बजट में अभी STT के झटके से बाजार उबरा भी नहीं है, एक और झटका बाजार को लग गया गया है, यही वजह है कि आज BSE, MCX, Groww, Angel One के शेयर 5% से 10% तक टूटे हुए हैं. कारण सिर्फ एक है, रिजर्व बैंक का वो फैसला जिसमें बैंकों की कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) जैसे ब्रोकर्स को लोन देने के नियमों को सख्त कर दिया गया है. अब नियम ये है कि ब्रोकर्स को दी जाने वाली सभी क्रेडिट फैसिलिटी पूरी तरह से सिक्योर्ड आधार पर ही दी जाएंगी. ये नियम कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज जैसे स्टॉक और कमोडिटी ब्रोकर्स पर 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, इसी खबर का असर है कि BSE, MCX, Groww, Angel One में भारी गिरावट देख रहे हैं.
समझिए RBI का नया रूल
आसान भाषा में ऐसे समझिए कि पहले ब्रोकर बैंक गारंटी हासिल करने के लिए 50% रकम फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में देते हैं और बाकी आधे हिस्से को निजी या कॉर्पोरेट गारंटी जो कि प्रमोटर या कंपनी की गारंटी होती थी, उससे कवर कर लेते हैं. रिजर्व बैंक ने इसी चीज को खत्म कर दिया है और कहा है कि 1 अप्रैल से सभी फंडिंग को 100% सिक्योर्ड होना अनिवार्य होगा. मतलब ये कि कॉर्पोरेट या निजी गारंटी से का नहीं चलेगा, बल्कि पूरी रकम कैश, फिक्स्ड डिपॉजिट, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज या दूसरी अप्रूव्ड एसेट्स से ही कवर करनी होगी. यानी अगर बैंक ब्रोकर को 100 रुपये का लोन देता है, तो ब्रोकर को बैंक को 100 रुपये के बराबर कोलैटरल देना होगा, ये कैश, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़, अप्रूव्ड एसेट्स या प्रॉपर्टी वगैरह हो सकती हैं.
बैंक गारंटी के लिए नए नियम
इसके अलावा, RBI के नए नियम के मुताबिक बैंक ब्रोकर्स या प्रोफेशनल क्लियरिंग मेंबर्स की तरफ से गारंटी जारी कर सकते हैं, जो स्टॉक एक्सचेंज या क्लियरिंग हाउस के पक्ष में होती है. ये गारंटी सिक्योरिटी डिपॉजिट या मार्जिन रिक्वायरमेंट के बदले दी जाती है. ऐसी किसी भी गारंटी के लिए कम से कम 50% कॉलेटरल होना जरूरी है और उसमें से 25% हिस्सा कैश के रूप में होना चाहिए.
इसको उदाहरण से समझिए- अगर एक्सचेंज ने ब्रोकर से 1 करोड़ रुपये की गारंटी मांगी है, तो ब्रोकर को बैंक को कम से कम 50 लाख रुपये का कॉलेटरल देना होगा, इसका 50% यानी 25 लाख कैश में होने चाहिए. मतलब 25 लाख रुपये तो ब्रोकर के फंसे रहेंगे.
प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक गारंटी पर सख्ती
एक और बात, RBI ने साफ किया है कि ब्रोकर्स को बैंक से पैसा नहीं मिलेगा अगर वो उससे अपने अकाउंट पर सिक्योरिटीज खरीदने या प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग/निवेश करने वाले हैं. रिजर्व बैंक का साफ कहना है कि बैंक का पैसा ब्रोकर्स के स्पेकुलेटिव या प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग में नहीं लगना चाहिए, सिर्फ मार्केट को सपोर्ट करने वाले काम के लिए इस्तेमाल होना चाहिए. मगर, RBI ने प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक गारंटी पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है, ब्रोकर एक्सचेंज जैसे NSE, BSE को मार्जिन/सेटलमेंट के लिए गारंटी दे सकता है, लेकिन शर्तें सख्त कर दी हैं.
क्या हैं शर्तें: गारंटी के लिए ब्रोकर को बैंक को 100% कॉलेटरल देना होगा, और वो सिर्फ हाई-क्वालिटी चीजों से, कैश, कैश जैसी एसेट्स, या सरकारी बॉन्ड्स होना चाहिए. इसमें 50% से ज्यादा कैश में ब्लॉक करना पड़ेगा. मतलब ब्रोकर को अपनी तरफ से बहुत सारा कैश बैंक में जमा या लॉक करना होगा. बाकी 50% कैश इक्विवेलेंट्स या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर ब्रोकर डिफॉल्ट करता है, तो बैंक को तुरंत कैश से रिकवर हो सके.
एक डेटा बताता है कि पिछले साल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इक्विटी ऑप्शन्स टर्नओवर में प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स का हिस्सा 50% से ज्यादा था. कैश इक्विटी ट्रेडिंग में इनका हिस्सा 21 साल के उच्च स्तर पर पहुंचकर करीब 30% हो गया था. इस नए नियम के बाद मार्केट पार्टिसिपेंट्स को डर है कि इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम्स पर बुरा असर पड़ेगा.
इसका आपके लिए क्या मतलब है?
नियम आपने पढ़ लिए, अब एक-एक करके समझिए कि इसका आप पर क्या असर होगा? अगर आप मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए चीजें 1 अप्रैल, 2026 से कैसे बदल जाएंगी.
- लेवरेज घटेगा: RBI ने बैंकों की ओर से ब्रोकर्स को दिए जाने वाले लोन पर सख्ती बढ़ाई है. इससे ब्रोकर्स के फंड की कमी हो जाएगी तो वो MTF की सुविधा भी कम देगा, जिसका असर आपके लेवरेज पर पड़ेगा, यानी अभी तक आप 3 गुना या 4 गुना लेवरेज ले पा रहे थे, वो कम हो जाएगा
- ब्रोकर्स का कॉस्ट ऑफ फंड्स बढ़ेगा: अब 100% फुल सिक्योर्ड गारंटी देनी होगी. 50% कॉलेटरल और उसमें से 25% हिस्सा कैश के रूप में होना चाहिए, नतीजा ब्रोकर्स के लिए कॉस्ट ऑफ फंड्स बढ़ जाएगा, तो वो आपको भी क्या ही देगा.
- मार्जिन कॉल जल्दी ट्रिगर होगा: इससे होगा ये कि ब्रोकर्स को ज्यादा कैश बैंकों में देकर रखना होगा, तो जाहिर है कि उसके पास उतना पैसा नहीं होगा कि वो आपको ज्यादा लेवरेज ऑफर कर सके. यानी अगर आपके प्लेज्ड शेयर तेजी से गिरे तो मार्जिन कॉल जल्दी ट्रिगर होगी, और आपके शेयरों को बेच दिया जाएगा.
- 40% हेयरकट से खरीदारी क्षमता घटेगी: RBI के नए नियम के मुताबिक इक्विटी शेयर्स को कॉलेटरल में इस्तेमाल करने पर 40% हेयरकट लगेगा. इसको ऐसे समझिए. आपने 1 लाख रुपये के शेयर प्लेज किए, पहले मार्जिन 75,000-80,000 रुपये तक हो जाता था, लेकिन अब 40% हेयरकट की वजह से घटकर सिर्फ 60,000 कर दिया गया है. यानी आपकी खरीदारी की ताकत पहले के मुकाबले काफी घट जाएगी.
















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