गैस की कमी की आंच आज ऑटो शेयरों पर भी दिखने लगी है. नैचुरल गैस की कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. पश्चिम एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और गैस सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं की वजह से इस बात की आशंका बढ़ी है कि आने वाले समय में इंडस्ट्रियल सेक्टर को मिलने वाली गैस की सप्लाई में कटौती की जा सकती है. इसी आशंका के चलते ऑटो कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली और ऑटो सेक्टर की गाड़ी रिवर्स गियर में चली गई.
इस हफ्ते ऑटो इंडेक्स 6.5% टूटा
गुरुवार के कारोबार के दौरान निफ्टी ऑटो इंडेक्स में लगभग 2.6% की गिरावट दर्ज की गई और ये करीब 25,250 के स्तर के आसपास पहुंच गया. बुधवार को भी निफ्टी ऑटो इंडेक्स 3.15% गिरा था. इस हफ्ते ऑटो इंडेक्स 6.5% तक टूट चुका है और सितंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
आज इंडेक्स में शामिल लगभग सभी ऑटो कंपनियों के शेयर दबाव में रहे. महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, TVS मोटर, हीरो मोटोकॉर्प और बजाज ऑटो जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा ऑटो-कंपोनेंट से जुड़ी कंपनियों में भी कमजोरी देखी गई. भारत फोर्ज और टाटा मोटर्स जैसे शेयरों में लगभग 3% तक की गिरावट देखने को मिली. इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सेक्टर को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं.
क्यों बढ़ी गैस सप्लाई को लेकर चिंता
ब्रोकरेज फर्म Nomura के मुताबिक, भारत में नैचुरल गैस की सप्लाई पर असर पड़ने की वजह से सरकार ने नैचुरल गैस सप्लाई ऑर्डर जारी किया है. इस ऑर्डर के तहत प्रायोरिटी सेक्टर III में आने वाले मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स को नेशनल गैस ग्रिड के जरिए मिलने वाली गैस की सप्लाई को उनके पिछले 6 महीनों की औसत खपत के लगभग 80% तक सीमित किया जाएगा.
इस नई व्यवस्था से अनुमान है कि कुल मिलाकर करीब 31% गैस की बचत हो सकती है. यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि पावर और पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी, जबकि इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स के लिए सप्लाई में लगभग 20% की कटौती की जाएगी. नोमुरा ने चेतावनी दी है कि गैस सप्लाई में ये कटौती और पहले से मौजूद कमी भारत के ऑटो सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है?
ऑटो शेयरों में हाल की गिरावट की एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव है. इससे नैचुरल गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ऑटो कंपनियां अलग-अलग पार्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में काफी हद तक गैस पर निर्भर रहती हैं. ब्रोकरेज फर्म Nomura के मुताबिक, पेंट शॉप्स, फोर्जिंग और कास्टिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली भट्टियों, और मेटल पार्ट्स की हीट ट्रीटमेंट जैसी प्रक्रियाओं में गैस का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है.
अब अगर कोई चाहे कि गैस की जगह पर बिजली किसी दूसरे एनर्जी के सोर्स का इस्तेमाल करने लगे तो ये उतना आसान नही होता है, क्योंकि इसके लिए मशीनों और उत्पादन सिस्टम में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे. ऐसे में जो ऑटो कंपनियां ऊंची क्षमता पर उत्पादन कर रही हैं और जिनके पास गाड़ियों का स्टॉक सीमित है, उन्हें उत्पादन में रुकावट का ज्यादा खतरा हो सकता है. नोमुरा के मुताबिक इस स्थिति में पूरी सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है. अगर किसी एक Tier-2 या Tier-3 सप्लायर को LNG की कमी का सामना करना पड़ता है, तो पूरी प्रोडक्शन लाइन ही ठप पड़ सकती है.
किन कंपनियों पर ज्यादा असर?
नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra (M&M), Ashok Leyland, Tata Motors के कमर्शियल व्हीकल्स बिजनेस और Eicher Motors जैसी कंपनियां मार्च महीने में लगभग पूरी क्षमता के करीब प्रोडक्शन कर रही हैं, जबकि इनके पास गाड़ियों का स्टॉक सामान्य से कम है.
इसके अलावा, ऊर्जा खपत के आंकड़ों के आधार पर एनालिस्ट्स का मानना है कि Maruti Suzuki, TVS Motor और Bajaj Auto जैसी ऑटो कंपनियां और सप्लायर कंपनियों में Bharat Forge और Uno Minda गैस की कमी से ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. अगर इन्हें तय सीमा से ज्यादा गैस की जरूरत पड़ती है, तो इन्हें महंगी स्पॉट गैस खरीदनी पड़ सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टायर बनाने वाली कंपनियां, जो एनर्जी के लिए अलग तरह के कच्चे माल का इस्तेमाल करती हैं, वे गैस सप्लाई कम होने की स्थिति को कुछ हद तक स्थिति को संभाल सकती हैं.
देखने वाली बात ये है कि आज के ट्रेडिंग सेशन से पहले तक इस जोखिम का असर ज्यादातर ऑटो शेयरों में ज्यादा दिखाई नहीं दिया था, मगर Nomura ने निवेशकों को सलाह दी है कि अगले एक हफ्ते में प्रोडक्शन पर पड़ने वाले असर पर नजर रखें, खासकर अगर LNG की सप्लाई सीमित रहती है और कंपनियों को महंगी स्पॉट गैस खरीदनी पड़ती है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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