Qatar LNG Crisis: गैस इकोसिस्टम में हलचल, कौन सी कंपनियां फायदे में, किसे होगा नुकसान

Qatar LNG Crisis: Shockwaves Across the Gas Ecosystem

दुनिया की सबसे बड़ी LNG एक्सपोर्टर QatarEnergy ने अपनी नॉर्थ फील्ड फैसिलिटीज पर हुए हमलों के बाद से उत्पादन को रोक दिया है. कतर की मुख्य रूप से दो फैसिलिटीज हैं, रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी. इन्हीं दोनों पर ड्रोन से हमले हुए हैं. कतर के LNG उत्पादन रोकने का असर दुनिया के कई हिस्सों पर होगा, इसमें भारत भी शामिल है. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा LNG इंपोर्टर है.

LNG में कटौती से भारत पर क्या असर होगा?

भारत अपनी जरूरत का तकरीबन 40-50% LNG इंपोर्ट कतर से ही करता है. भारत का LNG इंपोर्ट सालाना औसतन 27 मिलियन टन रहा है, इसमें से आधा तो कतर से आता है, इसलिए साफ तौर पर भारत अब गैस संकट की ओर बढ़ रहा है. LNG गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में फीडस्टॉक, फर्टिलाइजर प्रोडक्शन, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, एल्युमिनियम, सिरेमिक्स और ग्लास जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल है. शॉर्टेज से फर्टिलाइजर उत्पादन सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जिससे खाद की कीमतें बढ़ेंगी और कृषि उत्पादन पर असर पड़ेगा. पावर प्लांट्स में गैस की कमी से बिजली उत्पादन घटेगा, जबकि स्टील और केमिकल्स इंडस्ट्रीज को वैकल्पिक कोयला या तेल पर स्विच करना पड़ेगा, जिससे लागत 20-30% बढ़ जाएगी.

LNG में कटौती से किन शेयरों पर असर पड़ेगा?

LNG सप्लाई में कटौती से उन कंपनियों पर भी असर पड़ेगा जो कतर से LNG इंपोर्ट पर निर्भर हैं. इसमें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनिया हैं, रिफाइनिंग या ऑयल मार्केटिंग कंपनिया हैं, अपस्ट्रीम कंपनियां हैं और गैस ट्रांसमिशन या ट्रेडिंग कंपनियां भी शामिल हैं. पेट्रोनेट LNG और GAIL जैसी गैस डिस्ट्रीब्यूटर और इम्पोर्टर कंपनियों के शेयरों पर शॉर्ट टर्म में नीचे की ओर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि महंगे स्पॉट खरीद से ऑपरेशनल लागत बढ़ेगी. सप्लाई में कमी से बिक्री में भी कमी आएगी.

करीब करीब सभी सिटी डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनिया, जैसे Adani Total Gas, Indraprastha Gas, Gujarat Gas, Mahanagar Gas खुद डायरेक्ट LNG इंपोर्ट नहीं करतीं, बल्कि पेट्रोनेट LNG, GAIL जैसी कंपनियों से रीगैसीफाइड LNG खरीदती हैं. ये कंपनियां LNG इंपोर्ट करती हैं, अपने टर्मिनल्स पर उसे रीगैसिफाई करती हैं और फिर रीगैसिफाइड LNG को पाइपलाइन के जरिए CGD कंपनियों को सप्लाई करती हैं.

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां

कतर से LNG सप्लाई में रुकावट या कटौती होने पर इन सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर गंभीर असर पड़ेगा. क्योंकि स्पॉट LNG प्राइस टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स के दोगुने भाव पर चले गए हैं, जो कि पहले $12-13 हुआ करते थे, अब $25-$30/MMBtu तक चले गए हैं. ऐसे में CGD कंपनियों को वॉल्यूम में कटौती का सामना करना पड़ेगा, जिससे CNG स्टेशनों पर कटौती, PNG घरों में अनियमित सप्लाई की समस्या आ सकती है. लागत बढ़ने से ऑपरेशनल मार्जिन 20-30% सिकुड़ सकता है, शेयर प्राइस पर भी दबाव दिखना लाज़िमी है.

1.Adani Total Gas Ltd.
2. Gujarat Gas Ltd.
3. Indraprastha Gas Ltd.
4. Mahanagar Gas Ltd.

    गैस ट्रांसमिशन/LNG इंपोर्ट कंपनियां

    QatarEnergy के LNG उत्पादन रुकने से Petronet LNG पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. बुधवार को इसका शेयर 12% तक टूट गया, क्योंकि ये भारत का सबसे बड़ा LNG इंपोर्टर है और Qatar से 7.5 MMTPA का लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट रखता है. GAIL (India) पर भी निगेटिव प्रेशर है क्योंकि ये कतर से 1 MMTPA गैस सप्लाई लेता है. गुजरात स्टेट पेट्रोनेट (GSPL) भी इससे अछूता नहीं है. ये पाइपलाइन ऑपरेटर है. गैस फ्लो कम होने से ट्रांसमिशन वॉल्यूम घट सकता है. कुल मिलाकर शॉर्ट टर्म में इन तीनों स्टॉक्स पर डाउनवर्ड प्रेशर बना हुआ है.

    5.Petronet LNG Ltd.
    6.GAIL (India) Ltd.
    7.Gujarat State Petronet Ltd.

    अपस्ट्रीम कंपनियां
    अपस्ट्रीम कंपनियों ONGC और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) पर पॉजिटिव असर देखने को मिला है. भारत में घरेलू गैस उत्पादन, ONGC और RIL के KG बेसिन और मुंबई हाई फील्ड्स से LNG इंपोर्ट की कमी को भरने में मदद कर सकता है, क्योंकि कतर से सप्लाई में रुकावट से ग्लोबल और स्पॉट LNG कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और भारत में इंपोर्टेड गैस की कीमतें ऊपर जा रही है. ONGC, जो भारत का सबसे बड़ा अपस्ट्रीम प्लेयर है, गैस की ऊंची कीमतों से सीधा फायदा उठा रहा है, क्योंकि ये इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता कम करने में योगदान दे सकता है और ऊंची कीमतों से इसका रेवेन्यू बढ़ेगा. RIL भी KG-D6 फील्ड से गैस उत्पादन बढ़ा रहा है, और ग्लोबल गैस प्राइस चढ़ने से उसके अपस्ट्रीम सेगमेंट में मजबूत प्राइसिंग मिल रही है.

    1. ONGC
    2. Reliance Industries (RIL)

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियां
    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भी नजर रखने की जरूरत है. स्पॉट रीगैसिफाइड LNG की कीमतें दोगुनी होने से OMCs की ऑपरेशनल लागत बढ़ेगी और मार्जिन पर दबाव दिखेगा. बीते कुछ दिनों से हम इनके शेयरों पर दबाव भी देख रहे हैं. शॉर्ट टर्म में इन तीनों OMCs के शेयरों पर नेगेटिव सेंटिमेंट बना हुआ है. ऊंची लागत, सप्लाई में कटौती और जियोपॉलिटिकल रिस्क से कमाई पर असर पड़ेगा. जबकि क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से रिफाइनिंग मार्जिन मिक्स्ड रह सकता है.

    10.IOC
    11.BPCL
    12.HPCL

    जिन पर इनडायरेक्ट असर पड़ेगा

    कई कंपनियां जो सीधे तौर पर LNG इंपोर्ट में कटौती से प्रभावित तो नहीं होंगी, लेकिन इनडायरेक्ट असर पड़ेगा, जैसे Energy Infrastructure Trust, जो एनर्जी ट्रांसमिशन और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश करता है. LNG सप्लाई में कमी से गैस बेस्ड बिजली उत्पादन और गैस ट्रांसमिशन वॉल्यूम पर कुछ असर पड़ सकता है, हालांकि इन कंपनियों के रेवेन्यू अक्सर लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित होते हैं, इसलिए असर सीमित रह सकता है.

    Inox India पर पॉजिटिव असर की संभावना बन सकती है, क्योंकि कंपनी क्रायोजेनिक स्टोरेज टैंक्स, LNG टैंक और गैस हैंडलिंग सिस्टम्स बनाती है. अगर ग्लोबल LNG सप्लाई कम रहती है और प्राइस ऊंचे बने रहते हैं, तो LNG स्टोरेज और इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ सकती है, जिससे कंपनी के ऑर्डर बुक और बिजनेस ग्रोथ को फायदा मिल सकता है.
    साथ ही, Welspun Corp पर मिक्स्ड असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि ये स्टील पाइप्स बनाती है जो गैस/ऑयल ट्रांसमिशन और LNG टर्मिनल्स में इस्तेमाल होती है.

    13.Energy Infrastructure Trust
    14.Inox India Ltd.
    15.Welspun Corp Ltd.

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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