चांदी की ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कौन? केविन वॉर्श या जे पी मॉर्गन!

Silver Historic Crash

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे आखिर कौन है, अगर मार्केट में तैर रही खबरों पर ग़ौर करेंगे तो आपको केविन वॉर्श का नाम सुनाई देगा, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फेड के नए चेयरमैन के रूप में नामांकित किया है. वॉर्श को सख्त पॉलिसी वाला माना जाता है, यानी ब्याज दरों में कटौती को लेकर उनका नजरिया हॉकिश है. मगर, क्या केवल यही वजह है कि एक खबर की वजह से चांदी 30% से ज्यादा टूट जाए? शायद एक वजह और भी है, इस गिरावट के पीछे, जिसका जिक्र बहुत ज्यादा नहीं हुआ. ये वजह इतिहास से लंबा सफर तय करते हुए पहुंची है और शायद खुद को दोहरा रही है. ये कहानी है जे पी मॉर्गन की, इतिहास का ये किस्सा भी जानेंगे, लेकिन पहले वर्तमान की बात करते हैं और समझते हैं कि चांदी की कीमतों में 30 जनवरी 2026 को जो भारी गिरावट आई, उसके पीछे जे पी मॉर्गन का क्या रोल था.

चांदी की गिरावट और जे पी मॉर्गन

30 जनवरी, 2026 को चांदी एक दिन में ही 30% तक टूट जाती है, जो कि 1980 के बाद एक दिन में आई इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है. भाव 121 डॉलर से गिरकर 76 डॉलर पर आ जाते हैं.
इससे पहले चांदी 2 हफ्ते से लगातार तेज़ी से मजबूत हो रही थी, इसलिए सभी को लग रहा था कि चांदी के भाव अभी और बढ़ेंगे, लेकिन जो होने वाला था, उसका अंदाजा किसी को नहीं था, सिवाय एक को छोड़कर…जे पी मॉर्गन. दो हफ्ते की तेजी सिर्फ कुछ घंटों में ही हवा हो गई.

हुआ ये कि इसी दिन 30 जनवरी, 2026 को जे पी मॉर्गन और कई बड़े बड़े बैंक्स अपनी अपनी शॉर्ट पोजीशन को क्लोज करते हैं. कहां पर, चांदी के बॉटम पर. यानी जे पी मॉर्गन को बड़ी मात्रा में चांदी को खरीदना पड़ा. ऐसे में तो कीमतें ऊपर जानी चाहिए थीं, आसान और सीधी समझ तो यही कहती है. लेकिन उसी दिन चांदी के दाम 30% तक टूट गए. रिटेलर्स तो यही मानकर चल रहे थे कि इसके पहले भी बड़े बड़े बैंक्स पोजीशन को शॉर्ट करते हैं, तब तो दाम चढ़े थे, इसलिए इस बार भी कीमतें ऊपर जाएंगी. इसलिए रिटेलर्स ने भी अपनी पोजीशन ले लीं. मगर, रिटेलर्स को अंदाजा भी नहीं था कि आगे होने क्या वाला है.

LME, HSBC ऑफलाइन हुए

तभी एक संयोग और होता है, 30 जनवरी, 2026 को ही दुनिया के सबसे बड़े मेटल एक्सचेंज लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में कुछ टेक्निकल दिक्कत आ जाती है और ये ऑफलाइन हो जाती है, पूरे एक घंटे के लिए ट्रेडिंग ठप हो जाती है. दिलचस्प संयोग ये भी है कि ठीक उसी समय HSBC का ट्रेडिंग सिस्टम भी बैठ जाता है. LME और HSBC मेटल ट्रेडिंग में लिक्विडिटी मुहैया कराते हैं. इनके ठप होने के मतलब है कि BUY-SELL ऑर्डर का अटक जाना. अब समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि इससे फायदा किसको हुआ होगा, जे पी मॉर्गन को. क्या ये सिर्फ एक संयोग है. क्योंकि जब वो अपनी पोजीशन क्लोज कर रहा था और खरीदारी कर रहा था, तो उस वक्त उसके सामने कोई बड़ा खरीदार ही नहीं था. नतीजा ये हुआ कि एक्सचेंज पर प्राइस डिस्कवरी का फ्रेमवर्क पूरी तरह से बैठ गया. जिससे कीमतें बहुत तेजी से गिरने लगीं. यही वजह थी कि शुक्रवार को चांदी में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली.

इतिहास के पन्नों में जे पी मॉर्गन का ‘खेल’

अगर आपको ये लग रहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं, हो सकता है कि टाइमिंग का खेल हो या आप ये भी कह सकते हैं कि ये सबकुछ जे पी मॉर्गन का एक कैलकुलेटिव और स्ट्रैटेजिक मूव भी हो सकता है या फिर ये सबकुछ एक संयोग भी हो सकता है, मगर जेपी मॉर्गन का इतिहास कुछ और कहता है, जिसे जानना जरूरी है. उसी के बाद आपको सारी कहानी समझ आएगी, क्योंकि जे पी मॉर्गन ट्रेडर्स ने सिल्वर, गोल्ड और अमेरिकी ट्रेजरी फ्यूचर्स की कीमतें मैनिपुलेट की हैं, वो भी कई सौ बार.ऐसी प्राइस मैनिपुलेशन के लिए उसको अमेरिकी अदालत से सजा भी मिल चुकी है. 2008 से 2016 के दौरान किया गया ये एक सिस्टमैटिक मैनिपुलेशन था.

इतिहास के पन्नों में जे पी मॉर्गन का 'खेल'

प्राइस मैनिपुलेशन के लिए जे पी मॉर्गन के सीनियर्स ने स्पूफिंग का इस्तेमाल किया, यानी कि बड़ी मात्रा में फेक ऑर्डर्स प्लेस किए गए, जिन्हें कभी पूरा ही नहीं किया जाना था. स्पूफिंग एक गैर-कानूनी तरीका है, फिर भी ये किया गया. इससे मार्केट में फेक डिमांड बढ़ाई गई. प्राइसेस ऊपर गईं. रिटेल निवेशकों को लगा कि कीमतें ऊपर जा रही हैं, वो भी इस दौड़ में शामिल हो जाते हैं. लेकिन जब प्राइसेस अपने पीक पर पहुंच जाती हैं तो ये सारे बड़ी मात्रा में प्लेस किए गए फेक ऑर्डर्स कैंसिल कर दिए जाते हैं. जिससे प्राइसेस एकदम से नीचे आ जाती हैं. फंस कौन जाता है रिटेलर. ऐसा ही तब भी किया जाता है, जब कीमतों को चढ़ाना होता है. यानी स्पूफिंग वो तरीका है जिससे प्राइसेस को अपने फायदे के लिए किसी भी दिशा में मोड़ा जा सकता है.

यह स्पूफिंग की स्कीम 2008-2016 यानी 8 साल तक न्यू यॉर्क, लंदन और हांगकांग में जे पी मॉर्गन के प्रेशियस मेटल्स डेस्क पर चली. ट्रेडर्स ने लाखों फर्जी ऑर्डर्स डाले, जिसमें गोल्ड, सिल्वर और दूसरे मेटल्स के फ्यूचर्स शामिल थे. कंपनी के कुछ ट्रेडर्स और डेस्क हेड्स इस पूरी मिलीभगत में शामिल थे. जे पी मॉर्गन ने 172 मिलियन डॉलर कमाए लेकिन दूसरे लोगों को 300 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ.

जब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो जेपी मॉर्गन पर जु्र्माना और इसमें शामिल लोगों को जेल भी हुई. 29 सितंबर 2020 को जेपी मॉर्गन ने रिकॉर्ड $920.2 मिलियन का जुर्माना भरा. बैंक ने गलती मानी और डिफर्ड प्रॉसिक्यूशन एग्रीमेंट (DPA) साइन किया. कुछ ट्रेडर्स पर क्रिमिनल चार्ज लगे, दो प्रमुख ट्रेडर्स माइकल नोवाक और ग्रेग स्मिथ को 2022-2023 में दोषी ठहराया गया और जेल हुई. इसमें हालांकि कुल 15 से ज्यादा ट्रेडर्स शामिल थे, लेकिन कंपनी ने ज्यादातर मामलों में सेटलमेंट किया.

30 जनवरी, 2026 को एक ही दिन में कई घटनाएं एक साथ होती हैं, उन घटनाओं को जब एक सिरे में पिरोकर देखते हैं तब कहानी समझ आती है. इतिहास इसलिए बताया कि जे पी मॉर्गन पूरे मार्केट को कंट्रोल करने की ताकत रखता है, इसलिए अगर अब भी आपको लगता है कि ये केविन वॉर्श की वजह से है कि चांदी एक दिन में 32% टूट गई तो आप ये कहानी इंटरनेट पर जाकर इत्मीनान से पढ़िए. समझिए कि कैसे फाइनेंशिल मार्केट की बड़ी बड़ी ताकतें अपना मुनाफा कमाने के लिए गलत काम करने से भी पीछे नहीं हटती हैं.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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