इन 17 कंपनियों में एंट्री का मौका! शेयरों के भाव बायबैक प्राइस से 57% तक नीचे फिसले

कई कंपनियां जिन्होंने हाल-फिलहाल में शेयर बायबैक का ऐलान किया था, अपने बायबैक प्राइस से काफी नीचे फिसल चुकी हैं। ऐसी कंपनिया इक्का-दुक्का नहीं बल्कि ढेरों हैं। यहां हम ऐसी 17 कंपनियों की बात करेंगे। जिसमें इंफोसिस जैसी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। अब ऐसे में निवेशकों को इन शेयरों की मौजूदा वैल्यू आकर्षक लग सकती है, क्योंकि शेयर बायबैक प्राइस से डिस्काउंट पर हैं। इसको भी हम आगे समझेंगे, लेकिन पहले ये समझ लेते हैं कि शेयर बायबैक होता क्या है और ये कंपनियों क्यों करती हैं।

शेयर बायबैक क्यों करती हैं कंपनियां


शेयर बायबैक यानी कि कंपनी जब अपने ही शेयरों को मौजूदा शेयरहोल्डर्स से वापस खरीदती है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। पहला, कंपनी के पास सरप्लस कैश पड़ा हो और फिलहाल उनके लिए वो किसी काम का नहीं है, तो वो शेयर बायबैक के जरिए निवेशकों को देती हैं। दूसरा, ये एक टैक्स एफिशिएंट तरीका है। इसमें कंपनी और शेयरहोल्डर दोनों की टैक्स की बचत होती है। जबकि डिविडेंड देने पर काफी टैक्स लगता है। तीसरा, कंपनी को अपने ही शेयर अंडरवैल्यूड लग रहे हों, तो वो शेयरों को ऊंचे भाव पर खरीदकर वो कंपनी के बारे में अच्छी तस्वीर पेश करना चाहती है। यही कुछ मोटे-मोटे कारण होते हैं।

बायबैक प्राइस से नीचे फिसले भाव


बायबैक करने के मामले में इंफोसिस का जवाब नहीं है। साल 2017 से लेकर अबतक इस IT दिग्गज ने 5 शेयर बायबैक किए हैं। साल 2025 में ये इसका पांचवा और सबसे बड़ा शेयर बायबैक था, जो नवंबर में आया था। 1,800 रुपये के भाव पर ये शेयर बायबैक किया गया था, कंपनी ने कुल 10 करोड़ शेयर खरीदे थे, यानी कुल वैल्यू 18,000 करोड़ रुपये थी।

जब इंफोसिस शेयर बायबैक प्रोग्राम लेकर आई थी, तब शेयर 1530-1560 रुपये के बीच ट्रेड कर रहा था, जबकि शेयर बायबैक 1,800 के भाव पर किया गया था। मगर अभी ये 1623-1625 रुपये के बीच है। यानी बायबैक प्राइस से ये शेयर 9% से ज्यादा नीचे आ चुका है।

सेरा सैनिटरी अगस्त में अपना बायबैक 2024 में लेकर आई थी। ये कंपनी का पहला शेयर बायबैक ऑफर था। कंपनी ने 12,000 रुपये के भाव पर शेयरहोल्डर्स से शेयर वापस खरीदने का ऑफर दिया था, जबकि उस वक्त शेयर प्राइस 10,100 रुपये के करीब चल रहा था. कंपनी ने उससे कहीं ज्यादा भाव पर बायबैक का ऑफर दिया। लेकिन शेयर बायबैक के बाद इसमें ऐसी गिरावट शुरू हुई जो अबतक नहीं रुकी है। शेयर अब 5,152 रुपये के भाव पर आ चुका है। यानी बायबैक प्राइस से 57% टूट चुका है।

इसमें सिर्फ IT सेक्टर की इंफोसिस या कंज्यूमर सेक्टर की सेरा सैनिटरी ही नहीं है, बल्कि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर की अरबिंदो फार्मा, जायडस लाइफसाइसेंज, नेक्टर लाइफ और न्यूरेका शामिल हैं। कैपिटल गुड्स और इंफ्रा सेक्टर से AIA Engineering, KDDL और Indus Towers है। इससे ये पता चलता है कि गिरावट किसी खास कंपनी से जुड़ी नहीं है, बल्कि कई सेक्टर से जुड़ी हुई है। ऐसे शेयरों की लिस्ट लंबी है, जो नीचे दी गई है।

क्रम संख्याकंपनीबायबैक प्राइसबायबैक प्राइस से टूटा
1Cera Sanitaryware₹12,000-57%
2Technocraft Industries₹4,500-50%
3TTK Prestige₹1,200-48%
4Welspun Living₹220-40%
5Dhanuka Agri₹2,000-39%
6Tanla Platforms₹875-39%
7KDDL₹3,700-37%
8Nectar Life Sciences₹27-30%
9AIA Engineering₹5,000-23%
10GHCL₹725-22%
11Aurobindo Pharma₹1,460-17%
12Nureca₹330-16%
13Fairchem Organics₹800-13%
14Zydus Life Sciences₹1,005-10%
15Bajaj Auto₹10,000-10%
16Indus Towers₹465-9%
17Infosys₹1,800-9%

शेयरों में गिरावट क्यों आई


ये कंपनियां अपने शेयर बायबैक से नीचे क्यों फिसल गईं। इसका कारण हर कंपनी के लिए अलग-अलग है। जैसे IT, कंज्यूमर और कुछ फार्मा कंपनियों में कमजोर तिमाही नतीजे और भविष्य की ग्रोथ पर अनिश्चितता देखने को मिली है। इसलिए इंफोसिस और टानला जैसे शेयर बायबैक प्राइस से नीचे आ गए। इसके अलावा सेरा सैनिटरी, TTK प्रेस्टीज और वेल्सपन लिविंग ने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और डिमांड में अनिश्चितता को झेला, जिससे इसकी कीमतों पर दबाव पड़ा। एक दूसरा कारण ये भी है कि जब बायबैक होता है तो आमतौर पर शेयर थोड़ा चढ़ जाते हैं, बायबैक पूरा होते ही निवेशक मुनाफावसूली करते हैं, जिससे भाव नीचे फिसल जाते हैं, लेकिन किसी कंपनी के भाव अगर लंबे समय से लगातार नीचे ही गिर रहे हैं, तो कंपनी के फंडामेंटल्स और सेक्टर को लेकर चल रही अनिश्चितताओं को भी देखना चाहिए।

क्या ये निवेशकों के लिए मौका है?


अगर सिर्फ शेयर बायबैक के प्राइस से कितना नीचे गिरा, सिर्फ ये देखेंगे तो हां, ये काफी आकर्षक वैल्युएशन पर आ चुके हैं. लेकिन ये आगे और नहीं गिरेंगे, ये कहना मुश्किल है। मगर, ये जरूर दर्शाता है कि मैनेजमेंट को अपने बिज़नेस और वैल्यूएशन पर भरोसा है, लेकिन अगर कंपनी की कमाई और ग्रोथ कमजोर हो, तो बायबैक के बाद भी शेयर नीचे जा सकता है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ EPS और ROE के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स और भविष्य में कंपनी क्या योजनाएं हैं और क्या कंपनी उससे कमाई कर पाएगी, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।

शेयर बायबैक से क्या होता है?


जब कंपनी बाजार से अपने शेयर्स वापस खरीदती है। इससे शेयर्स की संख्या कम होती है, तो जाहिर है EPS अपने आप ही बढ़ता है यानी प्रति शेयर कमाई बढ़ती है। इसके अलावा ROE बेहतर होता है, क्योंकि शेयर बायबैक से कंपनी कैश रिजर्व का इस्तेमाल करती है, जिससे इक्विटी कम होती है।

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