EMS यानी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों की जबरदस्त डी-रेटिंग हुई है जिसकी वजह से इनके PE ऐतिहासिक रूप से काफी नीचे आ चुके हैं। चाहे वो डिक्सन टेक्नोलॉजी हो, Kaynes Technology हो. ये अपने पीक PE से 50-60% तक नीचे आ चुकी हैं। तो क्या ये मान लिया जाए कि ये अपनी फेयर प्राइस पर आ गई हैं या फिर ये एक वैल्यू ट्रैप है, ये स्टॉक अब भी बहुत महंगे हैं।
PE गिरने का मतलब हर बार सस्ता नहीं होता
एक बात ये समझ लीजिए कि ऊंचा PE होने का मतलब हमेशा वैल्युएशन ज्यादा होना और कम PE का मतलब हमेशा सस्ता शेयर नहीं होता। इसको तय करने के लिए बाकी रेश्यो और पैरामीटर्स भी देखना चाहिए। इन सभी स्टॉक्स को एक साथ ये बताना कि इनकी वैल्युएशन सही है या ये एक वैल्यू ट्रैप है, एक आर्टिकल में तो मुश्किल है, लेकिन किसी एक स्टॉक को लेकर मैं समझाने की कोशिश करता हूं। इसके बाद आप बाकी स्टॉक्स को लेकर खुद फैसला कर पाएंगे।
| Stock | Peak PE | Current PE |
| Dixon Technologies | 215 | 55 |
| PG Electroplast | 140 | 66 |
| Syrma SGS Technology | 105 | 60 |
| Avalon Technologies | 232 | 69 |
| Kaynes Technology | 200 | 65 |
| Amber Enterprises | 142 | 100 |
EMS सेक्टर की डीरेटिंग
साल 2020–2024 का समय EMS सेक्टर के लिए काफी गहमागहमी वाला रहा है। भारत सरकार ने PLI स्कीम्स की शुरुआत की ताकि देश में ही इलेक्ट्ऱॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा सके। चीन प्लस वन की चर्चा ने जोर पकड़ा। चीन जो कि पूरी दुनिया के लिए इलेक्ट्ऱॉनिक्स का हब है, कहा गया कि भारत अब उसका एक बड़ा हिस्सा लेगा। यही वो समय था, जब देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बूम देखने को मिला। इन्हीं सब कारणों से EMS सेक्टर को लेकर देश और शेयर बाजार में बहुत ज्यादा ग्रोथ की उम्मीदें बन गईं थीं।
इसी दौरान सबका चहेता डिक्सन टेक्नोलॉजी का प्राइस-टू-इक्विटी रेश्यो (PE) अपने उफान पर था। 2024 में PE 180-200 तक निकल गया था। मगर, अब ये अपने पीक PE से 75% नीचे फिसल चुका है। फिलहाल इसका PE 50-55 के करीब है। तो क्या ये सस्ता हो चुका है या फिर एक वैल्यू ट्रैप है। वैल्यू ट्रैप का सीधा-सीधा मतलब ये हुआ कि आज कोई स्टॉक अपने पीक से काफी नीचे आ गया, वैल्युएशन आकर्षक हो गई, लेकिन भविष्य में ये कोई प्रॉफिट बनाकर नहीं दे पाए तो ये एक वैल्यू ट्रैप है। मतलब दिख सस्ता रहा है, लेकिन भविष्य का अता-पता नहीं है।
यानी सिर्फ PE के गिरने से ये तय कर लेना कि स्टॉक सस्ता हो गया, बहुत बड़ी गलती है। देखिए, जब अक्टूबर 2024 में डिक्सन का PE अपने पीक पर था, तब इसका प्राइस 15,300 रुपये पर था। इसके बाद इस शेयर ने 25 सितंबर, 2025 को NSE पर 18,471 रुपये का रिकॉर्ड हाई बनाया. लेकिन अब ये उस रिकॉर्ड हाई से 35-36% तक टूट चुका है। इसका PE आजकल 50-55 है, जो कि औसतन 90-100 के बीच हुआ करता था, हालांकि कुछ लोगों को ये इस स्तर पर भी महंगा लग सकता है, लेकिन सिर्फ PE के दम पर स्टॉक के महंगा-सस्ता होने का फैसला करना अधूरा है। इसके साथ हमें कुछ फैक्टर्स और भी देखना चाहिए।
PEG
जब हम इसके PEG पर नजर डालते हैं तो ये 0.94 है या 1 के आस-पास है। यानी अर्निंग ग्रोथ के मुकाबले इसकी प्राइसिंग सही लगती है। जब PEG 1 या इससे कम होता है तो हम ये मान लेते हैं कि स्टॉक की वैल्युएशन अर्निंग ग्रोथ के मुकाबले वाजिब है, 1 से ज्यादा होने पर हम इसको ओवरवैल्यूड मानते हैं।
EPS ग्रोथ
अब PE, PEG के साथ ही EPS ग्रोथ को देखना भी जरूरी है। अगले 2–3 साल में EPS CAGR 25–30% है तो वैल्युएशन वाजिब है। अगर ये 20% से कम है तो वैल्यू ट्रैप का खतरा बढ़ जाता है। जहां तक डिक्सन की बात है तो पिछले तीन साल में EPS CAGR करीब 55–60% रहा है, जो कि काफी अच्छा है। एक बात हमेशा याद रखें कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में PE तभी टिकता है जब प्रॉफिट तेज़ी से बढ़े, सिर्फ रेवेन्यू नहीं। डिक्सन का TTM प्रॉफिट ग्रोथ 130% से ज्यादा है, जबकि सेल्स ग्रोथ 75% से ज्यादा है।
ROCE/ROE
अब जरा ROCE (Return on Capital Employed) और ROE (Return on Equity) की भी बात कर ली जाए। ROE को ऐसे समझिए कि कोई कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स के निवेश (इक्विटी) पर कितना प्रतिशत प्रॉफिट कमा रही है। ROCE का मतलब, कंपनी ने जितनी भी पूंजी लगाई है, उस कुल पूंजी पर कितना प्रतिशत प्रॉफिट कमा रही है। PE सिर्फ ये बताता है कि शेयर मार्केट क्या उम्मीद कर रहा है, लेकिन ROCE/ROE बताते हैं कि बिज़नेस असल में कितना कमा पा रहा है।
अगर पूंजी सिर्फ लगाई जा रही है लेकिन प्रॉफिट उस अनुपात में नहीं बढ़ रहा है, तो वैल्यू बर्बाद हो रही है, भले ही सेल्स में बढ़ोतरी देखने को मिले। इंडस्ट्री में 18–22% का ROCE स्टेबल माना जाता है। जबकि डिक्सन के मामले में ROCE 40% है। यानी की सेल्स भी बढ़ रही है, प्रॉफिट भी बढ़ा है, साथ ही ग्रोथ वैल्यू भी क्रिएट कर रही है। अगर ROCE लगातार गिर रहा है, तो मतलब ये कि सेल्स तो बढ़ रही है, प्रॉफिट फ्लैट है और कैपेक्स पर पैसा झोंका जा रहा है. ऐसे केस में हमको बाहर से तो ग्रोथ दिखती है, लेकिन अंदर से वैल्यू खराब होती है।
यानी डिक्सन इन सभी पैमानों पर फिट उतरता है। इसलिए ये एक वैल्यू ट्रैप नहीं लगता है। इसी तरह हम बाकियों को भी इन्हीं रेश्यो की कसौटी पर उतारकर ये देख सकते हैं कि PE गिरने के बाद वो वाकई अपनी ग्रोथ के मुकाबले सही कीमत पर हैं, या सस्ते के चश्मे से देखना एक वैल्यू ट्रैप है।
हालांकि ये किसी भी तरह से खरीदने-बेचने की सलाह नहीं है, ये सिर्फ एक एनालिसिस है। शेयरों में निवेश के बारे में कोई भी फैसला अपने निवेश सलाहकार से मशवरा करके ही करें।
Twitter – https://x.com/SumitResearch
Insta – Mehrotra Sumit (@sumitresearch)
Youtube – https://www.youtube.com/@Sumitresearch
Facebook – https://www.facebook.com/sumitresearch/
Blog – https://sumitresearch.com/
Disclaimer: The information provided in this response is for informational and educational purposes only. It does not constitute financial, investment, or professional advice, nor is it a recommendation to buy, sell, or hold any securities, stocks, or investments. Always consult with a qualified financial advisor or conduct your own research before making any investment decisions. Past performance is not indicative of future results, and all investments involve risk, including the potential loss of principal.
















Leave a Reply