OLA Electric के शेयर इस वक्त टॉप गियर में हैं. अप्रैल के महीने में अबतक इसमें 73% की तेजी आ चुकी है. 10 अप्रैल, शु्क्रवार को भी ओला के शेयरों में 5% से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है. 16 मार्च 2026 को OLA Electric का शेयर 22.25 रुपये के 52वीक लो पर था, उस वक्त हर तरफ एक ही बात थी कि क्या यह कंपनी अपनी गलतियों से उबर पाएगी? लेकिन 9 अप्रैल को यही शेयर 20% अपर सर्किट लगाकर 36.32 रुपये पर बंद हुआ. शेयर ने 16 फरवरी के बाद पहली बार 6 अप्रैल को 30 रुपये का स्तर पार किया. इसके बाद ही ओला के शेयरों ने फर्राटा रफ्तार पकड़ी है. बीते कई महीनों से ओला इलेक्ट्रिक के शेयर निचले स्तरों पर गोते लगा रहा था, लेकिन अप्रैल के महीने में अबतक कुल 7 सेशन हुए हैं, जिसमें 6 सेशन में ओला के शेयरों में तेजी देखने को मिली है. बीते 3 ट्रेडिंग सेशन में ओला का शेयर 37% तक चढ़ा है.

ओला के शेयरों में तेज़ी के क्या मायने?
अब इन सबका क्या मतलब निकाला जाए, क्या ओला के बुरे दिन खत्म हो गए, सर्विस, प्रॉफिटिबिलिटी और कैश बर्न को लेकर सारी समस्याएं अचानक से खत्म हो गईं. क्या ओला में अब एंट्री करने का मौका आ गया है. इस सवाल का जवाब इतना सीधा नहीं है. भले ही, अक्टूबर से शुरू हुए लगातार 6 महीनों तक घाटे का सिलसिला देखने के बाद अब इसमें मजबूत सुधार के संकेत दिख रहे हैं. मगर, इस दौरान शेयर की वैल्यू में 85% की भारी गिरावट आई थी, जिससे निवेशकों के मन में घोर निराशा भर गई थी. ओला का शेयर अब भी अपने इश्यू प्राइस 76 रुपये से काफी नीचे है. निवेशकों ने कमजोर वॉल्यूम, गिरते मार्केट शेयर को लेकर चिंताओं को झेला है, कंपनी बहुत ज्यादा कैश झोंक रही थी और मुनाफे का दूर-दूर तक कोई संकेत नहीं मिल रहा था. प्रोजेक्ट्स कब शुरू होंगे इसे लेकर भी कन्फ्यूजन था. इसलिए ओला में हाथ जला चुके निवेशकों का भरोसा वापस लौटना उतना आसान नहीं होगा, ये बीते कई महीनों का घाव है, भरने में वक्त लगेगा.
क्या इस तेज़ी पर भरोसा कर सकते हैं?
इसलिए अगला सवाल ये कि ओला के शेयरों में बीते कुछ सेशन से हम जो तेजी देख रहे हैं, क्या वो टेम्पररी है या फिर वाकई में एक टिकाऊ रिबाउंड है, और यहां से ओला की गाड़ी सारे स्पीडब्रेकर को पार करते हुए अपनी पुरानी साख को हासिल कर पाएगी. इस सवाल का जवाब इस बात में छिपा है कि ये तेजी जिन वजहों से आई है, वो कितने मजबूत और टिकाऊ हैं.
वजह नंबर 1: गाड़ियों की बिक्री में 150% की तेज़ी
फरवरी 2026 में ओला के रजिस्ट्रेशन काफी गिर गए थे, लेकिन मार्च के आखिरी हफ्ते में कंपनी ने जबरदस्त वापसी की है. 1 अप्रैल को OLA Electric ने एक बिजनेस अपडेट दिया जिसने सेंटीमेंट्स को बदलकर रख दिया. मार्च 2026 में कंपनी की गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 10,117 यूनिट रहा है, जबकि फरवरी में ये सिर्फ 3,973 यूनिट था.यानी एक महीने में 150% से ज्यादा की ग्रोथ रही. मार्च के आखिरी हफ्ते में तो रोज़ाना 1,000 से ज्यादा ऑर्डर आ रहे थे. इसके साथ ही कंपनी ने एक और बड़ा दावा किया, वो ये कि OLA Electric भारत का पहला EV ब्रांड बन गया जिसने 10 लाख यानी 1 मिलियन कम्युलेटिव रजिस्ट्रेशन को पार किया है.
वजह नंबर 2: PLI सर्टिफिकेशन का मिलना
3 अप्रैल 2026 को ओला इलेक्ट्रिक के ‘Roadster X+’ मॉडल को भारत सरकार की PLI यानी Production Linked Incentive स्कीम के तहत सर्टिफिकेशन मिला. ये इस पोर्टफोलियो की पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल है, जिसे ये सर्टिफिकेट मिला है. इससे कंपनी को प्रति यूनिट इनसेंटिव मिलेगा, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन सुधरेगा. मोटा-मोटा समझें तो PLI सर्टिफिकेशन का मतलब है सरकारी मान्यता और लागत में कमी, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है. अब ये चीज ओला के ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है, इससे कंपनी को अपनी बिक्री को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
वजह नंबर 3: मेड इन इंडिया LFP बैटरी सेल
कंपनी स्वदेशी सेल के उत्पादन पर तेजी से काम कर रही है. पहले ओला बैटरी सेल बाहर से इंपोर्ट करती है, सबसे ज्यादा चीन से इंपोर्ट होता था. ई-स्कूटर और ई-बाइक की लागत का 40% हिस्सा होता है. मगर, पिछले एक साल के दौरान ओला इलेक्ट्रिक ने अपनी स्वदेशी 4680 भारत सेल के उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है. खुद के सेल बनाने से बैटरी की लागत में भारी कमी आई है
7 अप्रैल को कंपनी ने अपना इन-हाउस LFP 46100 फॉर्मेट बैटरी सेल रेडी होने का ऐलान किया. जो मौजूदा NMC 4680 Bharat Cell से बड़ा है. यह एक तरह की लिथियम-आयन बैटरी है, लेकिन इसमें कोबाल्ट या निकेल की जगह आयरन और फॉस्फेट का इस्तेमाल होता है. जो कि ज्यादा सुरक्षित और सस्ती है क्योंकि इसमें कोबाल्ट नहीं होता. अगली तिमाही से इस सेल का गाड़ियों में इस्तेमाल शुरू होगा. कंपनी को भरोसा है कि LFP केमिस्ट्री अपनाने से वाहनों की लागत घटेगी और EV को ज्यादा से ज्यादा लोग अपनाएंगे.
साथ ही, इस नए सेल फॉर्मेट से बैटरी स्टोरेज सॉल्यूशंस को भी सपोर्ट मिलेगा, जो गीगाफैक्ट्री में अगले चरण के विस्तार की नींव बनेगा. ओला अपनी गिगाफैक्ट्री की उत्पादन क्षमता को 2.5 GWh से बढ़ाकर 6 GWh तक ले जाने की तैयारी कर रही है. जो वर्टिकल इंटीग्रेशन के जरिए लागत को और नीचे लाने में मदद करेगा. ये कंपनी के लिए लंबी अवधि में एक पॉजिटिव सेंटीमेंट है.
वजह नंबर 4: ₹60,000 का सरप्राइज कट
अपनी गीगाफैक्ट्री में 4680 भारत सेल का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन और वर्टिकल इंटीग्रेशन इन सबका फायदा ओला ने अपने ग्राहकों को दिया. कंपनी ने Roadster X+ पर 60,000 रुपये की कटौती का ऐलान किया. Roadster X+ 9.1 kWh की कीमत ₹1,89,999 से घटकर ₹1,29,999 हो गई है. हालांकि ये कटौती कितने ग्राहकों को खींचकर लाती है, उसकी सफलता का अंदाजा तभी लगाया जा सकता है. इसलिए इस पर तुरंत कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी.
वजह नंबर 5: सर्विस संकट का हल
ओला इलेक्ट्रिक ने अपनी सर्विस के लिए हमेशा तीखी आलोचनाएं झेली हैं, निवेशकों के मन में भी ओला की सर्विस को लेकर हमेशा निगेटिव सेंटीमेंट्स ही रहे हैं, जिसका असर कंपनी की प्रतिष्ठा और शेयर पर पड़ा है. मगर, कंपनी ने बीते दिनों एक दावा किया, वो ये कि अब 80% गाड़ियों की सर्विस उसी दिन पूरी की जा रही है. पार्ट्स जो अक्सर नहीं मिलते थे और गाड़ियां महीनों तक धूल खाती थीं, ये दिक्कत दूर कर ली गई है. जिससे ग्राहकों का भरोसा वापस लौट रहा है. हालांकि ये कंपनी का दावा है, ज़मीनी स्तर पर इसकी हकीकत कुछ दिनों में सामने आ जाएगी. मगर, इसने निवेशकों के सेंटीमेंट्स पर असर ज़रूर डाला है.
क्या ओला में अब खरीदारी का मौका है?
ओला को लेकर जो भी कुछ हो रहा है, ये एक पॉजिटिव संकेत हैं कि आखिरकार ओला इलेक्ट्रिक चुनौतियों से निपटने में और खराब व्यवस्थाओं को सुधारने में कामयाब हो रही है और बाजार भी इस बात को साफ तौर पर मान रहा है. तो अब सवाल यही कि ओला इलेक्ट्रिक में आई तेज़ी के बाद क्या इसमें अब खरीदारी का मौका है. इसे लेकर एनालिस्ट्स का अलग-अलग नज़रिया है.
विनीत बोलिंजकर, रिसर्च हेड, वेंचुरा सिक्योरिटीज
मार्च में टेक्निकल बिकवाली का सबसे खराब दौर शायद खत्म हो चुका है, लेकिन स्टॉक अभी भी कई मूलभूत चुनौतियों से जूझ रहा है, खासकर प्रॉफिटेबिलिटी और कर्ज को प्रभावी ढंग से मैनेज करने के मोर्चे पर. हम अब ‘क्राइसिस’ वाले फेज से निकलकर ‘शो-मी’ फेज में प्रवेश कर चुके हैं. मगर, निवेशक को सलाह है कि Q1 FY27 के नतीजे आने तक इंतजार करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा.

अंबरीश बालिगा, मार्केट एक्सपर्ट
पिछले महीने के टर्नअराउंड आंकड़ों के बाद ओला इलेक्ट्रिक पर मेरा नजरिया सतर्क रूप से सकारात्मक है. अगर यह ग्रोथ बनी रही, तो नजरिया सकारात्मक बना रहेगा और ये कंपनी के लिए अच्छा संकेत है. कंपनी ने अपने ऑपरेशंस को बेहतर बनाया है, आउटलेट्स की संख्या बढ़ाने और सर्विस क्वालिटी सुधारने दोनों में. गीगाफैक्ट्री के जरिए हासिल की गई बैकवर्ड इंटीग्रेशन एक और पॉजिटिव कदम है. इनवर्टर लॉन्च भी एक बड़ा पॉजिटिव कदम है. मुझे लगता है कि इनवर्टर बिजनेस ओला के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.

हरीश जुजारेय, AVP, टेक्निकल इक्विटी रिसर्च हेड, Prithvi Finmart
ओला इलेक्ट्रिक का स्टॉक डेली चार्ट पर ₹34 के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस को मजबूती से तोड़ चुका है, जिससे इंट्राडे ब्रेकआउट की पुष्टि हुई है. अब स्टॉक में अगली तेजी ₹40-41 के जोन (200-डे मूविंग एवरेज) तक जा सकती है. ट्रेडर्स को सलाह है कि मौजूदा स्तरों पर आंशिक प्रॉफिट बुकिंग कर लेनी चाहिए और बची हुई पोजीशन्स को ₹40 के टारगेट के लिए होल्ड रखना चाहिए. हालांकि चेतावनी भी है कि वर्तमान स्तरों पर नई खरीदारी से बचना चाहिए क्योंकि शॉर्ट-टर्म RSI 20 से तेजी से बढ़कर 73 पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट स्थिति को दिखा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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