पूरी दुनिया में डेटा सेंटर्स (Data Centres) की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और क्योंकि डेटा ही अब नया गोल्ड है. भारत उन देशों की कतार में खड़ा होने जा रहा है जो दुनिया की इस डिमांड को पूरा कर सकता है. हालांकि अभी भारत दुनिया का करीब 20% डेटा पैदा करता है, लेकिन उसके पास ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता का सिर्फ 5.5% हिस्सा है. यही गैप आने वाले कुछ सालों में बड़े निवेश और तेज़ विस्तार की वजह बन रहा है.
2030 तक डेटा सेंटर की क्षमता 5 GW
JM फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में को-लोकेशन डेटा सेंटर की कुल क्षमता 2024 में लगभग 1.35 गीगावॉट (GW) तक पहुंच चुकी है, जो एक साल में करीब 38% की बढ़त दिखाती है. इसके बावजूद भारत की डेटा सेंटर डेंसिटी यानी प्रति मेगावॉट डेटा संभालने की क्षमता अभी कम है, सच कहें तो भारत दुनिया के उन देशों की लिस्ट में है जो काफी पीछे हैं. इस गैप को पाटने के लिए अनुमान है कि भारत को 2030 तक कम से कम 5 GW क्षमता की जरूरत होगी.
डेटा सेंटर की मांग बढ़ने की सबसे बड़ी वजह डिजिटल डेटा का विस्फोट है. आजकल सब कुछ और सब जगह सिर्फ डेटा है. मोबाइल इंटरनेट, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन पेमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से डेटा खपत लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मोबाइल डेटा इस्तेमाल 2030 तक करीब 15% की सालाना दर से बढ़ सकता है, जिससे डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव और बढ़ेगा.
सरकार की डेटा लोकलाइजेशन नीति भी एक बड़ा कारण है. इसके तहत कई तरह का संवेदनशील डेटा भारत के भीतर ही स्टोर करना जरूरी हो गया है. इससे विदेशी और घरेलू कंपनियों को भारत में ही डेटा सेंटर लगाने या किराए पर लेने की मजबूरी और जरूरत दोनों बढ़ी हैं.
5 साल में होगा बड़ा निवेश
डेटा सेंटर का बिज़नेस मॉडल भी इसे आकर्षक बनाता है. एक मेगावॉट डेटा सेंटर लगाने में औसतन करीब 46.5 करोड़ रुपये का खर्च आता है. इसके बदले सालाना किराया लगभग 10–11 करोड़ रुपये प्रति मेगावॉट तक मिल सकता है. लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट, ऊंचा ऑक्युपेंसी लेवल और बिजली लागत का पास-थ्रू मॉडल इस सेक्टर को स्थिर कैश फ्लो और 40–50% तक EBITDA मार्जिन देता है.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि आने वाले 5 वर्षों में भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 20 बिलियन डॉलर का निवेश सिर्फ इमारत और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा. इसके अलावा सर्वर, चिप्स और क्लाउड हार्डवेयर पर करीब 60 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त निवेश हो सकता है. कुल मिलाकर यह सेक्टर 2030 तक करीब 100 बिलियन डॉलर के एंटरप्राइज वैल्यू का बन सकता है.
एक और अहम पहलू यह है कि भारत सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा. कम लागत, बेहतर भौगोलिक स्थिति और बढ़ती सब-सी केबल कनेक्टिविटी की वजह से भारत भविष्य में रीजनल और ग्लोबल डेटा हब के रूप में उभर सकता है. AI और नए मॉडल जैसे DeepSeek, जो कम पावर में काम कर सकते हैं, भारत के मौजूदा डेटा सेंटर को भी AI-रेडी बना रहे हैं.
डेटा सेंटर के ईकोसिस्टम के असली खिलाड़ी
लेकिन यह कहानी सिर्फ डेटा सेंटर की इमारतों या सर्वर तक सीमित नहीं है. असल में यह एक पूरी वैल्यू चेन की कहानी है, जिसमें कई लिस्टेड भारतीय कंपनियां अलग-अलग स्तर पर अहम भूमिका निभा रही हैं. डेटा सेंटर को चलाने के लिए सबसे बुनियादी ज़रूरत होती है बिजली और कनेक्टिविटी, पावर सप्लाई और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिकल और एनर्जी एफिशिएंसी और कूलिंग इंफ्रा की. तो जाहिर है इस इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियां भी बेहद जरूरी हो जाती हैं. जैसे-जैसे भारत में क्लाउड और AI वर्कलोड बढ़ेगा, इन कंपनियों की भूमिका और मज़बूत होती जाएगी. रिपोर्ट में कई कंपनियों की एक लिस्ट दी गई है. यहां पर हम कुछ लिस्टेड कंपनियों का जिक्र कर रहे हैं और उनकी भूमिका के बारे में भी बता रहे हैं.
| कंपनी | डेटा सेंटर वैल्यू चेन में रोल |
| Bharti Airtel | डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में विस्तार कर रही है, सब्सिडियरी Nxtra Data के जरिए इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करती है. डेटा सेंटर स्पेस, रियल एस्टेट, पावर सप्लाई और कूलिंग सिस्टम्स देती है |
| Power Grid | पावर सप्लाई सिस्टम्स और बैकबोन ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो डेटा सेंटर्स के लिए बेहद जरूरी है |
| Siemens | पावर सप्लाई सिस्टम्स, क्लाइमेट कंट्रोल और ऑटोमेशन में योगदान देती है, डेटा सेंटर्स के भीतर ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिफिकेशन सॉल्यूशंस मुहैया कराती है |
| Adani Green Energy | बड़े पैमाने पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स विकसित करती है, डेटा सेंटर्स के लिए ग्रीन पावर सप्लाई सिस्टम्स और रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज मुहैया कराती है |
| ABB India | डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है. जो पावर सप्लाई सिस्टम्स, फ्लोर इलेक्ट्रिकल पैनल्स, ऑटोमेशन और क्लाइमेट कंट्रोल को प्रभावित करती है |
| CG Power | पावर सप्लाई सिस्टम्स और इलेक्ट्रिकल पैनल्स का सपोर्ट करती है, जो डेटा सेंटर्स के लिए जरूरी हैं |
| Tata Communications | नेटवर्क, क्लाउड और सिक्योरिटी सर्विसेज देती है, जिसमें डेटा सेंटर होस्टिंग शामिल है. इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के रूप में डेटा सेंटर स्पेस, सिक्योरिटी और फुल-स्टैक सॉल्यूशंस मुहैया कराती है |
| Blue Star | क्लाइमेट कंट्रोल और कूलिंग सिस्टम्स मुहैया कराती है, जो डेटा सेंटर्स के लिए जरूरी है |
| APL Apollo Tubes | रैक्स, एनक्लोजर्स और स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स में योगदान देती है, जो डेटा सेंटर्स के निर्माण के लिए इस्तेमाल होते हैं |
| GE Vernova T&D India | पावर डिलीवरी सुनिश्चित करती है, पावर सप्लाई सिस्टम्स और इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिशन इक्विपमेंट का सपोर्ट डेटा सेंटर्स के लिए करती है |
| KEI Industries | पावर ट्रांसमिशन और नेटवर्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केबलिंग सॉल्यूशंस मुहैया कराती है |
| Apar Industries | केबलिंग, पावर सिस्टम्स और कूलिंग फ्लुइड्स का सपोर्ट करती है, जो ट्रांसफॉर्मर्स और डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होते हैं |
| Amara Raja Energy | एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस मुहैया कराती है, जिसमें डेटा सेंटर्स के लिए बैकअप एनर्जी स्टोरेज शामिल है |
| Redington | सर्वर, स्टोरेज और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों में डील करती है, डेटा सेंटर इकोसिस्टम के भीतर सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में काम करती है |
| Anant Raj Ltd | डेटा सेंटर के लिए स्पेस और रियल एस्टेट मुहैया कराती है. साथ ही डेटा सेंटर निर्माण (बिल्ड-आउट) के लिए EPC सर्विसेज भी देती है |
| Triveni Turbine | डेटा सेंटर्स के लिए बैकअप और कैप्टिव पावर सॉल्यूशंस ऑफर करती है. |
| Schneider Electric | पावर सप्लाई सिस्टम्स, पर्यावरण नियंत्रण और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट को सपोर्ट करती है. |
| Jupiter Wagons | डेटा सेंटर्स के लिए स्पेशलाइज्ड कंटेनर्स और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) बनाती है. |
| Techno Electric | डेटा सेंटर इंडस्ट्री में EPC सर्विसेज और पावर सिस्टम्स इंटीग्रेशन में योगदान देती है. |
| Railtel Corp | इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के रूप में डेटा सेंटर स्पेस और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करती है. |
| Netweb Technologies | डेटा सेंटर ईकोसिस्टम में सिस्टम इंटीग्रेटर और फुल-स्टैक प्रोवाइडर के रूप में काम करती है. |
कहने का मतलब ये है कि डेटा सेंटर की ग्रोथ सिर्फ एक सेक्टर की कहानी नहीं है, ये टेलीकॉम, पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, केबल्स और IT हार्डवेयर सबको साथ लेकर चलने वाली मेगा-थीम है. यही वजह है कि डेटा सेंटर बूम को समझते समय सिर्फ डेटा सेंटर ऑपरेटर नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन पर नज़र रखना निवेश और रणनीति दोनों के लिहाज से बेहद जरूरी हो जाता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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