भारतीय कॉर्पोरेट जगत में ‘टर्नअराउंड’ की कई कहानियां हैं, लेकिन CG Power की कहानी सबसे अलग है. एक वक्त में ये कंपनी भारी कर्ज, धोखाधड़ी के आरोपों और NCLT के साये में अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही थी. मगर, आज ये Murugappa Group की सबसे सफल कंपनियों में से एक बन चुकी है. अगर किसी को अर्श से फर्श और फिर फर्श से अर्श की कहानी देखनी हो तो CG Power से बेहतर मिसाल नहीं मिल सकती. जो कंपनी कभी दिवालिया होकर बंद होने की कगार पर खड़ी थी, आज वो कंपनी कामयाबी की सिरमौर बन चुकी है. फिलहाल ये कंपनी अपने 52वीक हाई 835 रुपये पर ट्रेड कर रही है.
मगर, साल 2019 का समय था, शेयर बाज़ार में CG Power का शेयर एक के बाद एक सर्किट तोड़ता नीचे गिर रहा था. 100 रुपये के ऊपर ट्रेड करने वाला ये शेयर गिरकर 5 से 10 रुपये पर आ गया. निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका था. क्योंकि कंपनी के खातों में 3,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा का घोटाला सामने आया था. बैंकों का हज़ारों करोड़ रुपये का कर्ज़ चुकाना बाकी था और प्रमोटर गौतम थापर बोर्ड से बाहर निकाले जा चुके थे. SEBI ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया था और NCLT का दरवाज़ा खटखटाने की नौबत आ गई थी. ऐसा लग रहा था कि कंपनी अब शायद ही बच सके. लेकिन आज, 5 साल के बाद कहानी पूरी तरह से बदल चुकी है.
एक ऐतिहासिक कंपनी का जन्म
CG Power की जड़ें 19वीं सदी के इंग्लैंड में हैं. कर्नल REB क्रॉम्पटन ने 1878 में अपनी कंपनी REB Crompton & Company बनाई थी. 1927 में ये कंपनी FA Parkinson के साथ मिलकर Crompton Parkinson Ltd. बन गई. भारत में इसके कदम Greaves Cotton & Company के ज़रिए पड़े, जो इसकी भारतीय एजेंट थी.
28 अप्रैल 1937 को इस कंपनी को भारत में ‘Crompton Parkinson Works Private Limited’ के नाम से रजिस्टर किया गया. मुंबई के वर्ली में इसका हेडक्वार्टर बनाया गया. जहां पर छोटे इलेक्ट्रिक मोटर और सीलिंग फैन बनाए जाते थे.
फिर 1947 में हिंदुस्तान आज़ाद हुआ, आज़ादी का नया सूरज कंपनी के लिए ये बड़ा बदलाव लेकर आया. लाला कर्मचंद थापर, जो भारत के जाने-माने उद्योगपतियों में से एक थे, उन्होंने इस कंपनी को खरीद लिया और ये थापर ग्रुप का हिस्सा बन गई. 1960 में कंपनी शेयर बाज़ार में लिस्ट हुई और 1966 में इसका नाम बदलकर ‘Crompton Greaves Limited’ रखा गया.

ऐसे हुई बर्बादी की शुरुआत- देखिए क्रोनोलॉजी
- कंपनी में सबकुछ ठीक चल रहा था, 2000 के दशक की शुरुआत में Crompton Greaves तेज़ी से बढ़ रही थी. गौतम थापर की लीडरशिप में कंपनी ने अपने पांव दुनिया में पसार रही थी. 2005 से 2012 के बीच कंपनी ने 10 से ज़्यादा अधिग्रहण किए, भारत के अंदर भी 20 से ज्यादा फैक्ट्रियां खोलीं.
- मगर, ये तरक्की कर्ज़ के भरोसे थी. विदेशी कारोबार उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं दे रहे थे. वक्त गुज़रा और आ गई 2008 की वैश्विक मंदी जिसने कंपनी को काफी कमज़ोर कर दिया. अधिग्रहण, कर्ज़ इतना ज्यादा हो चुका था कि पूरा ग्रुप ही कर्ज़ के दलदल में फंसता जा रहा था.
- 2016 में कंपनी ने कंज़्यूमर बिज़नेस को अलग कर दिया, जो आज Crompton Greaves Consumer Electricals के नाम से जानी जाती है. इस डीमर्जर के बाद, जो बची हुई कंपनी थी उसका नाम बदलकर CG Power and Industrial Solutions Limited कर दिया गया. गौतम थापर ने अपनी 34% हिस्सेदारी Advent International और Temasek को बेच दी.
- फिर 2019 में वह तूफान आया जिसने सब कुछ हिला दिया. कंपनी के बोर्ड ने खुद अपने प्रमोटर के खिलाफ जांच बैठाई और पाया कि गौतम थापर की अगुवाई में कंपनी के फंड को उनकी दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया था. जिसमें खासकर Avantha Holdings भी शामिल थी. कंपनी के बोर्ड ने पाया कि CG Power से करोड़ों रुपये बिना किसी सिक्योरिटी या ब्याज के दूसरी ग्रुप कंपनियों को ‘एडवांस’ के तौर पर दिए गए थे.
- साल 2021 में CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की, जांच में पाया गया कि बैंकों से लिए गए लोन के पैसे का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया जिनके लिए वो लिया गया था. बोर्ड की जांच में 3,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं. CBI ने 12 बैंकों से 2,435 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का आरोपत्र दायर किया. कंपनी के लिए बैंक डिफॉल्ट की स्थिति बन चुकी थी और रेटिंग एजेंसियां इसे ‘डिफॉल्ट’ कैटेगरी में डाल चुकी थीं.
- SEBI ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गौतम थापर समेत 4 लोगों को शेयर बाज़ार से बैन कर दिया. PE फर्म KKR ने गिरवी रखे शेयरों को भुनाकर CG Power में 10% हिस्सेदारी हासिल कर ली. कंपनी का मार्केट कैप जो एक समय हज़ारों करोड़ रुपये था, वो धड़ाम से गिरकर सैकड़ों करोड़ तक पहुंच गया.
मुरुगप्पा ग्रुप की एंट्री और एक सुनहरे भविष्य की शुरुआत
हमने फिल्मों में देखा है, जब सबकुछ बुरा होता है, तभी हीरो की एंट्री होती है. जब CG Power बर्बाद होने की कगार पर थी, तब चेन्नई से मुरुगप्पा ग्रुप की कहानी में एंट्री होती है. ये ग्रुप Cholamandalam Finance, Carborundum Universal, EID Parry और Tube Investments जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए जाना जाता है. इसे अक्सर “साउथ का टाटा” कहा जाता है.

मुरुगप्पा ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Tube Investments of India (TII) ने 7 अगस्त 2020 को CG Power में 54% हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव दिया. 26 नवंबर 2020 को मुरुगप्पा ग्रुप ने CG Power का अधिग्रहण पूरा कर लिया. उस वक्त CG Power का पूरा मार्केट कैप महज 846 करोड़ था रुपये था. COVID की दूसरी लहर की आशंका के बीच ये सौदा भारतीय उद्योग जगत में काफी चर्चित हुआ, क्योंकि मुरुगप्पा ग्रुप दशकों से साइकिल और ऑटो पार्ट्स बनाता रहा था और यह उनके लिए पूरी तरह नया क्षेत्र था.

मुरुगप्पा ग्रुप ने इसे क्यों खरीदा?
अब कोई भी ये पूछ सकता है कि एक डूबती हुई कंपनी को कोई क्यों खरीदेगा. इसका जवाब मुरुगप्पा ग्रुप की अपनी लेगेसी में, ये ग्रुप अपनी रूढ़िवादी और कैश-रिच वर्किंग स्टाइल के लिए जाना जाता है. उन्होंने देखा कि कंपनी में अंदरूनी फ्रॉड जरूर हुआ था, लेकिन इसके प्रोडक्ट्स और मार्केट शेयर अभी भी मजबूत थे. जैसे –
- रेलवे मोटर्स और ट्रांसफॉर्मर में बड़ी हिस्सेदारी थी.
- इंडस्ट्रियल मोटर्स में वर्ल्ड क्लास की तकनीक थी
- बेहद कुशल इंजीनियरिंग वर्कफोर्स थी
टर्नअराउंड की रणनीति: कैसे बदली किस्मत?
CG Power को मुरुगप्पा ग्रुप ने खरीद तो लिया, अब चुनौती थी उसे सुधारने की. तो कंपनी के लिए सबसे पहले तीन लक्ष्य तय किए गये
1- गवर्नेंस, भरोसा बहाल करना
नए मैनेजमेंट ने सबसे पहले पिछले पांच साल के खातों को दोबारा तैयार किया. नटराजन श्रीनिवासन को MD और CEO नियुक्त किया गया, जो कि खुद एक अनुभवी टर्नअराउंड एक्सपर्ट थे. बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को मज़बूत पोज़ीशन दी गई.
2- कर्ज़ की सफाई
कंपनी ने अपनी मुंबई के कांजुरमार्ग में स्थित ज़मीन को बेचकर एकमुश्त बड़ी रकम जुटाई. नासिक और दूसरी जगहों पर बेकार पड़ी संपत्तियों से भी नकदी आई. इससे बैंकों का कर्ज़ तेज़ी से घटाया गया. ग्रुप ने बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) किया. ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ने करीब 700 करोड़ रुपये का निवेश किया और बैंकों को उनके कर्ज का एक हिस्सा चुकाकर कंपनी को कर्ज मुक्त बनाने की दिशा में काम किया.
3- ऑपरेशनल दक्षता
मैनेजमेंट ने उन ऑपरेशंस और विदेशी यूनिट्स को बंद कर दिया जो घाटे में चल रहीं थी. कंपनी का पूरा ध्यान भारतीय बाजार और रेलवे सेक्टर पर केंद्रित किया गया. सप्लाई चेन को सुधारा गया जिससे वर्किंग कैपिटल की लागत कम हुई. CG Power जो ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, मोटर और रेलवे इक्विपमेंट बनाती है, ऑर्डर बुक बढ़ने लगा.
फ्यूचर पर दांव लगा रही कंपनी
CG Power सिर्फ अपनी पुरानी साख पर नहीं टिकी है, बल्कि ये फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है, वहां भारी निवेश कर रही है.
- सेमीकंडक्टर प्लांट
मुरुगप्पा ग्रुप और CG Power ने गुजरात के साणंद में एक सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (OSAT) फैसिलिटी लगाने जा रही हैं. ये कदम कंपनी को सिर्फ एक इंजीनियरिंग कंपनी से बदलकर फ्यूचर टेक की दुनिया में जगह दिलाएगा. - इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
कंपनी EV मोटर्स और ड्राइव कंट्रोलर्स पर भारी निवेश कर रही है. कंपनी हाई-एफिशिएंसी इलेक्ट्रिक मोटर्स डेवलप कर रही है. इसमें PMSM (Permanent Magnet Synchronous Motors) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जो भारतीय हालातों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. साथ ही, मोटर को चलाने वाले स्मार्ट कंट्रोलर्स का काम भी अंतिम चरण में है. - रेलवे और वंदे भारत
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और ‘वंदे भारत’ जैसी ट्रेनों के विस्तार में CG Power के प्रोपल्शन सिस्टम और मोटर्स की भारी मांग है. कंपनी ने ‘वंदे भारत’ ट्रेनों के लिए मोटर और कोच इक्विपमेंट के बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं. यह कंपनी को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में देश के सबसे बड़े खिलाड़ियों के बराबर खड़ा करता है.
CG Power वही कंपनी है जिसका शेयर 2019-20 में सिंगल डिजिट में आ गया था, अब 800 रुपये के पार ट्रेड कर रहा है. CG Power की यह कहानी कुछ सबक देती है. वो ये कि गवर्नेंस ही असल नींव है. सही हाथों में आई कंपनी कमाल कर सकती है. मुरुगप्पा ग्रुप ने CG Power को ₹846 करोड़ मार्केट कैप में खरीदा, यह एक ऐसा दांव था जिसे तब सही नहीं कहा जा रहा था, लेकिन ग्रुप के पास न सिर्फ पूंजी थी, बल्कि एक साफ और अनुशासित संस्कृति भी थी.
एक और सबक ये कि डिस्ट्रेडस्ड एसेट्स में सबसे बड़े अवसर छुपे होते हैं, जब सब भाग रहे थे, मुरुगप्पा ग्रुप ने खरीदा. निवेशकों के लिए यह याद रखने वाली बात है, हर घोटाले से घिरी कंपनी बर्बाद नहीं होती; अगर बिज़नेस का मूल ढांचा मजबूत हो, तो नया मैनेजमेंट चमत्कार कर सकता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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