सोमवार के बाद IOC, HPCL, BPCL, GAIL और पेट्रोनेट LNG की आज बुधवार को भी पिटाई जारी है. इन ज्यादातर शेयरों में 3%-6% की गिरावट देख रहे हैं, जबकि पेट्रोनेट LNG का स्टॉक इंट्राडे में 10% से ज्यादा टूटा है. आगे इन स्टॉक्स में क्या होगा, इसे लेकर ब्रोकरेज फर्म Citi ने बुधवार, 4 मार्च को चेतावनी दी है. जिसमें ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे भारत की गैस वैल्यू चेन और अधिक जोखिम में पड़ सकती है.
क़तर एनर्जी ने LNG का उत्पादन रोका!
ये युद्ध मिडिल ईस्ट में गंभीर संकट पैदा कर रहा है, खासकर कतर से भारत को होने वाली LNG सप्लाई पर असर डाल रहा है. सिटी ने अपने नोट में साफ कहा है कि गैस सप्लाई में कमी या असुरक्षा के कारण भारत की एनर्जी कंपनियों के शेयरों पर असर पड़ सकता है. खास तौर पर पेट्रोनेट LNG को वॉल्यूम रिस्क काफी ज्यादा है, क्योंकि कतर ने उत्पादन रोक दिया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शिपिंग पर असर पड़ा है. भारत अपनी LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से इंपोर्ट करता है, जिसे आसानी से बदला नहीं जा सकता.
दुनिया के सबसे बड़े LNG उत्पादकों में से एक कतर एनर्जी ने युद्ध की वजह से उत्पादन पूरी तरह रोक दिया है, सिर्फ LNG का ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े दूसरे उत्पादों का भी प्रो़डक्शन रुक गया है.
इसका नतीजा ये हुआ है कि कतर एनर्जी ने अपने खरीदारों जैसे पेट्रोनेट LNG के साथ फोर्स मेज्योर क्लॉज (Force Majeure clause) लागू कर दिया है.
अब Force Majeure clause क्या होता है? ये कॉन्ट्रैक्ट में लिखा हुआ एक नियम होता है, जो ये कहता है कि अगर कोई बहुत बड़ी और अप्रत्याशित घटना हो जाए जैसे की युद्ध जैसे हालात, बाढ़, भूकंप या किसी दूसरी तरह की आपदा आ जाए, जिससे कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करना मुश्किल हो जाए, तो किसी भी पार्टी को सजा या जुर्माना नहीं देना पड़ेगा. आसान शब्दों में जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, ऐसा जरूरी नहीं.
LNG इंपोर्ट पर ज्यादा निर्भरता से बढ़ी मुश्किल!
अब कतर एनर्जी ने तो पेट्रोनेट LNG के साथ फोर्स मेज्योर क्लॉज लागू कर दिया तो, पेट्रोनेट LNG ने भी आगे के अपने खरीदारों GAIL, इंडियन ऑयल (Indian Oil) और BPCL को इसी तरह का फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है. सिटी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कतर भारत के LNG इंपोर्ट का करीब 40% से 50% हिस्सा सप्लाई कर रहा है, जिसे पूरी तरह से बदलना बहुत मुश्किल होगा, खासकर ग्लोबल गैस कीमतों में आई तेज उछाल को देखते हुए तो ऐसा करना बहुत मुश्किल है.
अब समस्या यहां है, सिटी का मानना है कि पेट्रोनेट LNG के लिए वॉल्यूम रिस्क काफी बढ़ सकता है, क्योंकि कतर से आने वाला LNG कंपनी के कुल वॉल्यूम का लगभग 50% हिस्सा है. यानी कि अगर कतर की सप्लाई रुक गई या कम हो गई, तो कंपनी को बहुत ज्यादा LNG खरीदने में दिक्कत होगी, इसलिए कंपनी के लिए वॉल्यूम का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा.
सिटी का अनुमान है कि शॉर्ट टर्म LNG सप्लाई में बाधा का काफी बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे कीमतें $14 से $18 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (mmbtu) तक पहुंच सकती हैं. अगर ये दिक्कत तीन महीने तक चली, तो कीमतें $30 प्रति mmbtu तक बढ़ सकती हैं.
किन शेयरों पर कितना असर पड़ेगा?
GAIL के लिए सिटी का कहना है कि हालांकि इसके गैस ट्रांसमिशन वॉल्यूम जोखिम में पड़ सकते हैं, लेकिन कुछ हिस्से की भरपाई हो सकती है, क्योंकि कंपनी का पोर्टफोलियो डायवर्सिफाइड है. गैस ट्रेडिंग में मार्जिन ज्यादा हो सकते हैं, LPG और पेट्रोकेमिकल बिजनेस में फायदा होने की उम्मीद है.
- रिलायंस इंडस्ट्रीज को लेकर सिटी का अनुमान है कि कंपनी को अपने ऑयल-टू-केमिकल्स बिजनेस (O2C) में फायदा हो सकता है, क्योंकि इसके रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत हैं, खासकर डीजल के मजबूत मार्जिन की वजह से.
- सिटी का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा पहुंचेगा, बशर्ते सरकार की ओर से विंडफॉल टैक्स दोबारा नहीं लगाया गया. तब ONGC जैसी कंपनियों ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है.
- मगर, दूसरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों HPCL, BPCL और IOC को मार्जिन में दबाव झेलना पड़ सकता है.
- सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स की बात करें तो गुजरात गैस को हाई रिस्क स्टॉक माना है. कंपनी खास तौर पर जोखिम में है क्योंकि ये काफी हद तक कतर की सप्लाई और स्पॉट LNG पर निर्भर है, जो बहुत ज्यादा कीमतों में उतार-चढ़ाव का शिकार हो सकता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
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