एक शेयरहोल्डर जिसे RRP Semiconductor ने बना दिया अरबपति! आधी हकीकत, आधा फसाना

Rajendra Chodankar becomes billionaire after RRP Semiconductor stock rally in India

किसी कंपनी में निवेश करने से पहले क्या देखना चाहिए? कंपनी का बिजनेस क्या है, कंपनी उस बिजनेस से मुनाफा कमा रही है या नहीं, उस बिजनेस में ग्रोथ की उम्मीद कितनी है, उस कंपनी का मैनेजमेंट कैसा है. यही कुछ पैरामीटर्स होते हैं जिन पर हम कंपनियों को कसते हैं, अगर सबकुछ सही रहा तो ये कंपनी लंबी अवधि में अच्छा पैसा बनाकर देगी. लेकिन कुछ कंपनियां इन सभी पैरामीटर्स पर फेल होती हैं, फिर भी इस रफ्तार से अपने निवेशकों को पैसा बनाकर देती हैं कि खुद शेयर बाजार भी हैरान हो जाता है. इनमें से एक नाम है RRP सेमीकंडक्टर का. इस कंपनी ने इन सभी पैरामीटर्स को मुंह चिढ़ाते हुए बीते 18 महीने में 66,500 परसेंट से ज्यादा का रिटर्न दिया है. इस पर मैं पहले भी एक ब्लॉग लिख चुका हूं, लेकिन एक बार फिर इस पर लिखने के लिए मजबूर हुआ क्योंकि मेरी नजर में कुछ हैरान करने वाली जानकारियां सामने आईं, तो सोचा आपके साथ शेयर करूं.

राजेंद्र चोडणकर ने बनाए 9,000 करोड़ रुपये

राजेंद्र कमलकांत चोडणकर, क्या आपने कभी इनका नाम सुना है. अगर सुना है तो इसका मतलब ये है कि आप कंपनी को काफी गहराई से फॉलो करते आए हैं. इन भाई साहब की वेल्थ 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है, जी देखते ही देखते ये कब देश के अरबपतियों की फेहरिस्त में आ गए आपको पता चला! क्योंकि इनके पास RRP सेमीकंडक्टर की 73.96% हिस्सेदारी है, यानी कंपनी के 1 करोड़ से भी ज्यादा शेयर इनके पास हैं. इससे ज्यादा मजे की बात ये है कि इनका नाम प्रमोटर कैटेगरी में नहीं है, बल्कि रिटेल कैटेगरी की लिस्ट में आता है. जबकि प्रमोटर्स के पास 1,74,500 शेयर ही हैं, जो कि कुल कंपनी का 1.27% हिस्सा है.

जब मैंने 17 अक्टूबर को इस कंपनी के बारे में लिखा थो इसका भाव 9,110 रुपये पर था, अब ये 10,887 रुपये पर आ चुका है और इसकी मार्केट कैप 14,832 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है और रिटर्न की इस ऊंची इमारत की बुनियाद सिर्फ अफवाहों पर खड़ी हुई है. जिसका जिक्र मैंने अपने पिछले आर्टिकल में किया था.

आधा बताया, ज्यादा छुपाया

इनमें से एक दावा ये था कि दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने इस कंपनी में निवेश किया था और दूसरा ये कि महाराष्ट्र सरकार ने इसे सौ एकड़ ज़मीन आवंटित की थी. कंपनी ने खुद इन दावों को झूठा बताया था. कंपनी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि तेंदुलकर का RRP Semiconductor से कोई संबंध नहीं है और न ही उसे जमीन का कोई आवंटन मिला है. आपको लगेगा कि कंपनी ने तो अपनी जिम्मेदारी निभाई है और जो सच है वो बता दिया, जो कि सराहनीय है, लेकिन रुकिए कंपनी की ये सफाई आधी हकीकत, आधा फसाना लगती है. कंपनी ने कुछ बातें थी जो नहीं बताईं, जो उन्हें जरूर से बतानी चाहिए थीं.

  • RRP Semiconductor कंपनी जो कभी एक ट्रेडिंग फर्म थी, उसने ये नहीं बताया कि उसकी एक दूसरी अनलिस्टेड कंपनी RRP Electronics को सितंबर में महाराष्ट्र सरकार से जमीन के लिए “लेटर ऑफ कम्फर्ट” मिला था. ये जमीन कथित तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका से नवी मुंबई में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट ट्रांसफर करने के लिए थी. इस बारे में न तो RRP Semiconductor ने खुलासा किया और न ही इसकी सिस्टर कंपनी RRP Electronics ने कुछ बताया. इसके अलावा इन्होंने इस बात का भी खुलासा नहीं किया कि अनलिस्टेड कंपनी सचिन तेंदुलकर को स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर के तौर पर लेकर आई है. अब ये क्यों नहीं बताईं, क्योंकि शेयर बाजार में जो चीज नहीं बताई जाती है, उसकी वैल्यू ज्यादा है, उसका ही प्रीमियम है. वो कहते हैं न कि बंद मुट्ठी लाख की, खुल गई तो खाक की. जब कंपनी को इस अफवाह से फायदा हो रहा था और कंपनी के शेयर आसमान छू रहे थो कंपनी को अफवाहों से क्या दिक्कत हो सकती है, लेकिन नियमों के तहत उन्हें ये सफाई देनी पड़ी.
  • इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला खुलासा ये कि लिस्टेड कंपनी (RRP Semiconductor) ने 2024 में प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए 16 करोड़ रुपये जुटाए, ताकि एक आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (OSAT) फैसलिटी को स्थापित किया जा सके, उसके उपकरण खरीदे जा सके और दूसरे कैपेक्स में इस्तेमाल हो सके.लेकिन कंपनी ने इसका कुछ हिस्सा RRP Electronics को भी दिया. शॉर्ट में ये समझिए कि लिस्टेड कंपनी RRP Semiconductor अपनी अनलिस्टेड सहयोगी कंपनी RRP Electronics को वित्तीय मदद पहुंचा रही है, वो भी पब्लिक से उठाए गए पैसों से.

राजेंद्र चोडणकर की एंट्री

The Ken की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में अभी “सेमीकंडक्टर” यानी चिप बनाने को लेकर बहुत जोश है. सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये का फंड रखा है ताकि भारत “आत्मनिर्भर” बन सके यानी अपनी चिप्स खुद बना सके. लेकिन हो क्या रहा है- ज्यादातर स्टार्टअप्स और कंपनियां सिर्फ वादे कर रही हैं कि वो चिप बनाएंगी, जबकि असल में उनके पास न तो अनुभव है, न फैक्ट्री, न टेक्निकल स्किल. फिर भी उन्हें ऐसे बताया जा रहा है जैसे उन्होंने पहले ही चिप बना ली हो. RRP Semiconductor और सिस्टर कंपनी दोनों के नाम बहुत “प्रभावशाली” हैं, लेकिन इनके पास असल में सेमीकंडक्टर या इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने का ज्यादा अनुभव नहीं है. दोनों ही एक दूसरे पर बैठकर सवारी कर रहे हैं और राजनीतिक उत्साह का फायदा उठा रहे हैं. रिपोर्ट में लिखा है कि दोनों कंपनियां एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं, क्योंकि इन लिस्टेड कंपनियों में सबसे बड़े शेयरहोल्डर हैं राजेंद्र चोडणकर और अनलिस्टेड कंपनी को भी वो प्रमोट करते हैं. वो दोनों कंपनियों को साथ में चलाते हैं और शायद दोनों को के रिवर्स मर्जर की भी प्लानिंग कर रहे हैं.

RRP Semiconductor कोई नई कंपनी नहीं है, इसकी शुरुआत 1980 में जीडी ट्रेडिंग एंड एजेंसीज के रूप में हुई थी, जो कि एक दम तोड़ चुका बिजनेस थ और कई साल पहले स्टॉक एक्सचेंज से निलंबित कर दिया गया था. दो चरणों के टेकओवर से एक सेमीकंडक्टर फर्म के रूप में इसको दोबारा जीवन मिला.

नवंबर 2023 में, इरा मिश्रा नाम की एक महिला ने इस कंपनी के पूर्व प्रमोटर सोमानी परिवार से जीडी ट्रेडिंग के लगभग 75% शेयर 12 प्रति शेयर पर खरीदे थे. 6 महीने के बाद राजेंद्र चोडणकर इस कंपनी से जुड़ जाते हैं और वही ग्रुप का मार्गदर्शन भी करने लगते हैं. अप्रैल-मई 2024 के बीच, उन्होंने और कुछ अन्य लोगों ने प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए कंपनी में 16 करोड़ रुपये डाले उसी 12 रुपये प्रति शेयर के भाव पर.
इस लेन-देन से चोडणकर को कंपनी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मिल गया, अन्य निवेशकों को लगभग 24%, और कुल नियंत्रण 99% के करीब पहुंच गया.

अब बारी थी कंपनी का नाम बदलने की , इसलिए जीडी ट्रेडिंग से इसको RRP Semiconductor कर दिया गया, बस फिर क्या था. एक्सचेंज पर जो शेयर मुर्दा पड़ा था, नाम में सिर्फ ‘सेमीकंडक्टर’ जुड़ जाने से इसने संजीवनी का काम किया. शेयर ने दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की की. दिलचस्प बात यह है कि मिश्रा परिवार, जो अब कंपनी का केवल 1.2% हिस्सा रखता है, अब भी उसका नाम प्रमोटर की कैटेगरी में आता है. इरा के पिता रमेश चंद्र मिश्रा बोर्ड में बैठे हैं. जबकि चोडणकर जो इक्विटी का तीन-चौथाई हिस्सा रखते हैं, केवल गैर-प्रोमोटर शेयरधारक के रूप में लिस्ट हैं. उन्हें बाकी शेयरों के लिए ओपन ऑफर करना था, लेकिन सेबी से मंजूरी एक साल से अटकी हुई है.

इधर, RRP इलेक्ट्रॉनिक्स ने योजनाएं तो बड़ी बड़ी घोषित कीं. जैसे – OSAT प्लांट के लिए ₹12,000 करोड़ और एक फैब्रिकेशन सुविधा के लिए अतिरिक्त ₹24,000 करोड़ रुपये का ऐलान किया गया. मगर कुछ ताइवानी और स्विस चिप डिज़ाइनरों के लिए पायलट रन शुरू करने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं हुआ. जिस OSAT साइट की बात की गई वो नई की बजाय ऐसा लगता है कि पुरानी जगह को ही बस ठीक-ठाक किया है
पूर्ण-स्तरीय उत्पादन अभी शुरू नहीं हुआ है, और कंपनी ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन से कोई पैसा भी नहीं मिला है. मतलब मामला उतना सजीला नहीं, जितना दिखाया जा रहा है.

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