पूरी दुनिया इस वक्त 35 किलोमीटर संकरे उस समुद्री रास्ते के खुलने का इंतज़ार कर रही है, जो तकरीबन एक हफ्ते से बंद पड़ा है, नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नेवी ने इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया है, अब किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने की इजाज़त नहीं है. Enrich Investments ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें ये बताया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी दुनिया को मंदी की ओर धकेल सकता है. ईंधन की कीमतें आसमान पर पहुंच सकती हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी और केमिकल लॉजिस्टिक्स का गलियारा माना जाता है, क्योंकि यहां से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इस अचानक बंदी के फैसले से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तुरंत और बहुत गंभीर सप्लाई संकट पैदा हो सकता है. जो तेल की कीमतों में तेज उछाल और बड़े पैमाने पर आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है.
क्रूड 125 डॉलर गया तो…
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोज़ाना 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो समुद्री मार्ग से होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 25% है. इसके अलावा, ग्लोबल LNG का 15-20% भी इसी चोकपॉइंट से होकर गुजरता है. वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले मेथेनॉल का 35% और कुल समुद्री केमिकल का 14% हिस्सा भी इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है.
अब ये समझिए कि जब ये रास्ता इतना ज़रूरी है तो इसका असर कितना बड़ा होगा. सबसे पहला असर तो कच्चे तेल की कीमतों पर ही देखने को मिलेगा, ब्रेंट क्रूड जो कि 94 डॉलर के पार जा चुका हैं, और बहुत जल्द 100 डॉलर के पार भी जाने का अनुमान है. अगर कीमतें 125 डॉलर से ज्यादा हो गईं तो इकोनॉमिक पैरालिसिस का खतरा भी मंडराने लगेगा.
दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा!
Enrich Investments की रिपोर्ट कहती है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल इकोनॉमी पर बहुत गहरा असर पड़ रहा है. खासकर एशिया में जहां इंपोर्टेड कच्चे तेल पर निर्भर फैक्टरियां बंद होने की कगार पर पहुच सकती हैं, जिससे उत्पादन और निर्यात में बड़ी गिरावट आएगी. उन एयरलाइंस के लिए दिवालियापन का खतरा बढ़ गया है जो ईंधन की लागत को 85 डॉलर प्रति बैरल पर हेज कर चुकी हैं, क्योंकि तेल की कीमतें अब तेजी से बढ़ रही हैं और उनकी लागत भी उतनी तेजी के साथ बढ़ रही हैं.
यूरोप, जो अब भी LNG पर काफी हद तक निर्भर है, कमी की वजह से बहुत मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा है. जिससे ऊर्जा संकट और गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है. कुल मिलाकर ग्लोबल कंज्यूमर को ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल का सामना करना पड़ रहा है, जो महंगाई, ट्रांसपोर्टेशन लागत और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को प्रभावित कर रहा है, इससे पूरी दुनिया में आर्थिक अस्थिरता और मंदी का खतरा मंडरा रहा है.

यूरोप-एशिया पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ट्रेड पूरी तरह रुक जाने या सस्पेंड होने की वजह से दुनिया की एनर्जी सप्लाई में बहुत बड़ी मात्रा में ईंधन की कमी हो गई है. इससे ग्लोबल मार्केट में कमी आ गई है. अब क्योंकि जहाज नहीं जा पा रहे हैं और सुरक्षा कारणों से कतर ने अपना रास लफ्फान प्लांट बंद कर दिया है, तो कतर का LNG पूरी तरह रुक गया है. इससे दुनिया भर में खासकर एशिया और यूरोप में गैस की भारी कमी हो गई है, कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं, और ऊर्जा संकट जैसी स्थिति बन रही है.
जब कतरी कार्गो गायब हो जाते हैं, तो इसका असर उसके सीधे खरीदारों से कहीं अधिक फैल जाता है. यूरोपीय और एशियाई बाजार सीमित स्पॉट शिपमेंट्स के लिए एक तीखी प्रतिस्पर्धा में पड़ जाते हैं, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. एशिया खासतौर पर प्रभावित होता है क्योंकि कतर के ज्यादातर LNG एक्सपोर्ट वहीं होते हैं. इसका असर एनर्जी वैल्यू चेन पर पड़ता है, जिससे प्राइमरी फ्यूल से बने सभी डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स और डेरिवेटिव्स महंगे हो जाते हैं.

भारत पर असर
भारत इस होर्मुज संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है. हमारी एनर्जी सिक्योरिटी करीब करीब पूरी तरह से इस पर्शियन गल्फ पर टिकी हुई है.भारत का 80-85% कच्चा तेल और काफी बड़ी मात्रा में LNG इंपोर्ट इसी क्षेत्र से आता है, और ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर ही गुजरते हैं. अगर ये रास्ता बंद हो जाता है, तो भारत के पास कोई वैकल्पिक बड़ा रूट नहीं बचता, जिससे तुरंत तेल-गैस की कमी को पूरा किया जा सके.
इस वजह से घरेलू उद्योग, बिजली उत्पादन, ट्रांसपोर्ट और रिफाइनरीज़ सीधे प्रभावित होंगे. पेट्रोल-डीजल-गैस की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी और इंडस्ट्री में प्रोडक्शन रुकने या धीमा होने का खतरा रहेगा. अन्य बड़े देशों जैसे अमेरिका, यूरोप या चीन के पास ज्यादा डाइवर्सिफाइड सोर्स और स्ट्रैटेजिक रिजर्व हैं, लेकिन भारत की निर्भरता इतनी ज्यादा है कि अगर ये लंबे समय तक बंद रहा तो हमारी अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दे सकती है.

निवेशकों को कहां नज़र रखना चाहिए
भारत पर मैक्रो प्रभाव
- पहला प्रभाव: कच्चा तेल $100 से ऊपर जाने पर बाहरी क्षेत्र में झटका लगेगा, CAD बढ़ेगा और रुपया तेजी से कमजोर होगा
- दूसरा स्तर: महंगाई फैलेगी (ईंधन पर सीधे + लॉजिस्टिक्स/खाने की इनडायरेक्ट), फिस्कल दबाव (फर्टिलाइज़र सब्सिडी बढ़ेगी, एक्साइज ड्यूटी पर दुविधा), और आर्थिक ग्रोथ में सुस्ती आएगी.
- तीसरा स्तर: बॉन्ड मार्केट पर असर (यील्ड्स बढ़ेंगी, RBI ईजी मॉनेटरी पॉलिसी को टाल सकता है), RBI की प्रतिक्रिया (फॉरेक्स दखल, लिक्विडिटी मैनेजमेंट) और बैंकिंग सिस्टम में तनाव
- बाहरी स्तर: पिछले संकटों से तुलना – 2008 में तेल कीमतों में तेजी, 2013 का टेपर टैंट्रम, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध. होर्मुज का बंद होना इन तीनों संकटों के प्रभावों को एक साथ ला सकता है

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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