Stock Market Crash: 4 साल का सबसे खराब हफ्ता, कोविड के बाद सबसे खराब महीना

Stock Market Crash: Worst Week in 4 Years

कच्चे तेल की गर्मी के आगे बाजार के BULLS जैसे दुम दबाकर भाग खड़े हुए हैं. गिरावट के मामले में शेयर बाजार का यह हफ्ता इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। ‘Friday the 13th’ का डर एक बार फिर बाजार पर हावी दिखा, जब सेंसेक्स करीब 1,500 अंक और निफ्टी करीब 490 अंक गिरकर बंद हुए.

4 साल की सबसे बड़ी वीकली गिरावट

सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे हफ्ते गिरकर बंद हुए हैं। इस हफ्ते सेंसेक्स 4,355 अंक यानी 5.51% और निफ्टी करीब 1,300 अंक यानी 5.31% टूट गया. इससे पहले इतनी बड़ी साप्ताहिक गिरावट जून 2022 में देखने को मिली थी। यानी करीब चार साल बाद बाजार ने इतनी तेज गिरावट देखी है.

अप्रैल 2025 के बाद पहली बार सेंसेक्स 75,000 के नीचे और निफ्टी 23,200 के नीचे फिसल गया. इस तेज बिकवाली के चलते सिर्फ एक दिन में ही BSE की लिस्टेड कंपनियों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इससे कुल मार्केट कैप घटकर करीब 430 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया.

अगर पूरे हफ्ते का हिसाब देखें तो निवेशकों के करीब 20 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं। वहीं फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद से अब तक करीब 33 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैप मिट चुकी है.

किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट

सारे सेक्टरोल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए. इसमें भी सबसे ज्यादा पिटाई, मेटल, बैंकिंग, ऑटो और मीडिया शेयरों की हुई है. आज निफ्टी की सिर्फ 3 कंपनियां टाटा कंज्यूमर, HUL और भारती एयरटेल को छोड़कर सभी गिरकर बंद हुए. सबसे ज्यादा L&T 7.38% टूटा. इसके अलावा हिंडाल्को, टाटा स्टील, JSW स्टील और ग्रासिम 4-6% तक कमजोर होकर बंद हुए.

कोविड के बाद सबसे खराब महीना?


अगर पूरे महीने पर नज़र डालें तो निफ्टी इस महीने अबतक 8% से ज्यादा टूट चुका है. जबकि अभी आधा महीना बाकी है. अगर गिरावट इसी तरह जारी रहती है तो यह गिरावट मार्च 2020 के कोविड क्रैश के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में शामिल हो सकती है. एक नज़र बीते 10 सालों के दौरान निफ्टी की टॉप-10 मंथली गिरावटों पर

बाज़ार में गिरावट के 5 कारण

वैसे तो बाज़ार जब से मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़े हैं, तभी से गिर रहा है. मगर, बाज़ार को जैसे मुसीबतों ने चारों तरफ से घेर लिया, जिसकी वजह से बाज़ार में एक अजीब सी घबराहट फैल गई. चलिए एक नज़र डालते हैं 5 कारणों पर जिनकी वजह से बाज़ार पर इतना दबाव पड़ा.

  1. कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार
    ब्रेंड क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर के पार चल गया, तेल महंगा होने से महंगाई और ब्याज दरों के बढ़ने का डर बढ़ गया, इसका सीधा असर बाजार के सेंटीमेंट्स और कंपनियों की लागत पर पड़ता है.
  2. ग्लोबल मार्केट में कमजोरी
    अमेरिका और एशिया के बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा. खराब ग्लोबल संकेतों से निवेशकों ने बिकवाली बढ़ा दी. एशिया बाज़ारों कोस्पी, शंघाई कंपोजिट, हैंग सेंग और निक्केई पर दबाव देखने को मिला.
  3. रुपये की कमजोरी
    भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया. डॉलर के मुकाबले रुपये ने 92.45 का नया रिकॉर्ड लो बनाया. कमजोर करेंसी से विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है. मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ने के बाद से रुपया 2% तक कमजोर हो चुका है.
  4. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
    ईरान ने एनर्जी और ट्रांसपोर्ट फैसिलिटीज पर अपने हमले तेज किए तो 2 साल की बॉन्ड यील्ड 6 महीने के ऊपर स्तरों पर पहुंच गई. अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.9 बेसिस प्वाइंट बढ़कर
    255% पहुंच गई, जो कि 5 फरवरी के बाद सबसे ज्यादा है. सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से निवेशकों को सुरक्षित विकल्प ज्यादा आकर्षक लगने लगे. इससे शेयर बाजार से पैसा निकलने का दबाव बढ़ गया.
  5. FIIs की लगातार बिकवाली
    भारतीय बाज़ारों में FIIs लगातार 11 ट्रेडिंग सेशन से नेट सेलर्स रहे. FIIs ने गुरुवार तक 10 ट्रेडिंग सेशन में 57,169 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची है. लगातार आउटफ्लो से बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन गया है.

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