये है कि कंपनी अब कर्ज मुक्त होने के करीब है. ऑर्डर्स की पाइपलाइन मजबूत है और सरकार का फोकस ग्रीन एनर्जी पर है. इसे एक ‘टर्नअराउंड स्टोरी’ माना जा रहा है. बीते तीन साल का प्रॉफिट ग्रोथ 195% पर है, लेकिन कंपनी की लायबिलिटीज लगातार बढ़ रही हैं.

5: Adani Total Gas

अदाणी ग्रुप का ये शेयर कभी रिटेल निवेशकों की आंखों का तारा था. जनवरी 2023 में ये शेयर ₹4,000 के अपने ऑल-टाइम हाई पर ट्रेड कर रहा था, हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद इसमें ऐसी बिकवाली आई कि ये टूटकर ₹500-600 के दायरे में आ गया. यानी अपने पीक से इसमें लगभग 87% की भारी गिरावट देखी गई.

शेयर क्यों टूटा: सबसे बड़ी वजह तो हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ही थी, जिसने अदाणी ग्रुप की कंपनियों का काफी नुकसान पहुंचाया. अदाणी टोटल की वैल्युएशन को लेकर भी काफी सवाल उठे, क्योंकि टूटने से पहले इसका P/E रेशियो 700 के पार निकल गया था, जो कि फंडामेंटल आधार पर बहुत महंगा था. हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगे ‘स्टॉक मैनिपुलेशन’ और ‘हद से ज्यादा कर्ज’ के आरोपों ने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया और बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग हुई.

मार्केट कैप: अपने सुनहरे दौर में कंपनी का मार्केट कैप ₹4.40 लाख करोड़ से भी ज्यादा था. गिरावट के बाद ये घटकर करीब ₹55,000-60,000 करोड़ के आसपास रह गया है. यानी निवेशकों की करीब ₹3.8 लाख करोड़ की वेल्थ कागजों पर स्वाहा हो गई.

अभी क्या हाल है? अच्छी बात यह है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल बहुत मजबूत है. इसका मुनाफा (PAT) स्थिर ग्रोथ के साथ बना हुआ है. कंपनी विस्तार कर रही है. मगर, इसका PE अब भी 89 पर है और PEG रेश्यो तो 10 के पार है, यानी वैल्युएशन अब भी कहीं ज्यादा है.

6: PC Jeweller

एक समय था जब PC Jeweller भारतीय शेयर बाजार के रिटेल निवेशकों का सबसे पसंदीदा ‘मिडकैप’ शेयर हुआ करता था, लेकिन जैसे-जैसे कंपनी के प्रमोटर्स और बैंकों के बीच विवाद गहराया, इस शेयर की चमक भी जाती रही.

शेयर का ऑल टाइम हाई 60 रुपये के करीब था, लेकिन जैसे ही कंपनी के प्रमोटर्स के खिलाफ खबरें आईं, शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गया और ₹8-10 के निचले स्तर तक जा गिरा. हालांकि हालिया समय में इसमें कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अपने ऑल-टाइम हाई से यह अब भी 87% से ज्यादा की गिरावट पर है.

शेयर क्यों टूटा: शेयर टूटने की कई वजहें रही हैं, ‘कॉर्पोरेट गवर्नेंस’ और ‘लोन डिफॉल्ट’ सबसे बड़ी वजहें थीं. कंपनी पर बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया था, जिसे चुकाने में वह विफल रही. SBI) सहित कई बैंकों ने इसे ‘NPA’ घोषित कर दिया और मामला NCLT तक पहुंच गया. प्रमोटर्स ने शेयरों को गिरवी रखी और इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों ने निवेशकों का भरोसा पूरी तरह खत्म कर दिया.

मार्केट कैप: अपने सुनहरे दौर में पीसी ज्वेलर का मार्केट कैप ₹23,000 करोड़ के पार था, फिलहाल रिकवरी के बाद यह ₹6,800 करोड़ के आसपास है.

अभी क्या हाल है? कंपनी ने पुराने कर्जों का बड़ा हिस्सा सेटल कर लिया है और कर्ज को कम करने पर फोकस कर रही है. कंपनी अपने पुराने विवाद सुलझाने की कोशिश कर रही है. Q3 FY26 में रेवेन्यू 37% YoY बढ़कर ₹875 करोड़ रहा और PAT 28% YoY बढ़कर ₹190 करोड़ रहा, ROE अब 12.7% के आसपास है, लेकिन गवर्नेंस के पुराने सवाल अभी भी बने हुए हैं. कंपनी के स्टोर ऑपरेशंस फिर से पटरी पर लौट रहे हैं। हालांकि, भारी कंपटीशन और पुराने दाग धोने में इसे अभी लंबा वक्त लगेगा.

7: Ola Electric

ओला इलेक्ट्रिक की लिस्टिंग ने बाजार में जबरदस्त हलचल मचाई थी. लोग भाविश अग्रवाल में एलन मस्क और ओला में टेस्ला को देख रहे थे. लेकिन लिस्टिंग के कुछ ही हफ्तों बाद ही सेंटीमेंट्स का ये गुब्बारा फट गया.

लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयर ने ₹157.40 का ऑल-टाइम हाई बनाया था, लेकिन कुछ समय बाद ही टूटते टूटते ₹25-30 के दायरे में आ गया. यानी अपने शिखर से ये 84% की भारी गिरावट दर्ज की गई है.

शेयर क्यों टूटा: गिरावट की सबसे बड़ी वजह खराब सर्विस क्वालिटी और ‘ग्राहकों की नाराज़गी रही. हजारों ग्राहकों की शिकायतों और सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद के कारण CCPA ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया. सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक व्हीकल पर दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती की, जिससे मार्जिन पर भारी दबाव आया. TVS और बजाज जैसे प्लेयर्स से कड़ी टक्कर मिली.

मार्केट कैप: अपने पीक पर कंपनी का मार्केट कैप ₹69,000 करोड़ के पार निकल गया था, जो अब घटकर लगभग ₹12,500 करोड़ के आसपास रह गया है. यानी निवेशकों की ₹56,000 करोड़ से ज्यादा की मार्केट वैल्यू हवा हो गई.

अभी क्या हाल है? ओला इलेक्ट्रिक अभी भी एक लॉस मेकिंग कंपनी है. कंपनी अपनी खुद की Gigafactory लगाने पर काम कर रही है जिससे लागत कम हो सकती है, लेकिन जब तक कंपनी सर्विस के मोर्चे पर ग्राहकों का भरोसा नहीं जीतती और नेट प्रॉफिटेबल नहीं होती, तब तक इसमें बड़ा उछाल मुश्किल लग रहा है. भाविश अग्रवाल ने लगातार कंपनी में अपनी होल्डिंग घटाई है, जिससे सेंटीमेंट्स थोड़े बिगड़े हैं.

8: Easy Trip Planners

एक जमाने में ईजी ट्रिप प्लानर्स (EaseMyTrip) को ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर का नया स्टार माना जाता था, जो कोविड के बाद ट्रैवल बूम के साथ निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दे रहा था. कंपनी का ऑल टाइम हाई ₹36.75 रुपये है, जो कि अप्रैल 2026 में ये ₹6.50 के आसपास ट्रेड कर रहा है. यानी अपने पीक से इसमें 85% से ज्यादा की भारी गिरावट हो चुकी है.

शेयर क्यों टूटा: गिरावट की सबसे बड़ी वजह ‘प्रॉफिट बुकिंग’ और ‘इक्विटी का बहुत ज्यादा बढ़ जाना’ रहा. कंपनी ने निवेशकों को लुभाने के लिए कई बार बोनस शेयर दिए, जिससे शेयरों की संख्या तो बढ़ गई लेकिन EPS कम हो गया. 2. प्रमोटर्स की ओर से समय-समय पर की गई बड़ी बिकवाली (OFS) ने बाजार में सप्लाई बढ़ा दी, ऑनलाइन ट्रेवल सेक्टर में मेकमायट्रिप और दूसरे प्लेयर्स से भी कड़ी चुनौती मिली जिससे मार्जिन पर असर पड़ा.

अभी क्या हाल है? अच्छी बात यह है कि कंपनी अभी भी मुनाफे में है और इसका बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट है. कंपनी अब इंश्योरेंस और अन्य नए वर्टिकल्स में विस्तार कर रही है. हालांकि, रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता प्रमोटर्स की लगातार बिकवाली और शेयर की कीमत में स्थिरता की कमी है.

कंपनी का रेवेन्यू अभी भी स्थिर है, Q3 FY26 में मुनाफा 82% गिरकर ₹3.41 करोड़ रह गया है. ऑपरेटिंग मार्जिन काफी सिकुड़ गया, कंपनी होटल और हॉलिडे बुकिंग में एक्सपैंशन की कोशिश कर रही है. स्टॉक अपने पुराने हाई से बहुत दूर है और ट्रैवल सेक्टर की अनिश्चितता के कारण पुरानी चमक वापस लाना अभी काफी मुश्किल नजर आ रहा है.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

Twitter – https://x.com/SumitResearch

Insta – Mehrotra Sumit (@sumitresearch)

Youtube – https://www.youtube.com/@Sumitresearch

Facebook – https://www.facebook.com/sumitresearch/

Blog – https://sumitresearch.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *