क्रूड में उबाल से कई सेक्टर्स का निकला ‘तेल’, लेकिन इन 8 का नहीं बिगड़ेगा खेल

Crude Oil Surge

अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच चल रही जंग का असर अब बड़ी तेजी के साथ दिखना शुरू हो गया है, सोमवार को कच्चा तेल 30% तक उछल गया. मई के लिए ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स 25% से ज्यादा चढ़कर 117.16 डॉलर प्रति बैरल की ऊंचाई पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड फ्यूचर्स इंट्राडे हाई पर 30% तक उछलकर 119.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.

कच्चा तेल $120 के पास पहुंचा

इज़रायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने से पहले यानी फरवरी 2026 के अंत या मार्च 2026 की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 72-73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी. जनवरी 2026 में यह 67 डॉलर के स्तर पर था, जबकि 2026 के लिए अनुमान औसतन 58-60 डॉलर का था, लेकिन जंग शुरू होने के बाद इसमें तेज उछाल आया, कीमतें तेजी से बढ़कर 77-80 डॉलर और फिर उससे ऊपर चली गईं, अब कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल को भी पार कर सकती हैं, क्योंकि अभी ये 119 के ऊपर घूम रही हैं.

कच्चे तेल में आई इस तेजी ने इससे जुड़ी कंपनियों पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस, टायर, केमिकल्स कुछ ऐसे सेक्टर्स हैं, जिन पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. इसके बारे में हम पहले भी लिख चुके हैं बता चुके हैं, लेकिन आज बात उन सेक्टर्स की करते हैं, जिन पर कच्चे तेल की कीमतों का असर नहीं है या फिर बहुत सीमित है. ये वो सेक्टर्स हैं, जो हो सकता है मार्केट में कमजोरी की वजह से टूटे हुए हों, लेकिन उनके टूटने की मुख्य वजहों में कच्चे तेल का भय शामिल नहीं है. जो सेक्टर्स और स्टॉक्स बताए गए हैं, वो निवेश के लिहाज से नहीं बताए गए हैं, केवल जानकारी के लिए हैं. निवेश का फैसला आप अपने निवेश सलाहकार से पूछकर ही करें.

IT सर्विसेज़
कच्चे तेल की कीमतों का असर IT सर्विसेज पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इनका रेवेन्यू सॉफ्टवेयर सर्विसेज़, डिजिटल प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग से आता है. इसका कच्चे तेल की कीमतों से कोई लेना देना नहीं होता है. इन कंपनियों के लिए कच्चे माल जैसी कोई बड़ी कमोडिटी लागत नहीं होती, बल्कि उनका सबसे बड़ा खर्च कर्मचारियों की सैलरी और टैलेंट पर होता है. इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का इनकी लागत या मुनाफे पर लगभग कोई सीधा असर नहीं पड़ता.
जैसे – TCS, Infosys और HCLTech

फार्मा सेक्टर
फार्मा सेक्टर भी कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित है. क्योंकि दवाओं के कच्चे माल में पेट्रोकेमिकल्स की हिस्सेदारी सीमित होती है, इसके अलावा दवाओं की ग्लोबल डिमांड हमेशा बनी रहती है, इसलिए इन कंपनियों की कमाई भी स्टेबल रहती है. साथ ही डॉलर में एक्सपोर्ट से फायदा होता है.
जैसे- सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला

बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज
बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टर की कंपनियों का बिज़नेस मुख्य रूप से क्रेडिट ग्रोथ, ब्याज दरों और एसेट क्वालिटी पर निर्भर करता है. इन संस्थानों की ऑपरेटिंग कॉस्ट या बिज़नेस मॉडल में कच्चे तेल का कोई सीधा रोल नहीं होता, इसलिए क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का इनके खर्चों पर सीधे तौर पर असर नहीं पड़ता. यही कारण है कि आम तौर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टर पर कम असर देखने को मिलता है.
जैसे- SBI, HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank

इंश्योरेंस
इंश्योरेंस कंपनियों की कमाई मुख्य रूप से पॉलिसीहोल्डर्स से मिलने वाले प्रीमियम और उन फंड्स के निवेश से होने वाले रिटर्न पर आधारित होती है. इंश्योरेंस कंपनियों की कमाई में कच्चे तेल का किसी भी तरह से कोई योगदान नहीं होता है. इसलिए क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का इनकी लागत या ऑपरेशन पर कोई डायरेक्ट इम्पैक्ट नहीं होता है. यही वजह है कि आमतौर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का इंश्योरेंस सेक्टर पर असर नहीं होता है.
जैसे- LIC, HDFC Life Insurance

टेलीकॉम
टेलीकॉम सेक्टर में कंपनियों का बिज़नेस नेटवर्क सर्विसेज़, डेटा कनेक्टिविटी और डिजिटल कम्युनिकेशन पर बेस्ड होता है. टेलीकॉम कंपनियां स्पेक्ट्रम खरीदने, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और लगातार कैपेक्स के ज़रिए नेटवर्क को बेहतर बनाने में लगी होती हैं और इनका सबसे बड़ा खर्च भी यहीं पर होता है. इनके कॉस्ट स्ट्रक्चर में कच्चे तेल का या तो कोई रोल नहीं है, अगर है भी तो बहुत ही सीमित, जिसका असर बहुत कम है. जैसे कि टेलीकॉम कंपनियां अपने टावर, डेटा सेंटर्स और बेस स्टेशनों के लिए भारी मात्रा में बिजली इस्तेमाल करती हैं. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें गैस/कोयला/डीजल से जुड़ी बिजली उत्पादन लागत बढ़ा सकती हैं. ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स लागत भी हल्की बढ़ोतरी हो सकती है.
जैसे- Examples: Reliance Jio, Bharti Airtel, Vodafone Idea

असेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs)
कच्चे तेल की कीमतों से एसेट मैनेजमेंट कंपनियां या म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर भी कोई असर नहीं पड़ता है. इनकी कमाई मुख्य रूप से उनके मैनेज किए जा रहे एसेट्स यानी Assets Under Management (AUM) और मार्केट के परफॉर्मेंस पर निर्भर करती है. कंपनियां निवेशकों के पैसे को अलग-अलग फंड्स में निवेश करती हैं और उसी के आधार पर मैनेजमेंट फीस कमाती हैं. इनका बिज़नेस मॉडल पूरी तरह वित्तीय सेवाओं पर आधारित होता है.
जैसे – HDFC Asset Management Company. Nippon Life India Asset Management

FMCG
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का FMCG सेक्टर पर भी कोई बड़ा असर नहीं पड़ता है, खासकर उन कंपनियों पर जहां पैकेजिंग या ट्रांसपोर्टेशन लागत कुल खर्च का छोटा हिस्सा हो. हालांकि पैकेजिंग मैटेरियल जैसे प्लास्टिक और कुछ केमिकल इनपुट क्रूड ऑयल से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इनकी हिस्सेदारी कुल लागत में बहुत सीमित रहती है, इसके अलावा FMCG कंपनियां आमतौर पर बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा प्राइस हाइक या पैक साइज एडजस्टमेंट के जरिए उपभोक्ताओं को ट्रांसफर कर देती हैं. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर भी FMCG सेक्टर की कमाई और मांग पर आम तौर पर उतना असर नहीं देखने को मिलता है.
जैसे – HUL, Nestlé India

मीडिया और एंटरटेनमेंट
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के असर से मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर डायरेक्ट कोई असर नहीं होता है, क्योंकि इनकी लागत खास तौर पर कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म, मार्केटिंग और टैलेंट पर होती हैं. कंपनियों के बिज़नेस मॉडल में उत्पादन और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन ही कोर हैं, जबकि लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च कुल लागत में कम हिस्सा रखते हैं. जैसे – Zee Entertainment Enterprises Ltd., Network18 Media & Investments Ltd., D B Corp Ltd.,

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

Twitter – https://x.com/SumitResearch

Insta – Mehrotra Sumit (@sumitresearch)

Youtube – https://www.youtube.com/@Sumitresearch

Facebook – https://www.facebook.com/sumitresearch/

Blog – https://sumitresearch.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *