आ गया बाज़ार में पैसा लगाने का टाइम! FIIs के लौटने की मिलने लगी है आहट

When Will FIIs Come Back To India?

मार्च का महीना बाज़ार के लिए अच्छा नहीं रहा, खास तौर पर FIIs के नज़रिये से देखें जिन्होंने बाजार से 12.7 बिलियन डॉलर निकाल लिए, तो निवेशकों के मन में एक सवाल कौंध जाता है, कि ये कब तक चलेगा, कब तक FIIs भारतीय बाज़ारों से पीछा छुड़ाते रहेंगे और कब तक हम बाज़ार से दूरी बनाकर बैठे रहेंगे?

सारे मोर्चों पर चीजें बिगड़ चुकी हैं, निफ्टी चार महीने से लगातार गिर रहा है, USD में निफ्टी सितंबर 2021 के स्तर पर वापस आ गया है, मतबल ये कि 4.5 साल के डॉलर रिटर्न मिट गए. कैपिटल अकाउंट डेफिसिट में चला गया, FPI आउटफ्लो, भारतीयों का विदेशी निवेश, IPO, FPO, OFS सेलिंग और हाई वैल्यूएशन, ये सबकुछ जब सामने दिख रहा हो तो सवाल उठता है कि क्या FIIs फिर कभी भारत लौटेंगे? कब वो टाइम आएगा कि हम बाजार में फिर से पैसा लगा सकेंगे?

अगर हां, तो कब? इस सवाल का जवाब DSP Netra की अप्रैल की रिपोर्ट में मिलता है, जिसमें कहा गया है कि विदेशी निवेशक लौटेंगे और बहुत जल्द लौटेंगे और ये दावा हवा में नहीं बल्कि तर्कों और डेटा पर आधारित है. उसी रिपोर्ट के आधार पर ये आर्टिकल लिखा गया है.

रिपोर्ट कहती है कि हम अब इक्विटी पर अपना पुराना ‘कंजर्वेटिव’ नजरिया छोड़ रहे हैं, बाजार में हाल ही में जो करेक्शन देखने को मिली है, हमें कुछ ऐसे ठोस संकेत मिल रहे हैं जो बताते हैं कि अब पोर्टफोलियो में धीरे-धीरे इक्विटी का हिस्सा बढ़ाना शुरू करना चाहिए. खास तौर पर लार्ज-कैप शेयरों में वैल्यूएशन अब काफी आकर्षक हो गए हैं. निफ्टी के 22,300 के नीचे आने के साथ ही, कीमतें अब अपने Long-term Average के करीब पहुंच गई हैं.

FIIs भारतीय बाज़ार से गए क्यों?

FIIs भारत कब लौटेंगे, इस सवाल का जवाब जानने से पहले ये समझना ज़रूरी है कि वो भारत से भागे क्यों? FIIs के भारत से जाने से जाने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है ‘ज्यादा वैल्युएशन’. ये बात सब जानते हैं कि विदेशी निवेशक भारत की ग्रोथ को तो पसंद करते हैं, लेकिन उसके लिए बहुत ज्यादा प्रीमियम देने को तैयार नहीं होते, DSP Netra की रिपोर्ट कहती है कि अब ये स्थिति बदल रही है. यानी भारतीय बाज़ार उतने महंगे नहीं रह गए.

निफ्टी का ट्रेलिंग P/E (Price-to-Earnings) मल्टीपल अब 20x के नीचे आ चुका है, अगर हम Q4FY26 के अनुमानित नतीजों को जोड़ लें, तो निफ्टी 19x के नीचे ट्रेड कर रहा है. निफ्टी का लॉन्ग टर्म औसत (LPA) 18.9x है, इसका मतलब है कि बाजार अब अपनी Fair Value पर आ गया है, जहां ऐतिहासिक रूप से खरीदारी लौटती है.

मगर, एक बात ये भी सच है कि 18.9x का P/E सस्ता नही है बल्कि फेयर और एवरेज के बीच है. 16% के ROE और 10-12% की अर्निंग्स ग्रोथ के साथ निफ्टी का ‘फेयर वैल्यू’ P/E 16.5x से 18x के बीच होना चाहिए, यानी बाजार अब ‘महंगे’ से Average-Fair की ओर बढ़ रहा है.

4.5 साल का इंतजार, रिटर्न कुछ भी नहीं!

पिछले साढ़े चार साल में विदेशी निवेशकों को भारतीय बाज़ारों से कुछ हासिल नहीं हुआ है. निफ्टी इंडेक्स का रिटर्न डॉलर के टर्म में अब सितंबर 2021 के स्तर पर वापस आ गया है. यानी एक विदेशी निवेशक जिसने सितंबर 2021 में भारत में पैसा लगाया था, आज उसका रिटर्न 0% है. जब किसी बाजार में इतना लंबा ‘टाइम करेक्शन’ आता है, तो ‘प्राइस फ्रोथ’ पूरी तरह खत्म हो जाता है. FIIs हमेशा ऐसे बाजार की तलाश में रहते हैं जहां से नई तेजी की गुंजाइश हो. रिपोर्ट का डेटा इशारा कर रहा है कि भारत अब उस ‘लॉन्च पैड’ पर खड़ा है.

रिपोर्ट कहती है कि “Investors extrapolate everything”. एक दिन लगता है दुनिया खत्म हो गई, दूसरे दिन लगता है प्रॉफिट हमेशा के लिए चमकेंगे, अगर हम ये गलती न करें तो बाजार 17 गुना कम वॉलेटाइल होता, लेकिन हम ऐसा नहीं करत हैं, आज की स्थिति को हमेशा के लिए मान लेते हैं. यही वजह है कि FIIs एक दिन भारी बिकवाली करते हैं और कुछ महीनों बाद फिर लौटकर खरीदारी शुरू कर देते हैं.

दिग्गज शेयर अब डिस्काउंट पर

DSP की रिपोर्ट कहती है कि मार्च 2026 में हमने FIIs की जो भारी बिकवाली देखी थी, उसका एक बड़ा हिस्सा टॉप 10 सबसे बड़े स्टॉक्स में ही हुआ होगा, फिर भी इन स्टॉक्स ने शानदार लचीलापन दिखाया, ट्रेडिंग एक्टिविटी में कोई असामान्य उछाल नहीं देखने को मिला.

इस वक्त टॉप 10 स्टॉक्स पिछले दस साल के सबसे कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं. परसेंट के आधार पर देखें तो निफ्टी Top 10 Equal Weight Index का P/E मार्च 2006 से अब तक के डेटा में 17वें पर्सेंटाइल पर है, यानी पिछले 100 दिनों में से सिर्फ 17 दिन ऐसे रहे होंगे जब ये शेयर आज जितने सस्ते थे, यह स्थिति 2016 की नोटबंदी और 2020 के कोविड क्रैश के समय देखी गई थी.

सेक्टर: बैंकिंग, IT, हेल्थकेयर और इंश्योरेंस- ये ऐसे सेक्टर हैं जो बाजार का आधा मार्केट कैप संभालते हैं. ये सभी सेक्टर फिलहाल अपने लॉन्ग-टर्म औसत वैल्युएशन के नीचे ट्रेड कर रहे हैं. जब दिग्गज कंपनियां सस्ते दाम पर मिलती हैं, तो FIIs की वापसी की संभावना बढ़ जाती है.

स्मॉलकैप-मिडकैप अभी महंगे

स्मॉल और मिडकैप अब मीडियन मल्टीपल्स के नॉर्मलाइजेशन के दौर से गुजर रहे हैं. हालांकि स्मॉल कैप स्टॉक्स बहुत महंगे स्तरों से थोड़ा नीचे आए हैं, लेकिन उनकी लॉन्ग-टर्म अर्निंग ट्रैजेक्टरी और मौजूदा ट्रेलिंग वैल्यूएशन को देखते हुए इसमें अब भी बहुत करेक्शन की गुंजाइश बाकी है. स्मॉल-मिडकैप अभी लार्ज कैप के मुकाबले काफी महंगे स्तरों पर हैं.

दरअसल, लार्ज कैप्स अब न सिर्फ बेहतर कीमत पर बल्कि बेहतर ROE और समान अर्निंग ट्रैजेक्टरी के कारण कहीं ज्यादा आकर्षक हो गए हैं. मौजूदा स्तरों से स्मॉल-मिडकैप के लिए लगातार आउटपरफॉर्म करना मुश्किल होगा, इसलिए निवेशकों को फोकस बड़े और सस्ते नामों पर करना चाहिए. स्मॉलकैप-मिडकैप में वैल्यूएशन और क्वालिटी पर मजबूत फोकस रखने वाले एक्टिव मैनेजर्स ही बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं.

कब लौटेंगे विदेशी निवेशक?

अब सवाल ये कि भारतीय बाज़ार में FIIs कब लौटैंगे. देखिए, हम लोग ये मानकर चलते हैं कि FIIs जब खरीदते हैं तब बाज़ार चलता है, जो कि सही सोच नहीं है. असल में FIIs और एक साधारण से निवेशक की सोच में कोई फर्क नहीं होता, दोनों ही केवल बढ़ते हुए भाव के पीछे भागते हैं. वो कोई ट्रेंड पैदा नहीं करते बल्कि ट्रेंड के पीछे चलते हैं.

भारत का कैपिटल अकाउंट घाटे में फिसल गया है, इसकी साफ वजह भी है, FDI में कमी, FPI की निकासी, भारतीयों का विदेशों में बढ़ता निवेश, और IPO/OFS के जरिए बाजार से पैसा बाहर निकलना. मगर, विरोधाभास ये है कि जब स्थिति इतनी खराब दिखती है, तभी यह एक मजबूत विपरीत संकेत (Contra Signal) भी हो सकता है.

आज विदेशी निवेशक भारत में क्या देख रहे हैं? उन्हें अब वैल्युएशन पहले के मुकाबले काफी वाजिब और कुछ सेक्टर्स में ‘सस्ते’ लग रहे हैं, खासकर बड़ी और लिक्विड कंपनियों में. सबसे बड़ी बात तो ये है कि भारत का रुपया REER के आधार पर अपने कई सालों के सबसे कमजोर स्तर के करीब है, जो विदेशी खरीदारों के लिए निवेश को सस्ता बनाता है.

ऐतिहासिक रूप से भारत में सबसे बड़ा विदेशी निवेश तब आया है जब बाजार में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं, बल्कि वैल्युएशन ‘उचित’ स्तरों पर थे, चूंकि इकोनॉमी के ज्यादातर तनाव अब अपने पीक पर पहुंच चुके हैं, इसलिए बाजार ने इन नकारात्मक खबरों को पहले ही पचा लिया है कोविड क्रैश के बाद, यह वही ‘जोन’ या समय है जहां से FPI और FDI का प्रवाह फिर से सुधरना शुरू हो सकता है.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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One comment
Indranil

Sir , Please write in english or just ask the site developer to implement i18N for internationalization . Cant depend on chrome translator all the time .

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