सोना छुएगा नई रिकॉर्ड ऊंचाई! इस हफ्ते US-ईरान तनाव के अलावा इन डेटा पर रखें नज़र

Gold Poised for Fresh All-Time Highs! US-Iran Conflict and Crucial Economic Data This Week to Decide the Rally

बीते शुक्रवार से वीकेंड तक खबरों की मानों बाढ़ सी आ गई, जो पूरी वीकेंड तक चलती रहीं. पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का राष्ट्रपति ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध बताकर रद्द करना और उसके बाद ट्रंप के बयान और फिर दुनिया पर 15% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाना. ईरान का मसला चल रहा है सो अलग. दोनों देश जंग के मुहाने पर खड़े हैं. खबरों के तूफान के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस हफ्ते और आने वाले हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों पर टिकने वाली हैं, क्योंकि जब दुनिया अपनी धुरी से हिलती है, तो सोने को नई खुराक मिलती है. इसलिए कई एनालिस्ट्स और बैंकर्स ने सोने को लेकर अपने अनुमानों को बढ़ा दिया है.

इस हफ्ते इन डेटा पर रखें ख़ास नज़र

इसके अलावा इस हफ्ते कुछ और डेटा प्वाइंट्स भी रहेंगे, जहां बाजार की नजरें रहेंगी. ये डेटा सोने की कीमतों पर बड़ा असर डालते हैं. ये ब्याज दर, महंगाई और इकोनॉमी की दशा और दिशा दोनों ही बताते हैं.

  • Weekly Jobless Claims: ये डेटा हर गुरुवार को जारी होता है. 26 फरवरी 2026 को ये नया डेटा जारी होगा. ये बेरोजगारी के नए क्लेम्स की संख्या बताता है, जो लेबर मार्केट की सेहत को दिखाता है. पिछली बार 19 फरवरी 2026 को जारी हुआ था, उसमें 2,06,000 नए क्लेम्स दर्ज हुए, जो पिछले हफ्ते के 2,29,000 से 23,000 कम थे. डेटा कम आने का मतबल है कि लेबर मार्केट मजबूत दिख रहा है. यानी कंपनियां कम छंटनी कर रही हैं और इकोनॉमी ग्रोथ अच्छी चल रही है, इससे सोना आमतौर पर कमजोर हो जाता है.
  • US Producer Price Index (PPI): जनवरी 2026 का डेटा 27 फरवरी 2026 को आएगा. ये मैन्युफैक्चरर्स की ओर से बेचे जाने वाले सामान की कीमतों में बदलाव दिखाता है, जो सोने जैसी कमोडिटीज़ पर असर डाल सकता है. दिसंबर 2026 का डेटा 30 जनवरी 2026 को जारी हुआ था. PPI +0.5% रहा था, जो कि अनुमान से ज्यादा रहा था. यानी महंगाई अगर ज्यादा रही तो ब्याज दरें बढ़ने का डर रहता है, जिससे सोने पर निगेटिव असर पड़ता है. कम रही तो सोने पर पॉजिटिव असर पड़ता है.
  • Consumer Confidence Data: 24 फरवरी 2026 को ये डेटा आएगा, ये कंज्यूमर्स के आर्थिक भविष्य के बारे में उनके भरोसे को मापने का पैरामीटर है. पिछली बार जनवरी 2026 में जारी हुआ था. जो कि 12 साल का सबसे निचला स्तर था. अगर ये गिरता है तो इसका मतलब है कि लोग इकोनॉमी को लेकर ज्यादा चिंतित हैं, खर्च कम कर रहे हैं, जॉब्स और कमाई की उम्मीद कम है, मोटा-मोटा स्लोडाउन के संकेत मान सकते हैं. ये स्थिति सोने की कीमतों को सपोर्ट करती है, क्योंकि कमजोर कॉन्फिडेंस से अनिश्चितता बढ़ती है और यही सोने की कीमतों के लिए सबसे जरूरी है.

$6,200 तक जाएगा सोना

सोने की कीमतें इस साल कहां जाएंगी, इसे लेकर UBS ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है. दुनिया में जियो-पॉलिटिकल जोखिमों और बिगड़ते आर्थिक हालातों के चलते UBS ने सोने के लिए नया टारगेट $6,200 प्रति आउंस रखा है. UBS का कहना है कि सोना इस साल के मध्य तक $6,200 तक पहुंच सकता है, फिर इसके बाद इसमें कंसोलिडेशन देखने को मिलेगा और ये दिसंबर तक $5,900 पर आ जाएगा.

Gold Poised for Fresh All-Time Highs

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु बातचीत चल रही है और अमेरिका पर ईरान पर हमले का खतरा मंडरा रहा है, बावजूद इसके सोने की कीमत ज्यादा नहीं बढ़ीं, क्योंकि शायद बाजार ये मानकर चल रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच में कोई कहीं कोई बात बन जाएगी. मगर ऐसा हुआ नहीं.

अब UBS ने सोने को लेकर जो टारगेट दिया है, वो इतना ऊंचा इसीलिए है क्यों कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ गया है. बातचीत के साथ-साथ धमकियों का भी आदान-प्रदान चल रहा है. ट्रंप कह रहे हैं कि 10-15 दिन में ये साफ हो जाएगा कि वो ईरान पर हमला करेंगे या नहीं, जबकि उनकी सेनाएं तेजी से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रही हैं. तो दूसरी ईरान भी जुबानी जवाबी में पीछे नहीं है, उसने भी ये कह दिया है कि अगर अमेरिका ऐसा कुछ भी करता है तो वो मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों को निशाना बनाएगा. अमेरिका मिडिल ईस्ट में बहुत बड़ी तादाद में सैनिक भेज रहा है, जो इस साल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मैडुरो को पकड़ने वाली कार्रवाई से कहीं ज्यादा बड़ा है.

सोने को सपोर्ट करने वाले फैक्टर्स

इससे लगता है कि अमेरिका ईरान के साथ लंबी जंग की तैयारी कर रहा है. अगर ऐसा कुछ हुआ तो ये सोने के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट होगा. UBS के स्ट्रैटेजिस्ट डोमिनिक श्नाइडर कहते हैं कि इक्का-दुक्का जियो पॉलिटिकल घटनाएं बाजार पर हमेशा असर नहीं डालतीं, लेकिन ये अस्थायी उथल-पुथल जरूर पैदा करती हैं. ऐसे में निवेशक सोने जैसी सुरक्षित चीजों में पैसा लगाते हैं.

  • दूसरी तरफ फेड की राहत भी सोने के लिए अच्छी खबर है. UBS को लगता है कि अमेरिकी फेड रेट्स कम करना जारी रखेगा और सितंबर तक दो बार 0.25% कट करेगा. इससे ब्याज दरें कम होंगी और डॉलर भी कमजोर हो सकता है, जो सोने के लिए फायदेमंद है.
  • 2025 में दुनिया भर में सोने की मांग पहली बार 5,000 टन से ज्यादा हो गई थी, और UBS को लगता है कि ये और बढ़ेगी, क्योंकि सेंट्रल बैंक्स खूब सोना खरीद रहे हैं. दूसरी तरफ, सोने की सप्लाई बढ़ नहीं रही. 2028 तक 80 माइंस खत्म हो जाएंगी, तो डिमांड बढ़ने पर भी नया सोना कम आएगा.
  • UBS अपनी रिपोर्ट में कहता है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में 3-5% तक सोना रखना चाहिए. $6,200 का टारगेट देखकर सोना अभी भी बाजार की अनिश्चितताओं से बचाव का सबसे अच्छा तरीका लगता है.
Gold Poised for Fresh All-Time Highs

कुल मिलाकर ये हफ्ता मार्केट की उथल पुथल, खबरों और जियो पॉलिटिकल तनावों से भरा रहने वाला है. लेकिन मेरी नजर में सोना अगर महंगा होता है तो ये खुश होने से ज्यादा चिंता की बात होनी चाहिए, क्योंकि दुनिया में उथल-पुथल किसी भी देश की इकोनॉमी के लिए अच्छा नहीं, वो भी तब जब पूरी दुनिया पहले से ही ट्रेड वॉर की टेंशन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बदलावों से गुजर रही है.

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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