Renewable Stocks: निचले स्तरों से 50% उछले शेयर, क्या अब भी है खरीदारी का मौका?

Renewable Energy Stocks 2026 Adani Green, Premier Energies Surge 50 percent Post-Correction time to buy or wait

बीते कुछ समय से रीन्युएबल एनर्जी कंपनियों के शेयर ठंडे पड़े थे, अब उनमें नई ऊर्जा का संचार होता हुआ दिख रहा है. ज्यादातर रीन्युएबल एनर्जी स्टॉक्स अपने साल के निचले स्तरों से 50% से ज्यादा ऊपर आ चुके हैं. इसके पीछे सिर्फ सेंटीमेंट्स नहीं बल्कि कुछ ठोस फंडामेंटल्स काम कर रहे हैं.

भारत इस समय एक प्री-मॉनसून हीटवेव की शुरुआत हो चुकी है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस साल बिजली की पीक डिमांड 275-285 GW तक पहुंच सकती है. इस भारी मांग को पूरा करने के लिए थर्मल पावर के साथ-साथ रिन्यूएबल सोर्सेज यानी सोलर और विंड पर भी निर्भरता बढ़ेगी. जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू में बढ़ोतरी हो सकती है.

2025 में कंपनियों ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स को शुरू करने का ऐलान किया था, जो कि अब यानी 2026 की पहली छमाही में शुरू हो रहे हैं. जैसे- Adani Green और Tata Power के कई सोलर पार्क अब ग्रिड को बिजली सप्लाई करना शुरू कर चुके हैं, जिससे कंपनियों की कमाई को लेकर तस्वीर साफ हुई है.

ब्रोकरेज हाउसेज का भी भरोसा अब रीन्युएबल एनर्जी सेक्टर पर बढ़ा है, साथ ही एनालिस्ट्स का मानना है कि जो स्टॉक्स पहले ‘ओवरवैल्यूड’ थे, वे गिरावट के बाद अब ‘फेयर वैल्यू’ पर आ गए थे. जिसकी वजह से हम ये तेजी देख रहे हैं.

हमने यहां पर कुछ रीन्युएबल स्टॉक्स को लेकर जानकारियां इकट्ठा की हैं, अगर आपने इनमें निवेश किया हुआ है या फिर करने की सोच रहे हैं, तो ये फैसला लेने में आपकी मदद कर सकता है. ये किसी भी तरह से खरीदने-बेचने की राय नहीं है.

Insolation Energy: 70%

30 मार्च, 2026 को इसने 79.75 रुपये का 52वीक लो बनाया था, लेकिन इसने 15 अप्रैल को अब 52 वीक हाई 143.90 बनाया. फिलहाल ये 134-138 रुपये के बीच है. यानी साल के निचले स्तरों से ये 70-75% ऊपर आ चुका है.

Insolation Energy एक स्मॉल/मिड कैप SME स्टॉक है जो अभी-अभी मेन-बोर्ड पर आया है. इसलिए बड़े ब्रोकरेजेस जैसे Macquarie, Jefferies, HSBC का इस पर कोई फॉर्मल कवरेज अभी तो नहीं है, लेकिन कंपनी के फंडामेंटल्स काफी पॉजिटिव हैं.

Q3FY26 में शानदार प्रदर्शन

  • कंपनी का रेवेन्यू 77% YoY बढ़कर ₹575 करोड़ रुपये रहा है.
  • नेट प्रॉफिट 173.5% YoY बढ़कर 50.72 करोड़ रुपये रहा है
  • EBITDA मार्जिन 500 bps बढ़कर 14%+ हो गया

विस्तार योजनाएं

  • कंपनी मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में 4.5 GW सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बना रही है जो Q3 FY27 में शुरू होने की उम्मीद है.

जोखिम

  • पिछले 5 साल में सेल्स ग्रोथ सिर्फ 5% CAGR रही है, हालांकि हाल की तिमाहियों से बेहतर हैं, और 3 साल का ROE सिर्फ 4.25% है

Bondada Engineering: 58%

Insolation Energy की तरह, Bondada Engineering भी हाल ही में BSE SME से आया हुआ स्टॉक है, इसलिए Macquarie, Jefferies जैसे बड़े ब्रोकरेज का कवरेज फिलहाल नहीं है, लेकिन कंपनी के फंडामेंटल्स अच्छे दिख रहे हैं.

कंपनी अपने 52वीक लो 215 रुपये से अब काफी ऊपर है और 341 रुपये के आस-पास है यानी साल के निचले स्तर से 58% ऊपर आ चुका है.

कंपनी 2012 में बनी हैदराबाद बेस्ड EPC कंपनी है जो टेलीकॉम और सोलर एनर्जी इंडस्ट्री को इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन और O&M सर्विसेज देती है. FY25 में रीन्युएबल एनर्जी का रेवेन्यू में हिस्सा 58% था. जो कि 9M FY26 में बढ़कर 80% हो गया.

ऑर्डर बुक

  • मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 7,385 करोड़ रुपये थी, जिसमें 62.7% रीन्युएबल एनर्जी से है. जिसमें NLC India Renewables से 945 करोड़ रुपये का ऑर्डर और NTPC Green Energy से 391 करोड़ रुपये का ऑर्डर शामिल है. कंपनी का लक्ष्य FY27 तक ऑर्डर बुक 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है.

जोखिम

  • स्मॉल/मिडकैप स्टॉक होन की वजह से लिक्विडिटी कम है, बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं.
  • EPC बिजनेस को जमीन पर उतारने में हमेशा रिस्क रहता है, कई बार काफी देरी होती है जिससे मार्जिन पर प्रेशर आता है

Adani Green: 45%

भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है. जिसके पीछे रिन्यूएबल कैपिसिटी में तेजी से होता विस्तार, सरकारी नीतियों का समर्थन और बिजली की बढ़ती मांग मुख्य वजहें हैं. ऐसे में Adani Green Energy जैसे प्लेयर्स आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. क्योंकि कंपनी ने FY26 में 5 GW से ज्यादा की क्षमता जोड़ी है और अपनी ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाकर 19.3 GW कर लिया है.

अदाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर अपने 52वीक लो 765 से अब काफी ऊपर 1,114 रुपये के करीब ट्रेड कर रहा है. यानी साल के निचले स्तरों से ये करीब 45% ऊपर आ चुका है. फिलहाल ये 108 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इंडस्ट्री का औसत P/E 33 है. लेकिन इसकी एग्रेसिव ग्रोथ पाइपलाइन निवेशकों को हाई प्रीमियम देने के लिए प्रेरित कर रही है.

Macquarie का नज़रिया

  • अदाणी ग्रीन एनर्जी पर अपना सकारात्मक (constructive) रुख बरकरार रखा है
  • टारगेट प्राइस को बढ़ाकर ₹1,320 कर दिया है.
  • तेजी से बढ़ती क्षमता और कमाई में मजबूती से स्टॉक को और ऊपर जाने में मदद मिल सकती है
  • मध्यम अवधि में इसके वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिल सकता है

Premier Energies: 50%

प्रीमियर एनर्जी ने 1 फरवरी, 2026 को 660 रुपये का 52वीक लो बनाया था, फिलहाल ये 1,010 रुपये के आस-पास ट्रेड कर रहा है. यानी साल के निचले स्तरों से ये 50% ऊपर ट्रेड कर रहा है.

कंपनी ने 1.6 GW के सोलर सेल और मॉड्यूल्स की सप्लाई के लिए बड़े ऑर्डर जीते हैं. जिसकी कुल वैल्यू करीब 2,577 करोड़ रुपये है. इन ऑर्डर्स की डिलीवरी 2027 और 2028 के बीच तय की गई है. इतनी लंबी अवधि के ऑर्डर्स मिलना यह दर्शाता है कि बाजार में सोलर मॉड्यूल्स की मांग भविष्य के लिए भी काफी मजबूत है.

Nuvama की राय

  • Premier Energies पर Buy rating बरकरार रखी है
  • टारगेट प्राइस ₹1,082 का है
  • मॉड्यूल कैपिसिटी 5.1 GW से बढ़ाकर 11 GW करने को योजना
  • सेल्स कैपिसिटी 2 GW से 10 GW करने की योजना
  • ingots/wafers शुरू से 10 GW करने की योजना है
  • कुल कैपेक्स 12,500 करोड़ रुपये का है

Acme Solar: 45%

27 जनवरी, 2026 को इसके स्टॉक ने 195.90 रुपये का 52वीक लो बनाया था, फिलहाल ये 290 रुपये का आस-पास है. यानी साल के निचले स्तर से करीब 48% ऊपर आ चुका है.

Acme Solar भारत की क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में एक लीडिंग इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर के रूप में उभरी है. जिसकी कुल पोर्टफोलियो क्षमता अप्रैल 2026 तक करीब 8 GW से अधिक पहुंच गई है. कंपनी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और Firm and Dispatchable Renewable Energy (FDRE) पर बढ़ता फोकस है.

HSBC की राय

  • स्टॉक पर ‘Buy’ की सलाह के साथ कवरेज शुरू किया
  • टारगेट प्राइस 350 रुपये तय किया
  • कंपनी सबसे तेजी से बढ़ने वाली रिन्यूएबल IPP कंपनियों में से एक है
  • बिजनेस मॉडल ‘वर्टिकली इंटीग्रेटेड’ है, जिससे लागत पर बेहतर कंट्रोल है

‘ग्रीन’ सुपर ‘पावर’ बनने की तैयारी

भारत मौजूदा समय में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोड्यसर बन चुका है, जिसकी कुल इंस्टॉल्ड कैपिसिटी अप्रैल 2026 तक 200 GW के स्तर को पार कर गई है. इसमें सोलर और विंड एनर्जी का सबसे बड़ा योगदान है, और हाल के वर्षों में भारत ने अपनी इंस्टॉल्ड कैपिसिटी में करीब 400% की ग्रोथ दर्ज की है.

सरकार की ‘पीएम सूर्य घर’ जैसी बड़ी योजनाओं और PLI स्कीम के जरिए देश अब न केवल सोलर एनर्जी का इस्तेमाल कर रहा है, बल्कि सोलर सेल और मॉड्यूल का बड़ा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर बढ़ चुका है. जिससे चीन पर निर्भरता काफी कम हुई है.

भविष्य के लक्ष्यों की बात करें तो भारत ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल ईंधन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, ताकि अपनी कुल बिजली जरूरतों का 50% क्लीन एनर्जी से पूरा किया जा सके. इस विजन को साकार करने के लिए ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ और बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज (BESS) प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियां ‘ग्रोथ इंजन’ की भूमिका निभाएंगी, क्योंकि 500 GW का लक्ष्य बिना निजी क्षेत्र के निवेश और तेजी के संभव नहीं है. ये कंपनियां केवल बिजली उत्पादक (IPP) न रहकर अब ‘एंड-टू-एंड सॉल्यूशंस’ प्रोवाइडर बन रही हैं, जो सोलर पैनल बनाने से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन और विशाल बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) विकसित करने तक की पूरी वैल्यू चेन को संभाल रही हैं.

सरकारी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ये कंपनियां अगले कुछ वर्षों में करोड़ों डॉलर का कैपेक्स करेंगी. जिससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि तकनीक के स्वदेशीकरण से भारत को एक ग्लोबल क्लीन-एनर्जी एक्सपोर्टर बनाने में भी इनकी अहम भूमिका होगी.

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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