अदाणी ग्रुप के सुनहरे दिन एक बार फिर से वापस आ रहे हैं. बीते कुछ समय से ग्रुप के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. अदाणी ग्रुप की सभी 10 कंपनियां अपने साल के निचले स्तरों से 13% से लेकर 70% तक ऊपर हैं. अदाणी पावर, अदाणी ग्रीन एनर्जी, अदाणी पोर्ट्स, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है.
2023 में हिंडनबर्ग के तूफान से निकलने के बाद अब अदाणी ग्रुप कंपनियों को लेकर एक के बाद एक कई पॉजिटिव खबरें आई हैं, जिससे इन्वेस्टर सेंटीमेंट काफी सुधरा है और जिनका असर हमने शेयरों पर देखा है, जिससे अदाणी ग्रुप कंपनियों का मार्केट कैप 16 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया. 8 अप्रैल को एक दिन में ही ग्रुप की मार्केट कैप में करीब 96,000 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ. साल 2023 में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अदाणी ग्रुप कंपनियों के शेयरों की जमकर पिटाई हुई थी, अब यही शेयर नई ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद से अदाणी ग्रुप ने जनवरी 2023 से अब तक 33 अधिग्रहण पूरे किए, जिनकी कुल कीमत करीब 80,000 करोड़ रुपये है. हम यहां पर अदाणी ग्रुप के लिए बीते कुछ दिनों में आई ऐसी ही खबरों का जिक्र करने जा रहे हैं, जिसने पूरे ग्रुप में एक नया जोश भर दिया है. ये राहत की बात उन निवेशकों के लिए भी है जो हिंडनबर्ग की गिरावट के बाद थोड़ा सहम गए थे.


1: US कोर्ट से बड़ी राहत
अदाणी ग्रुप के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर आई US डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से. जहां अदालत ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी की उस अर्जी को मंजूर कर लिया, जिसमें US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के फ्रॉड केस को खारिज करने की मांग की गई थी. अदाणी के वकीलों का तर्क है कि SEC का केस कानूनी रूप से कमज़ोर है, कथित रिश्वतखोरी का कोई ठोस सबूत नहीं है और बॉन्ड की बिक्री अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के बाहर हुई थी, इसलिए रेगुलेटर के पास उचित अधिकार क्षेत्र नहीं है. क्योंकि अदाणी कंपनियां भारत में स्थित हैं और जिन बॉन्ड्स का मामला है, वे US एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते. इस खबर के बाद अदाणी ग्रुप की कंपनियों में ज़ोरदार तेजी देखने को मिली, अदाणी ग्रुप की कंपनियों का मार्केटकैप 96,000 करोड़ रुपए बढ़ गया.
क्या था मामला
नवंबर 2024 के करीब अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) और SEC ने गौतम अदाणी और ग्रुप के अन्य अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई थी. इसके अलावा, अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाते समय इन तथ्यों को छुपाकर फ्रॉड किया था.
हालांकि अपनी याचिका में ग्रुप ने ये भी साफ किया है कि उन्होंने निवेशकों को सभी जरूरी जानकारी दी थी और किसी भी तरह की बड़ी जानकारी को छुपाया नहीं गया था.
2: ओडिशा में बड़ा निवेश
अदाणी ग्रुप ने ओडिशा में तीन मेगा प्रोजेक्ट्स शुरू करने का ऐलान किया है, इन प्रोजेक्ट्स पर 33,081 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इन तीन प्रोजेक्ट्स के ऐलान से अदाणी ग्रुप की विस्तार योजनाओं का पता चलता है. जिससे निवेशकों के लिए सेंटीमेंट्स पॉजिटिव होते हैं. ये निवेश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी सिक्योरिटी और मैन्युफैक्चरिंग को नई ताकत देगा. ये ऐलान भी अप्रैल में ही हुआ, जिससे निवेशकों को ग्रुप की एक्सपैंशन और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर भरोसा बढ़ा.
ये हैं वो प्रोजेक्ट्स
कटक के पास थर्मल पावर प्लांट लगाने की योजना है.
निवेश: ₹30,181 करोड़
भुवनेश्वर के इंफो वैली में AI-रेडी डेटा सेंटर लगाने की योजना है
निवेश: ₹800 करोड़
कटक के पास ही सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की योजना है
निवेश: ₹2,100 करोड़
3: JAL प्रोजेक्ट्स का अधिग्रहण
इस बीच अदाणी ग्रुप को एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई. अदाणी एंटरप्राइजेज ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी के बाद जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) यानी जेपी ग्रुप का अधिग्रहण 14,535 करोड़ रुपये में पूरा किया. मार्च 2026 तक JAL पर 57,185 करोड़ का भारी कर्ज था. जेपी ग्रुप (Jaypee Group) के प्रोजेक्ट्स का अदाणी ग्रुप के पास आना, अदाणी ग्रुप की विस्तार रणनीति का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है. खासतौर पर सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ये एक बड़ी खबर है.
डील से अदाणी ग्रुप को क्या मिला?
इस डील के तहत जेपी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी ‘जयप्रकाश एसोसिएट्स’ (JAL) और ‘जयप्रकाश पावर वेंचर्स’ (JPVL) के सीमेंट प्लांट्स, ग्राइंडिंग यूनिट्स और लाइम स्टोन की खदानें अदाणी ग्रुप को मिलेंगी. इन प्लांट्स की कुल क्षमता करीब 9.4 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है. ये प्लांट्स मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मौजूद हैं. इस डील से अदाणी ग्रुप का मध्य भारत में दबदबा बढ़ेगा.
कर्ज में सिर से लेकर पैर तक डूबा जेपी ग्रुप इन प्लांट्स को पूरी क्षमता से नहीं चला पा रहा था. अदाणी ग्रुप के पास कैश की कमी नहीं है, इसलिए वे इन प्लांट्स को आधुनिक बनाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं, जिससे ग्रुप के रेवेन्यू में तुरंत बढ़ोतरी होगी. इस अधिग्रहण के बाद अदाणी ग्रुप की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता बढ़ गई है, जिससे वो भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी ‘अल्ट्राटेक’ (UltraTech) को कड़ी टक्कर दे रहा है.
इसके अलावा NCR में करीब 3,985 एकड़ ज़मीन भी अदाणी ग्रुप को मिली है. Jaypee Greens और Wishtown जैसे प्रीमियम डेवलपमेंट्स के साथ-साथ जेवर में बन रहे Noida International Airport के पास की ज़मीन भी इसमें शामिल है. देखा जाए तो, जेपी ग्रुप के लिए ये डील कर्ज चुकाने का जरिया है, जबकि अदाणी के लिए ये बने-बनाए एसेट्स हासिल करने का मौका है.
4: हाइफा पोर्ट सुरक्षित
ईरान-अमेरिका और इज़रायल के बीच जंग की वजह से इज़रायल में हाइफा पोर्ट का सुरक्षित रहना अदाणी ग्रुप के लिए एक बड़ी राहत की बात है. ताज़ा अपडेट ये है कि हमलों के बावजूद हाइफा पोर्ट पूरी तरह सुरक्षित और चालू है. हालांकि कुछ मिसाइलें शहर के रिहायशी इलाकों के पास गिरी थीं, लेकिन पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
अदाणी ग्रुप ने 2023 में हाइफा पोर्ट का अधिग्रहण किया था. ये ग्रुप का पहला बड़ा इंटरनेशनल पोर्ट है. अगर इसे नुकसान होता, तो ग्रुप के वैल्युएशन और ग्लोबल इमेज पर बुरा असर पड़ता. अदाणी पोर्ट्स एंड SEZ (APSEZ) की हाइफा पोर्ट में 70% हिस्सेदारी है, ये एक जॉइंट वेंचर है जिसमें इज़रायल की Gadot Group के पास 30% हिस्सा है. अदाणी ने यह पोर्ट इज़रायली सरकार से करीब 1.18 बिलियन डॉलर में खरीदा था.
हाइफा पोर्ट इजरायल के इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का एक मेन गेटवे है. युद्ध के समय में भी माल की आवाजाही जारी रहने का मतलब है कि कंपनी के रेवेन्यू पर कोई बहुत रुकावट नहीं आई है.
हाइफा पोर्ट केवल एक बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह प्रस्तावित IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) का एक बेहद अहम पड़ाव है. अगर पोर्ट को बड़ा नुकसान होता, तो इस मेगा प्रोजेक्ट के भविष्य पर सवाल उठने लगते.
5: APSEZ का नया रिकॉर्ड
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ने अप्रैल 2026 में एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जो भारत की पोर्ट इंडस्ट्री के इतिहास में पहले कभी नहीं आया. कंपनी ने FY26 में 500 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो हैंडल करने का रिकॉर्ड बनाया. जो कि पिछले साल के 450 MMT से 11% ज्यादा है. सिर्फ मार्च 2026 में ही APSEZ ने 46 MMT कार्गो हैंडल किया, जो किसी भी एक महीने में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा नंबर है. इसमें कंटेनर ट्रैफिक की ग्रोथ सबसे ज्यादा रही. जो सालाना आधार पर 19% बढ़ी.
APSEZ भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी है. कंपनी के पास 19 पोर्ट्स और टर्मिनल्स हैं, 633 MTPA की कार्गो हैंडलिंग कैपेसिटी है, और यह भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम का करीब 28% हैंडल करती है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, इज़रायल, श्रीलंका और तंजानिया में भी पोर्ट्स हैं.
500 MMT के लक्ष्य को हासिल करने के बाद अब गौतम अदाणी ने अगला लक्ष्य 2030 तक 1 बिलियन टन का रखा है. यानी अगले 4 साल में APSEZ अपनी कार्गो हैंडलिंग को दोगुना करना चाहती है. निवेशकों के लिए ये खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि APSEZ की आय का एक बड़ा हिस्सा लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर बेस्ड है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो अदाणी ग्रुप के लिए 2026 का यह साल अभी तक तो बढ़िया साबित हुआ है. डेटा बताते हैं कि हिंडनबर्ग के तूफान से निकलकर अदाणी ग्रुप आज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है. US कोर्ट से राहत, जेपी ग्रुप का अधिग्रहण, APSEZ का रिकॉर्ड, ओडिशा में मेगा निवेश, एक के बाद एक आ रही इन खबरों ने साबित किया है कि ग्रुप ने मुश्किल वक्त में भी विस्तार की रणनीति नहीं छोड़ी.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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