एक खबर और बाज़ार का एक महीने का दुख पल भर में खुशियों में तब्दील हो गया. मैंने अपने पिछले आर्टिकल में बताया था कि एक महीने में BSE की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप से कैसे 22 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए, वो महीना था जनवरी 2026 का, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि मार्केट कैप में एक महीने की ये गिरावट महज कुछ मिनटों में ही रिकवर हो गई.
कुछ मिनटों में 1 महीने का हिसाब बराबर
बात कर रहा हूं भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील की, जिसका ऐलान कल 2 फरवरी, 2026 की रात को हुआ. ये तय हो गया है कि इस खबर के दम पर भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को धमाकेदार तेजी के साथ खुलेंगे. हुआ भी यही, बाजार खुलते ही BSE की लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप में महज कुछ मिनटों में ही 20 लाख करोड़ रुपये जुड़ गए और मार्केट कैप 474 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, हालांकि कुछ देर बाद बाजार की मूवमेंट के साथ ये आंकड़ा बदल गया. लेकिन इसने ये जरूर दर्शा दिया कि निवेशकों का भरोसा एक बार फिर भारतीय बाजार में लौट आया है.
बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 2,000 अंकों से ज्यादा का उछाल आया, इसने इंट्राडे में 85,871.73 का हाई बनाया. ये 2,200-2,400 अंकों की रेंज में ट्रेड करता हुआ नजर आ रहा है. निफ्टी भी फिलहाल पौने तीन परसेंट की मजबूती के साथ 25,800 के ऊपर टिकने की कोशिश में है. इसने इंट्राडे में 26,341.20 का हाई छुआ है. अदाणी एंटरप्राइजेज, Jio Fin, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, इंडिगो सबसे ज्यादा तेजी दिखाई. HDFC बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक, जैसे दिग्गजों ने बाजार को सपोर्ट किया.
इसके पहले जनवरी में ट्रेड टैरिफ, FIIs की बेरुखी और रुपये की पतली होती हालत ने बाजार को जर्जर कर दिया था, यही वजह रही कि 31 दिसंबर को BSE की लिस्टेड कंपनियों की जो मार्केट कैप 476 लाख करोड़ रुपये थी, जनवरी 2026 के खत्म होने के बाद 455 लाख करोड़ रुपये रह गई. यानी एक महीने में 21.88 लाख करोड़ रुपये गायब हो गए. मगर, BSE लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में आई इस गिरावट को सिर्फ कुछ मिनटों में ही कवर कर लिया.
क्यों आई बाजार में जोरदार तेजी?
इस जोरदार वापसी की इकलौती वजह है, भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है. अब इसका असर ये होगा कि भारत की जिन कंपनियों का रेवेन्यू एक्सपोजर अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका में है, उनके लिए बड़ी राहत है. अभी यही कंपनियां अपने उत्पादों के लिए अमेरिका से अलग नए बाजारों की तलाश करने में जुटी थीं, इससे उनके मार्जिन पर भी असर पड़ना तय था, लेकिन इस डील के बाद उनके लिए मुश्किलों के बाद छंट जाएंगे.
इस डील के बाद भारतीय उत्पादनों को अमेरिका बाजार में एक प्रतिस्पर्धा मिलेगी, जिसमें भारत का पलड़ा थोड़ा भारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि जितने भी इमर्जिंग मार्केट्स हैं, उनमें भारत पर टैरिफ सबसे कम हो गया है, जो कि डील से पहले तक सबसे ज्यादा हुआ करता था. यानी बांग्लादेश, श्रीलंका, ताइवान, चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस- इन सभी पर भारत के मुकाबले ज्यादा टैरिफ है.

रुपये में मजबूती
एशिया की सबसे खराब करेंसीज में शुमार भारतीय रुपया भी आज डॉलर के मुकाबले थोड़ा दहाड़ रहा है. रुपया मंगलवार को 1.3% मजबूत होकर 90.22 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. जो कि मिड-दिसंबर 2018 के बाद एक दिन में आई सबसे बड़ी बढ़त है. सोमवार को रुपया 91.5363 पर बंद हुआ था. यानी पिछले ट्रेडिंग सेशन से रुपये में करीब 1.31 रुपये की मजबूती दिखाई दी है.
भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते ने निवेशकों में उत्साह जगाया है और विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा दिया है, जिसका फायदा रुपये को मिला है. साल 2025 में रुपया 5% टूटा था, इसमें से अकेले 2% की गिरावट जनवरी में ही आई थी. सीमित विदेशी इनफ्लो और डॉलर डिमांड बढ़ने की वजह से रुपये पर बीते कुछ हफ्तों से जबरदस्त दबाव देखने को मिला है.
पिछला आर्टिकल पढ़ें- 22 लाख करोड़ की कमाई, 1 महीने में गंवाई! आखिर बाज़ार में हुआ क्या?
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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