अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एक दिन ऐसा नहीं जाने देते, जब कोई नया तमाशा दुनिया के लिए न खड़ा हो. अभी पिछले हफ्ते अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया, लेकिन ट्रंप हैं कि मानते नहीं. उनके निशाने पर अब सोलर कंपनियां आ गई हैं. अमेरिका ने भारत के सोलर इंपोर्ट पर 126% की ड्यूटी लगा दी है. नतीजा ये हुआ कि Waaree, Premier Energies और Vikram Solar के शेयरों में 7% से लेकर 15% तक की गिरावट देखने को मिली.
ट्रंप के निशाने पर क्यों हैं सोलर कंपनियां
हालांकि ये इंपोर्ट ड्यूटी सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि इंडोनेशिया और लाओस पर भी लगाई गई है. भारत पर ये ड्यूटी 125.87% है, इंडोनेशिया पर 104.38% और लाओस पर 80.67% है. पिछले साल अमेरिका के लिए इन तीनों देशों का इंपोर्ट कुल मिलाकर $4.5 बिलियन था. जो कि 2025 में अमेरिका में हुए कुल इंपोर्ट का दो-तिहाई हिस्सा है. इतना ही नहीं H1FY25 में 57% सोलर मॉड्यूल इन तीन जगहों से ही इंपोर्ट हुए थे. ‘America First’ का नारा देने वाले ट्रंप को ये बात शायद नागवार गुजरी और यही वजह रही कि इन तीन देशों की सोलर कंपनियां उनके निशाने पर आ गईं.
सिर्फ भारत के नज़रिये पर बात करें तो भारत की सोलर कंपनियों के लिए अमेरिका एक बड़ा बाज़ार है, हालांकि हमेशा से ऐसा नहीं था. अमेरिकी वाणिज्य विभाग का डेटा बताता है कि साल 2024 में भारत से अमेरिका को सोलर इंपोर्ट की वैल्यू 793 मिलियन डॉलर थी, जो कि साल 2022 के इंपोर्ट 83 मिलियन डॉलर से 9 गुना ज्यादा है. साल 2022 में US के सोलर मार्केट में भारत एक बहुत ही छोटा प्लेयर हुआ करता था. उस वक्त वियतनाम, मलेशिया जैसे देश अमेरिकी बाज़ार पर हावी थे, लेकिन अगले दो सालों में ही हालात बिल्कुल बदल गए. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस दौर में चीन+1 की पॉलिसी जोरों पर थी और अमेरिका ने चीन और दूसरे साउथ ईस्ट एशिया के देशों पर टैरिफ बढ़ाना शुरू कर दिया था. ऐसे में भारत को अमेरिकी सोलर बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने का मौका मिल गया. इसलिए आप देखेंगे कि साल 2023 में इंपोर्ट अचानक बढ़कर 760 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
अमेरिका का कहना है कि वो ‘America First’ की नीति पर काम कर रहे हैं, इसलिए सोलर कंपनियों पर ड्यूटी बढ़ाई गई है. अमेरिका का ये भी कहना है कि भारत अपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को सब्सिडी देता है, जो कि उसे गलत लगता है, वो इसे अनफेयर मानता है. सब्सिडी की वजह से भारतीय सोलर कंपनियां सोलर सेल, सोलर पैनल मार्केट से कम रेट पर अमेरिका में बेच पाती हैं, जिससे वहां की घरेलू कंपनियों को नुकसान होता है.
किस कंपनी पर पड़ेगा असर और कितना
हालांकि ड्यूटी को लेकर अभी तो ये अंतरिम फैसला है, इस पर अभी डिस्कशन चल ही रही है. इस बीच नीचे एक टेबल दे रहे हैं, जिसमें कंपनियों के एक्सपोज़र के हिसाब उन पर इस ड्यूटी का असर बताया गया है.

आज जिन तीन कंपनियों के शेयरों ने गोता लगाया है, जाहिर है उनका बिज़नेस एक्सपोज़र अमेरिका में काफी अच्छा खासा है. उनकी कमाई के एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है. इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद इन कंपनियों के लिए अमेरिका में अपने प्रोडक्ट्स को बेचना महंगा हो जाएगा, बाजार के दायरे उनके लिए थोड़ा सिमट जाएंगे, और इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ेगा. इसी डर ने इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बनाया है. अब जरा कंपनियों और उनके US एक्सपोजर पर नजर डालते हैं.
- Waaree Energies सोलर सेक्टर का एक बड़ा प्लेयर है और अमेरिकी बाजार में पकड़ रखता है. दिसंबर तिमाही में Waaree Energies का कुल रेवेन्यू का करीब 30% विदेशी बाजार से आया था. अब इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि वारी के लिए अमेरिका का कितना बड़ा बाजार है. वारी के मैनेजमेंट ने दिसंबर तिमाही अर्निंग्स कॉल में कहा था कि अमेरिका उनके लिए बहुत जरूरी बाजार है, वो वहां पर न सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग कर रहे हैं, बल्कि अपने निवेश को भी बढ़ा रहे हैं. कंपनी ने हाल ही में Meyer Burger का अधिग्रहण किया है और ग्रोथ के नए नए मौके भी तलाश रही है. तीसरी तिमाही के अंत में Waaree Energies की ऑर्डर बुक 60,000 करोड़ रुपये थी. कंपनी ने खुद बताया है कि वो वित्त वर्ष 2026 के लिए EBITDA गाइडेंस 5,500 करोड़ से रुपये 6,000 करोड़ रुपये को पार कर लेंगे.
- Vikram Solar के लिए भी अमेरिकी बाजार बेहद जरूरी है क्योंकि इसकी ऑर्डर बुक का 20% एक्सपोर्ट्स से आता है, जिसमें अमेरिका का हिस्सा 16% से ज्यादा है. इसलिए ड्यूटी बढ़ने पर इसके बिज़नेस पर भी असर पड़ना तय है.
- Premier Energies का अमेरिकी बाजार में कोई महत्वपूर्ण एक्सपोजर नहीं है. फिर भी आज ये 10% टूट गया. वजह, सिर्फ डर है. इसे आप spillover sentiment, Panic Selling… कुछ भी कह सकते हैं. चिता पड़ी है तो हम भी लेटेंगे की रीत में ये शेयर भी टूट गया. बाकी कोई और ठोस वजह से सामने समझ नहीं आती. क्योंकि इसकी पूरी ऑर्डर बुक घरेलू है, एक्सपोर्ट के नाम पर कुछ खास नहीं है.
ड्यूटी का Waaree Energies पर असर नहीं: चेयरमैन
हालांकि Waaree Energies के चेयरमैन हितेश दोशी टीवी इंटरव्यू में ये जरूर कह रहे हैं कि इस ड्यूटी का असर कुछ खास नहीं होगा, होगा भी तो बहुत सीमित होगा. वो इसको समझाते हुए कहते हैं कि अमेरिका में सोलर पैनल्स पर ड्यूटी तय करने का आधार सोलर सेल का मूल देश यानी country of origin होता है, न कि अंतिम सोलर मॉड्यूल कहां असेंबल किया गया है. अगर कोई कंपनी किसी ऐसे देश से सोलर सेल्स इंपोर्ट करती है जहां लागू अमेरिकी ड्यूटी 10% है, और फिर भारत में सोलर पैनल्स बनाकर अमेरिका में एक्सपोर्ट करती है, तो सेल के country of origin की 10% ड्यूटी ही लगेगी.
मतलब ये कि अगर चीन से सोलर पैनल मंगवाया और फिर उसे भारत में असेंबल किया जाए और अमेरिका को इंपोर्ट किया जाए तो ड्यूटी चीन के हिसाब से लगेगी, न कि भारत के हिसाब से. लेकिन, सोलर सेल और सोलर पैनल दोनों ही भारत में बनाए गए हैं, फिर अमेरिका में एक्सपोर्ट किए गए हैं, तब ये 126% वाली नई ड्यूटी लागू होगी.
दोशी बताते हैं कि भारत में बने सोलर सेल्स कुल अमेरिकी सोलर पैनल इंपोर्ट्स का सिर्फ 4% हिस्सा है, इसलिए अमेरिका में कुल अनुमानित 35 गीगावॉट के एक्सपोर्ट्स में से करीब 4% पर ही असर पड़ेगा. जो कि
यह अनुमानित रूप से 600 मेगावॉट से 1,000 मेगावॉट के शिपमेंट्स के बराबर है.
दोशी का कहना है कि Waaree Energies का अमेरिकी बाजार में एक्सपोजर इस तरह है कि कंपनी भारत में बनी सोलर सेल्स से बने मॉड्यूल्स को अमेरिका में एक्सपोर्ट नहीं करती. पिछले 10 साल से कंपनी ने ऐसा नहीं कर रही है. अब भी अमेरिका में उसके एक्सपोर्ट्स में इस्तेमाल होने वाली सेल्स उन देशों से आती हैं जहां ड्यूटी लगभग 10% है. इसलिए इस ड्यूटी का बिल्कुल कोई असर नहीं है. दोशी कहते हैं कि कंपनी के पास भारत में बनी सोलर सेल्स को अमेरिका में एक्सपोर्ट करने का फिलहाल कोई प्लान नहीं है, क्योंकि घरेलू बाजार में ऐसी सेल्स की डिमांड बहुत मजबूत है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
Twitter – https://x.com/SumitResearch
Insta – Mehrotra Sumit (@sumitresearch)
Youtube – https://www.youtube.com/@Sumitresearch
















Leave a Reply