IEX की मोनोपॉली खत्म होने वाली है और बाजार को ये बात अब समझ आ रही है. कुछ दिनों से IEX यानी Indian Energy Exchange चर्चा में है, सोमवार 20 अप्रैल को ये शेयर करीब 8% (₹124.99) तक टूट गया. वजह थी इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटर CERC का एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन, लेकिन IEX ने ऐसे बिजली के झटके पहली बार नहीं झेले हैं. बीते 10 महीनों में देश के इस सबसे बड़े पावर ट्रेडिंग एक्सचेंज का शेयर करीब 42% तक टूट चुका है. पिछले महीने ये शेयर 5% ऊपर था, लेकिन इस साल अबतक ये 5% नीचे आ चुका है.
IEX में बीते एक साल में क्या कुछ हुआ है, इसे जानने से पहले ये समझना ज़रूरी है कि ये करती क्या है, इसका बिज़नेस मॉडल क्या है और क्यों इस नए नोटिफिकेशन की वजह से ये कहा जा रहा है कि पावर ट्रेडिंग एक्सचेंज में इसकी बादशाहत अब खतरे में आ गई है. अब आगे IEX का फ्यूचर क्या है?
IEX का बिज़नेस मॉडल क्या है?
IEX न तो बिजली बनाती है, जैसे कि NTPC, NHPC और न ही पावर डिस्ट्रीब्यूशन के बिजनेस में है जैसे कि टाटा पावर या अदाणी एनर्जी. ये सिर्फ एक पावर ट्रेडिंग एक्सचेंज प्लेटफॉर्म है. आप इसको “बिजली का स्टॉक मार्केट” समझ लीजिए.
मान लीजिए कि एक राज्य है उत्तर प्रदेश, जिसके पास सरप्लस बिजली है, दूसरा राज्य है बिहार, जिसको बिजली की जरूरत है. दोनों IEX पर जाते हैं. दोनों के बीच बिजली किस रेट पर बेची और खरीदी जाएगी इसकी डील होती है और रेट फाइनल होता है. IEX इस डील को करवाता है.
इस काम में IEX की मोनोपॉली है, क्योंकि इस तरह की डील के लिए 85% ग्राहक उसके ही प्लेटफॉर्म पर आते हैं. इसलिए IEX पर जो रेट निकलता है, वही पूरे देश के लिए बेंचमार्क बन जाता है. यानी IEX केवल एक प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिसिटी की प्राइस डिस्कवरी का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. दूसरे एक्सचेंज PXIL (Power Exchange India Limited) और HPX (Hindustan Power Exchange). ये दोनों प्लेयर IEX के सामने बहुत छोटे हैं.
मार्केट कपलिंग क्या है?
IEX पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए सबसे पहले ‘मार्केट कपलिंग’ को समझना ज़रूरी है. अभी जो व्यवस्था है, उसमें बिजली की कीमतें अलग-अलग पावर एक्सचेंजों से तय होती है. हर एक्सचेंज अपने प्लेटफॉर्म पर खरीदने और बेचने वालों का मिलान करता है और डिमांड-सप्लाई के आधार पर एक कीमत पर पहुंचता है.
मार्केट कपलिंग इस व्यवस्था को पूरी तरह से बदल देता है. एक्सचेंजों की अलग-अलग कीमतों की बजाय सभी खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर्स को एक साथ जोड़ दिया जाता है और पूरे बाजार के लिए एक ही ‘यूनिफॉर्म प्राइस’ निकाली जाती है. इसे ही कपलिंग कहते हैं.
CERC का नोटिफिकेशन और IEX को झटका
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) ने एक ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया. जिसमें मार्केट कपलिंग का प्रस्ताव दिया गया. इस नोटिफिकेशन का असर ये हुआ कि IEX का शेयर 6% से ज्यादा टूटकर 127.43 रुपये तक फिसल गया.
ड्राफ्ट रेगुलेशन के मुताबिक अब Grid India को ‘मार्केट कपलिंग ऑपरेटर’ (MCO) बनाया जाएगा. जो कि सभी एक्सचेंजों से बोलियां इकट्ठा करेगा और पूरे देश के लिए एक समान कीमत तय करेगा. इस ड्राफ्ट के बाद निवेशकों के बीच डर फैल गया, क्योंकि ये IEX के बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है.
क्योंकि मार्केट कपलिंग के बाद IEX की ये बादशाहत कम हो जाएगी. छोटी कंपनियां जैसे PXIL और HPX भी अब उसी कीमत पर ट्रेड कर पाएंगी जो IEX पर होगी. इससे IEX का कॉम्पिटिटिव एडवांटेज खत्म हो जाएगा. यानी IEX सिर्फ एक बिड्स कलेक्शन प्लेटफॉर्म बनकर रह जाएगा, न कि प्राइस डिस्कवरी एक्सचेंज. जिसका सीधा असर IEX की कमाई पर पड़ेगा.
IEX अपनी कमाई का करीब 78% हिस्सा प्रति यूनिट ट्रांजैक्शन फीस से कमाता है. अगर मार्केट कपलिंग की वजह से वॉल्यूम दूसरे छोटे एक्सचेंजों की तरफ शिफ्ट होता है, तो IEX की कमाई और मुनाफे पर सीधा बुरा असर पड़ेगा. CERC ने इस ड्राफ्ट पर 16 मई 2026 तक सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक स्टॉक में अनिश्चितता और दबाव बना रह सकता है.
मार्केट कपलिंग टाइमलाइन और IEX पर असर
मार्केट कपलिंग को लेकर चर्चा पिछले साल जून-जुलाई में ही शुरू हो गई थी, तभी लगने लगा था कि सरकार कुछ ऐसा करने जा रही है जो IEX के लिए अच्छा नहीं होगा. नीचे टाइमलाइन को देखिए और स्टॉक पर उसके असर को भी समझिए.
जून-जुलाई 2025: सरकार और CERC ने मार्केट कपलिंग को लेकर अपनी गंभीरता दिखाई और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मंजूरी दी. 23 जुलाई 2025 को CERC ने ऐलान किया कि जनवरी 2026 से मार्केट कपलिंग को लागू किया जाएगा, उसके अगले ही दिन यानी 24 जुलाई को IEX का शेयर 30% तक टूट गया. शेयर 193 से फिसलकर 131.50 रुपये पर आ गया. उस दिन के बाद से ही ये शेयर कभी उठ ही नहीं पाया, इसने कभी 190 के आस-पास भी नहीं भटका. देखा जाए तो 24 जुलाई के बाद से अबतक यानी 9 महीने में सिर्फ 4.5% का ही रिटर्न दिया है. जबकि साल भर का रिटर्न -34% है.
अगस्त 2025: IEX ने इस फैसले के खिलाफ APTEL एपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी में अपील की. उसने कहा कि ये फैसला बिना मार्केट रिसर्च और बिना सोचे-समझे लिया गया है, बिना तैयारी इसे लागू करना ठीक नहीं होगा. निवेशकों को लगा कि कंपनी ने हार नहीं मानी है और अब मामला कोर्ट में है, तो शायद मार्केट कपलिंग पर स्टे लग जाएगा, लेकिन शेयरों पर इसका बहुत ज्यादा असर नहीं दिखा.
फरवरी 2026: लंबी सुनवाई के बाद APTEL ने IEX की याचिका को खारिज कर दिया. ये कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका था. ट्रिब्यूनल ने कहा कि अभी सिर्फ ड्राफ्ट और प्रक्रियाओं पर बात हो रही है, जब फाइनल नियम लागू होंगे तब आप शिकायत लेकर आ सकते हैं. क्योंकि अभी आप जिस तरह से काम कर रहे हैं, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. 13 फरवरी को एपीलेट के फैसले से IEX का शेयर 4-5% तक टूट गया.
ब्रोकरेज की राय
ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि अगर अंतिम नियम जल्द ही जारी कर दिए जाते हैं, तो हमें लगता है कि इसकी प्रक्रिया शुरू होने में 12-15 महीने लग सकते हैं.
ब्रोकरेज ने IEX पर अपनी ‘Neutral’ रेटिंग बरकरार रखी है और 127 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. ये टारगेट NSE पर पिछली क्लोजिंग 135.81 से 6% से ज्यादा की गिरावट पर है.
अब आगे क्या होगा?
अब आगे क्या होगा, ये बात इस पर टिकी है कि क्या RTM भी मार्केट कपलिंग के दायरे में आएगा. अगर ऐसा हुआ, तो IEX का सबसे प्रॉफिटेबल सेगमेंट भी खतरे में आ सकता है. चलिए अब इसको समझते हैं.
देखिए – पावर एक्सचेंज पर ट्रेडिंग दो तरीके से होती है. रियल-टाइम मार्केट (RTM) और डे-अहेड मार्केट (DAM). CERC का आदेश कहता है कि जनवरी 2026 से Grid-India सभी पावर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर बिजली की कीमतों को इकट्ठा करके और एक यूनिफाइड प्राइस को छापेगा. इस प्रक्रिया को DAM कपलिंग कहा जाता है.
Day-Ahead Market (DAM): इस पर अगले दिन के लिए बिजली का सौदा होता है.
Real-Time Market (RTM): इस पर तुरंत ही बिजली खरीदी जाती है. मान लीजिए अचानक कोई पावर प्लांट खराब हो गया या गर्मी बहुत बढ़ गई, तो कोई भी RTM विंडो पर जाकर बिजली खरीद सकता है.
पहले IEX के निवेशक ये सोचकर खुश थे कि चलो कम से कम RTM वाला मार्केट तो IEX के पास रहेगा, लेकिन CERC के नए ड्राफ्ट और कुछ एनालिस्ट के मुताबिक, सरकार धीरे-धीरे RTM को भी इसके दायरे में ला सकती है. अगर RTM में भी रेट सरकार तय करने लगी, तो IEX के पास कोई ‘एक्सक्लूसिव’ चीज नहीं बचेगी.
पिछले कुछ समय में IEX का सबसे ज्यादा वॉल्यूम और मुनाफा RTM सेगमेंट से आ रहा था. रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ने से RTM बहुत पॉपुलर हो गया है, क्योंकि धूप या हवा का अंदाजा ऐन वक्त पर ही लगता है. एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर RTM पर भी मार्केट कपलिंग लागू हो गई, तो IEX का जो प्रीमियम वैल्युएशन लेकर बैठा है, उसे जस्टिफाई करना मुश्किल हो जाएगा.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
Twitter – https://x.com/SumitResearch
Insta – Mehrotra Sumit (@sumitresearch)
Youtube – https://www.youtube.com/@Sumitresearch
















Leave a Reply