ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने भारतीय बाज़ारों पर दबाव बढ़ा दिया है. पिछले दो हफ्तों से बाजार गिरावट झेल रहे हैं, अब बड़ा सवाल ये है, क्या बाजार का बॉटम बन चुका है, या अगर युद्ध लंबा चला तो गिरावट अभी बाकी है? इसे लेकर भी बहस है.
इस पर Kotak NDPMS का एक छोटा सा नोट है, जिसमें ग्लोबल जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स कॉल के बाद कुछ मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया गया है. Kotak NDPMS के इस नोट का टॉपिक है – Are we in for a long drawn middle east conflict? यानी मिडिल ईस्ट का संकट एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है, क्या हम एक लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जो ग्लोबल इकोनॉमी और फाइनेंशियल मार्केट्स को पूरी तरह से नया आकार दे सकता है?
इस नोट के पहले हिस्से में इस संघर्ष के वैश्विक असर और खासकर अमेरिका के लिए इसके मायने समझाए गए थे, अब दूसरे हिस्से में देखते हैं कि इस जंग का भारत की अर्थव्यवस्था, रुपया और शेयर बाजार पर क्या असर पड़ सकता है.
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत के लिए इस जंग का मतलब है कि वो एक कूटनीतिक तलवार पर चल रहा है, खुद को साधते हुए बहुत सावधानी के साथ. ईरान, इज़रायल और खाड़ी देशों से अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश है, इससे अभी ऊर्जा जोखिम को कुछ हद तक संभाला जा सकता है, क्योंकि भारत मिडिल ईस्ट से तेल इंपोर्ट करता है और इन देशों के साथ बैलेंस रखता है. लेकिन संघर्ष लंबा खिंचता है, तो असली मुश्किल शुरू हो जाएगी. और वो क्या होगी इसको समझिए
हर $10/बैरल तेल की कीमत बढ़ने पर-
- CAD (चालू खाता घाटा) $12–15 अरब बढ़ जाता है (~0.4–0.5% GDP)
- GDP ग्रोथ 30–40 bps (0.3–0.4%) कम हो सकती है
- महंगाई (CPI) ~50 bps (0.5%) बढ़ जाती है
- रुपया पर दबाव: तेल 10%+ एक महीने में बढ़े तो रुपया करीब 1.4% कमजोर होता है; लंबे समय तक अगर कच्चा तेल महंगा रहा तो रुपया भी लगातार दबाव में रहेगा.
बाज़ार पर Kotak का नज़रिया
शेयर बाजार ने अब तक कुछ हद तक इस स्थिति पर रिएक्ट कर लिया है. हाल की गिरावट से पता चलता है कि निवेशकों ने ऊंची तेल की कीमतों और जियो पॉलिटिकल अनिश्चितता के जोखिम को काफी हद तक पहले से ही कीमत में शामिल कर लिया है, लेकिन अभी भी कई बड़े खतरे बाकी हैं, जो आगे चलकर बाजार पर और असर डाल सकते हैं.
Kotak NDPMS नोट में एक्सपर्ट कॉल के बाद भारतीय बाज़ारों के लिए नज़रिया दिया है.
जो जोखिम बाजार पहले ही प्राइस-इन कर चुका है
- पिछले हफ्ते शेयर बाजार में 4-5% की गिरावट आ गई थी.
- ये गिरावट इसलिए आई क्योंकि भारत अपना ज्यादातर तेल इंपोर्ट करता है
- तेल महंगा होने से कंपनियों की कमाई और वैल्यूएशन पर असर पड़ता है.
जो जोखिम अभी बाकी हैं
- अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो सरकार ऊर्जा राशनिंग शुरू कर सकती है. यानी एनर्जी का बंटवारा नियंत्रित तरीके से होगा
- ऊर्जा राशनिंग शुरू हुई तो प्रमुख उद्योगों में उत्पादन कटौती देखने को मिल सकती है
- उत्पादन कटौती हुई तो FY27 में कमाई में बड़ी कटौती और डाउनग्रेड का जोखिम होगा
- बाजार को अर्निंग्स कटौती को भी कीमतों में शामिल करना होगा, इससे और ज्यादा गिरावट होगी
अगर क्रूड $80+ पर टिक गया तो क्या होगा?
- इकोनॉमी पर असर पड़ेगा, GDP के अनुमानों में कटौती होगी
- CAD और रिटेल महंगाई (CPI) के अनुमान ऊपर की बढ़ेंगे
- ज्यादा महंगाई से बॉन्ड यील्ड बढ़ेंगी, इक्विटी वैल्यूएशन और सिकुड़ जाएगी
- कमजोर रुपया RBI के लिक्विडिटी मैनेजमेंट को मुश्किल बनाएगा, जिसका असर बैंकिंग सेक्टर पर होगा
बाज़ार के लिए अहम लेवल क्या हैं
भारतीय मार्केट को ट्रैक करने वाले निवेशकों के लिए टेक्निकल स्तर बहुत ज़रूरी रेफरेंस पॉइंट होते हैं. ये स्तर बताते हैं कि बाजार का सपोर्ट कहां है या कहां रेजिस्टेंस है. हाल की गिरावट में निफ्टी50 ने कई प्रमुख सपोर्ट लेवल तोड़े हैं, और अब निवेशक इन स्तरों पर नजर रखकर फैसला ले सकते हैं कि बाजार में और गिरावट आएगी या रिकवरी शुरू होगी.
अब जंग का बाज़ार पर असर दिख ही रहा है, भारतीय बाज़ार लगातार गिर रहे हैं, कोई कह रहा है बाज़ार का बॉटम बन चुका है, तो किसी का नज़रिया है कि अभी बॉटम बनना बाकी है. Kotak NDPMS के नोट में निफ्टी50 के लेवल बताए हैं.
निफ्टी 50 के महत्वपूर्ण स्तरों पर नज़र
- मजबूत सपोर्ट जोन: 22,700–22,800
- अगर ये टूट गया: तो 21,743 (अप्रैल 2025 के निचले स्तर फिर से गेम में आ सकते हैं)
एनालिस्ट्स का मानना है कि 22,700–22,800 की रेंज मैक्रो, टेक्निकल और फंडामेंटल वजहों से मजबूत सपोर्ट हो सकती है। लेकिन अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
सामान्य निवेशक के लिए बॉटम लाइन
- भारत के अच्छे कूटनीतिक रिश्तों से अभी तेल का जोखिम कुछ हद तक कंट्रोल में है.
- लेकिन अगर संघर्ष लंबा चला तो कमाई में कटौती होगी, महंगाई बढ़ेगी, रुपया कमजोर होगा और बाजार में गिरावट आएगी.
- क्रूड की कीमतें और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की खबरों पर नजर रखें.
- निफ्टी का मुख्य सपोर्ट: 22,700–22,800 है. ये आपकी लाइन इन द सैंड है यानी यहां से नीचे जाना बड़ा सिग्नल होगा.
बीते 11 दिनों से भारतीय बाज़ारों ने FIIs की ज़बरदस्त बिकवाली देखी है, कैश में 67,886 करोड़ रुपये की भारी भरकम बिकवाली की है. अकेले शु्क्रवार को ही कैश और फ्यूचर्स में FIIs ने 16,875 करोड़ रुपये की बिकवाली है. यानी विदेशी निवेशक फिलहाल जोखिम कम कर रहे हैं और बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. अब ये सिलिसिला तभी थमेगा, जब ये युद्ध थमेगा. जिसके ठोस संकेत अभी तक तो नहीं मिले हैं.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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