रिटेल निवेशक लिख रहे हैं बाजार का नया इतिहास! FIIs के सामने खड़ी आम निवेशकों की फौज

भारतीय शेयर बाजार बीते कुछ कुछ साल से एक बड़े बदलाव के दौर गुजर रहा है. बाजार में रिटेल निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और यही वजह है कि करीब 20 साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि इंडिविजुअल निवेशक भारतीय बाजार में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) से ज्यादा हिस्सा रखते हैं.

इसी साल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने एक डेटा जारी किया था, टॉपिक था India Ownership Tracker Q1 FY26. जिसमें एक्सचेंज ने बताया कि डायरेक्टर रिटेल ओनरशिप यानी मेरे और आप जैसे निवेशकों की होल्डिंग NSE की लिस्टेड कंपनियों में बढ़कर 9.6% हो चुकी है. अगर डायरेक्ट और म्यूचुअल फंड्स दोनों को मिला दें तो ये रिटेल होल्डिंग 18.5% के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुकी है. जो कि तिमाही आधार पर 30bps का उछाल है, जिसे मामूली नहीं कहा जा सकता. दिसंबर 2024 में FPIs भारतीय बाजार में 17.4% होल्डिंग रखते थे.

बीते एक साल में हमने एक बदलाव ये भी देखा है कि भारतीय बाजार में FIIs ने जो जगह खाली की थी, उसे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बखूपी पाट दिया है और उनकी पकड़ भारतीय बाजारों पर मजबूत हुई है, जो कि एक अच्छा संकेत है, क्योंकि FIIs पर निर्भरता कम होने से भारतीय बाजारों में स्थिरता दिख रही है.

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों ने साल 2021 से ही भारतीय बाजारों को अपना मजबूत सपोर्ट देना शुरू किया था. साल 2022 में इसके बाद इस साल यानी 2025 में भी रिटेल ने डायरेक्ट और म्यूचुअल फंड्स के जरिए बाजार में अपने पैर जमाए रखे, हमने साल 2024 में देखा जब FIIs घबराकर अपना माल बेचकर निकल रहे थे और बाजार में अस्थिरता फैल गई थी. DIIs में भी रिटेल निवेशकों ने जबरदस्त जोश दिखाया है. इसकी नतीजा ये हुआ कि पहली बार इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स का हिस्सा FIIs से ज्यादा हो गया.

इन कंपनियों में हैं सबसे ज्यादा रिटेल निवेशक

मैं आपको 10 कंपनियों की लिस्ट दे रहा हूं जिसमें रिटेल शेयरहोल्डर्स की संख्या सबसे ज्यादा है.

रिटेल निवेशक देते हैं बाजार को सहारा

जैसा कि लिस्ट में हम देख रहे हैं रिटेल शेयरहोल्डर्स की संख्या सबसे ज्यादा टाटा मोटर्स में है, जो कि 65 लाख से भी ज्यादा है. इस लिस्ट में तीन कंपनियां हैं जिनकी रिटेल शेयरहोल्डिंग 60 लाख से भी अधिक है. रिटेल शेयरहोल्डिंग ज्यादा होने का मतलब ये है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है या कहें कि बढ़ रहा है. इसका फायदा तब समझ आता है जब FIIs अपने स्टॉक्स बेचकर निकल रहे होते हैं तब यही DIIs और रिटेल निवेशक बाजार को संभालते हैं. उदाहरण के तौर पर FY22 में FII ने 1.4 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी, जो कि अभी तक सबसे ज्यादा है. इसके बाद FY23 में भी 37,000 करोड़ रुपये की बिकवाली देखने को मिली थी. यही ट्रेंड FY24, FY25 में भी दिखा, जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, लेकिन मार्केट ने पॉजिटिव रहे.

रिटेल निवेशकों की संख्या बढ़ने का क्या मतलब

किसी भी बाजार में जब रिटेल निवेशकों की संख्या बढ़ती है तो उस बाजार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे निवेशक जो बाजार में लंबी अवधि के लिए आते हैं, खासतौर पर महिलाएं, तो बाजार में करेक्शन के दौरान ये बाजार को स्थिरता देते हैं. ठीक वैसे ही जैसे समंदर बीच में ज्यादा गहरा और शांत होता है.

ज्यादा रिटेल निवेशक होने का मतलब ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी होना जिससे सभी इक्विटीज में लिक्विडिटी में सुधार होता है और प्राइस डिस्कवरी आसानी से और बेहतर तरीके से होती है.

रिटेल निवेशकों की संख्या बढ़ने से कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस में सुधार, पारदर्शिता और एक्टिव स्क्रूटनी बढ़ती है. साथ ही गवर्ननेंस के स्टैंडर्ड और कॉर्पोरेट फैसलों पर भी इसका असर पड़ता है.

रिटेल निवेशकों ने ट्रेंड बदला

रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से एक और ट्रेंड का पता चला है या यूं कहें कि पुराना चला आ रहा ट्रेंड बदला है. अभी तक निवेशकों की पहली पसंद होती थी Nifty50 के स्टॉक्स, जिसे वो अपने पोर्टफोलियो में बड़ी शान से रखते थे. जो कि आमतौर पर मार्केट की स्टेबल कंपनियों की एक लिस्ट है. लेकिन अब निवेशकों की दिलचस्पी का दायरा इन ब्लू चिप कंपनियों से आगे बढ़कर
मिडकैप और स्मॉलकैप तक पहुंच चुका है. इससे ये पता चलता है कि देश की बढ़ती इकोनॉमी पर रिटेल निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और इसलिए उनकी सोच भी डायवर्सिफाइड हुई है. एक डेटा बताता है कि निफ्टी50 कंपनियों में रिटेल निवेशकों ने अपना पोर्टफोलिया कम किया है जो कि 35% तक आ चुका है, ये 22 साल में सबसे कम है.

अगर आप ये सोच रहे हैं कि ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि मिडकैप और स्मॉलकैप में रिटर्न ज्यादा मिलता है और निवेशक सिर्फ इसलिए उनके पीछे भाग रहे हैं तो ये पूरा सच नहीं है. दरअसल, मार्केट में महिलाओं और जेन-Z की हिस्सेदारी बहुत तेजी से बढ़ी है. उनकी जोखिम लेने की क्षमता ज्यादा है, आज के डिजिटल युग में उनके पास रिसर्च और जानकारियां हैं. अलग अलग तरह से निवेश के मौके हैं. साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप का दमदार प्रदर्शन तो है ही.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *