भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट के मैदान पर भले ही मुकाबला न हो, लेकिन टेक्सटाइल सेक्टर के मैदान पर इनको दो-दो हाथ करना ही पड़ेगा. बांग्लादेश की अमेरिका के साथ ट्रेड डील हो गई है. अमेरिका ने बांग्लादेश के सामानों पर टैरिफ को 20% से घटाकर 19% कर दिया है. कुछ टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स जो अमेरिका में बने कॉटन या फिर मैन-मेड फाइबर से बने हों, उन पर ड्यूटी जीरो कर दी गई है. यानी ऐसे इंपोर्ट को अमेरिकी की तरफ से प्रेफरेंशियल ट्रीटमेंट मिलेगा. ये खबर भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए अच्छी नहीं है. क्योंकि टेक्सटाइल के मामले में बांग्लादेश भारत को तगड़ी टक्कर देता है. 10 फरवरी की सुबह अगर आप टेक्सटाइल शेयरों को देखें तो 2.5%-3.5% की गिरावट देखने को मिल रही है.
बांग्लादेश पर टैरिफ 19%, इसके मायने क्या हैं?
जब भारत के साथ अमेरिका की ट्रेड डील हुई और टैरिफ को घटाकर 18% किया गया, तो ये भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बढ़त का मौका था कि वो बांग्लादेश के टेक्सटाइल सेक्टर को कड़ी चुनौती दे सकते थे, लेकिन अब ये फासला घटकर महज 1% का रह गया है. कुछ टेक्सटाइल प्रोडक्टस के लिए तो ये जीरो टैरिफ भी हो गया है. इससे भारतीय टेक्सटाइल के लिए अमेरिकी बाजारों में बांग्लादेश से कड़ी टक्कर मिलेगी, अगर जीरो टैरिफ वाले उत्पादों का वॉल्यूम बढ़ा तो बांग्लादेशी टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के दाम भारतीय उत्पादों से कम हो जाएंगे. ये भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए चुनौतियां बढ़ भी सकती हैं.
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गारमेंट मैन्युफैक्चरर बांग्लादेश रेडीमेड गारमेंट्स इसकी एक्सपोर्ट आय में 80% योगदान देते हैं और लाखों लोगों को रोजगार देते हैं. गारमेंट सेक्टर बांग्लादेश के लिए कितना जरूरी है वो ऐसे समझिए कि इसकी GDP में हिस्सेदारी 10% से ज्यादा है. इसलिए बांग्लादेश किसी भी कीमत पर इस सेक्टर को आगे रखने की हर कोशिश करता है.
जिससे ये ग्लोबल स्तर पर बहुत ही ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना हुआ है. टेक्सटाइल इंडस्ट्री को 2024 में छात्रों की क्रांति से बुरी तरह प्रभावित हुआ था, जिसने सरकार को गिरा दिया था. अब ये इंडस्ट्री एक बार फिर उठ खड़ी हुई है. अमेरिका की ये ट्रेड डील बांग्लादेश को काफी फायदा पहुंचा सकती है. साल 2024 में बांग्लादेश ने अमेरिका में 8.4 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया था, जबकि अमेरिका से आने वाले सामानों का इंपोर्ट इसका एक चौथा 2.2 बिलियन डॉलर ही था. इस डील के बाद बांग्लादेश का अमेरिका के लिए एक्सपोर्ट बढ़ सकता है.
1% का फर्क, क्या फासला बढ़ा पाएगा?
2 अप्रैल, 2025 को अमेरिका ने भारत और बांग्लादेश दोनों पर ही टैरिफ लगाया था. तब भारत पर 25% और बांग्लादेश पर 37% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया था. उस वक्त बांग्लादेश के मैन्युफैक्चरर्स को ये डर था कि वो भारत के मुकाबले पिछड़ जाएंगे, उनके क्लाइंट्स भारत की ओर मुड़ जाएंगे, क्योंकि उन्हें कम लागत पड़ेगी. लेकिन अब इस नई डील से बांग्लादेश और भारत करीब एक ही जमीन पर खड़े दिखाई देते हैं, अगर थोड़ा बहुत पलड़ा भारी भी है तो वो बांग्लादेश का है.
भारत का सबसे बड़ा अपैरल, टेक्सटाइल मार्केट अमेरिका है. वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका को 11 बिलियन डॉलर वैल्यू का एक्सपोर्ट किया गया. ये कुल एक्सपोर्ट का करीब 28-33% बैठता है. भारत और बांग्लादेश के बीच टैरिफ का फर्क सिर्फ 1% जरूर है, लेकिन हाई वॉल्यूम, कम मार्जिन से बड़ा फर्क पड़ सकता है. भारत के मुकाबले बांग्लादेश में लेबल सस्ती है. इसलिए अमेरिका के खरीदार लागत के मोर्चे पर बांग्लादेश की ओर खिंच सकते हैं. करीब-करीब एक समान टैरिफ पर बांग्लादेश अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकता है और डिस्काउंट ऑफर करके भारतीय टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है.
किन एक्सपोर्ट हैवी कंपनियों पर असर
बांग्लादेश पर टैरिफ घटना भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर और इससे जुड़ी कंपनियों के लिए एक चुनौती है. जिनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजारों से आता है. एक नजर डालते हैं उन लिस्टेड कंपनियों पर.
2025-26 डेटा के आधार पर एक्सपोजर
Welspun Living
तकरीबन 60-65% रेवेन्यू अमेरिकी बाजारों से होती है.
होम टेक्सटाइल में ये लीडर है, तौलिया, चादर, हैंडहोम प्रोडक्टस एक्सपोर्ट करती है
इसके पास बड़े रिटेलर्स Walmart, Target जैसे क्लाइंट्स हैं
Gokaldas Exports Ltd
लगभग 70–75% रेवेन्यू US और उत्तरी अमेरिका से आता है
ये स्पोर्ट्सवेअर, फैशनवेअर, आउटडोर कपड़े बनाती है
अमेरिका, कनाडा, यूरोप आदि में टॉप फैशन ब्रांड्स और रिटेलर्स को एक्सपोर्ट करती है
Indo Count Industries Ltd
करीब 97–98% रिवेन्यू एक्सपोर्ट से आता है, US सबसे बड़े मार्केट के रूप में है
ये दुनिया की सबसे बड़ी बेड लिनेन निर्माता और एक्सपोर्टर में से एक है
अमेरिकन एयरलाइंस और होम रिटेल रिटेलर नेटवर्क के साथ काम करती है
KPR Mill
करीब 21–30% रिवेन्यू अमेरिका से आता है, बाकी कंपनियों की तुलना में थोड़ा कम है
ये एक वर्टिकल-इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल कंपनी है
कपास/विस्कोस यार्न, प्रोसेस्ड फैब्रिक्स, गारमेंट्स बनाने से लेकर ब्रांडिंग तक सब करती है
अमेरिका के अलावा यूरोप और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी एक्सपोर्ट करती है
Pearl Global
करीब 50% कमाई अमेरिका को एक्सपोर्ट करने से होती है
मुख्य रूप से गारमेंट सेक्टर में ग्लोबल सप्लायर के तौर पर काम करती है
Arvind Ltd
लगभग 35–40% रेवेन्यू US सहित दूसरे ग्लोबल मार्केट्स से आता है.
EU, एशिया, लैटिन अमेरिका में भी फैब्रिक, तैयार कपड़े एक्सपोर्ट करती है
डेनिम, शर्टिंग, निट्स, कपड़ा और टेक्निकल टेक्सटाइल निर्माता कंपनी है
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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