Wipro ₹15,000 Crore Buyback: बायबैक की खबर से क्यों फिसला विप्रो? रिटेल निवेशकों के लिए फायदा या नुकसान?

Wipro Shares Slip Post-Buyback Announcement Gains or Losses for Retail Investors?

विप्रो ने 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक का ऐलान किया है. ये बायबैक 16 अप्रैल के क्लोजिंग प्राइस 210.20 रुपये से 19% प्रीमियम पर यानी 250 रुपये पर किया जाएगा. इस बायबैक में कुल 60 करोड़ शेयरों को बायबैक किया जाएगा. यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन ऐसा क्यों हुआ कि बायबैक के ऐलान के बाद आज शुक्रवार को विप्रो का शेयर 3% तक टूट गया?

बायबैक की खबर के बाद क्यों टूटा विप्रो?

खराब नतीजे: दरअसल, इसकी कोई एक वजह नहीं. बाजार को इस बात की चिंता है कि कंपनी आगे कितना कमाएगी. विप्रो ने जून तिमाही (Q1 FY27) के लिए बहुत खराब रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है. कंपनी के मुताबिक रेवेन्यू ग्रोथ निगेटिव 2% से 0% रह सकता है, यानी कंपनी का मानना है कि अगली तिमाही में उसकी कमाई बढ़ने के बजाय कम हो सकती है.

बिजनेस पर भरोसा घटा: भरोसा ऐसे में कंपनी के पास अगर कैश रिजर्व पड़ा है तो वो उसका इस्तेमाल बिजनेस बढ़ाने, इनोवेशन में लगाने की बजाय बायबैक पर खर्च कर रही है. जो कि जोखिम भरा है. अब निवेशकों को ये लग रहा है कि कंपनी खुद मान रही है कि उसका बिजनेस सुस्त रहेगा, तो इसका असर स्टॉक पर दिखना ही था.

ब्रोकरेज ने घटाई रेटिंग: Morgan Stanley और Goldman Sachs जैसी बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों ने इन नतीजों के बाद ‘Sell’ या ‘Underweight’ की रेटिंग दी है, जिससे बिकवाली बढ़ गई है. दूसरी तरफ, कल रात अमेरिकी बाजार में विप्रो का ADR करीब 7% गिर गया था. बाजार इस वक्त विप्रो की “ग्रोथ” को लेकर इतना डरा हुआ है, कि बायबैक का लॉलीपॉप भी उसे खुश करने के बजाय बैक फायर कर गया है.

बायबैक में प्रमोटर भी: एक और बड़ी वजह ये भी मानी जा रही है कि इस बायबैक में प्रमोटर्स और प्रमोटर्स ग्रुप के सदस्य भी हिस्सा लेंगे. बाजार इसे एक संकेत की तरह देखता है. अगर अजीम प्रेमजी और उनका ग्रुप 250 के भाव पर अपने शेयर बेच रहा है, तो निवेशक सोचते हैं कि अगर कंपनी के मालिक को ही लगता है कि 250 एक अच्छा बेचने वाला भाव है, तो क्या इसका मतलब यह है कि शेयर आने वाले समय में इससे ऊपर नहीं जाएगा?

बायबैक और रिटेल निवेशकों पर असर

एक और बात ये कि जब ये पता चला कि इस बायबैक में प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप के सदस्य में भी हिस्सा लेंगे तो चर्चा शुरू हो गई कि इसका रिटेल निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा? क्या इस बायबैक में उनकी हिस्सेदारी घट जाएगी. SEBI का नियम कहता है कि किसी भी बायबैक में 15% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व है. बाकी 85% जनरल कैटेगरी के लिए होता है. तो अब सवाल ये है कि जब 15% कोटा रिजर्व है तो प्रमोटर हिस्सा ले या न ले इससे क्या ही फर्क पड़ता है. सवाल जितना सीधा है, जवाब उतना आसान नहीं है.

बायबैक दो कैटेगरी में बंटता है.

  • रिटेल कैटेगरी: 15% रिजर्व होता है रिटेल निवेशकों के लिए जिनकी होल्डिंग रिकॉर्ड डेट पर 2 लाख तक की वैल्यू हो
  • जनरल कैटेगरी: बाकी 85% शेयर बड़े निवेशकों, संस्थागत निवेशकों और प्रमोटर्स के लिए होती है

विप्रो 15,000 करोड़ रुपये का बायबैक ऑफर लाई है, 15% रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व है यानी 2,250 करोड़ रुपये के शेयर रिटेल निवेशकों से खरीदे जाएंगे. विप्रो जब पिछली बार बायबैक ऑफर लेकर आई थी, तब भी प्रमोटर्स ने उसमें हिस्सा लेने की मंशा जताई थी, इस बार भी वो हिस्सा ले रहे हैं. प्रमोटर के हिस्सा लेने या न लेने से रिटेल निवेशकों पर क्या क्या फर्क पड़ता है, इसको समझते हैं-Entitlement Ratio पर असर

    Entitlement Ratio पर असर

    SEBI का ये नियम है कि कंपनी को ये बताना पड़ता है कि वो ऑफर शेयरों में से कितने शेयरों को मंजूर करेगी ही. मान लीजिए विप्रो ने कहा कि Entitlement Ratio 1:10 है. इसका मतलब है कि अगर आपके पास 100 शेयर हैं, तो 10 शेयर तो कंपनी आपसे खरीदेगी ही. ये आपका कानूनी हक है. दरअसल, जब कंपनी बायबैक की घोषणा करती है और रिकॉर्ड डेट आती है, तो वो एक फॉर्मूला निकालती है. ये रेश्यो बताता है कि आपके पास मौजूद शेयरों में से कितने शेयर कंपनी “निश्चित रूप से” लेगी ही लेगी.

    अगर प्रमोटर हिस्सा नहीं लेते
    ऐसे में कंपनी के पास मौजूद ₹15,000 करोड़ का पूरा का पूरा पैसा पब्लिक के पास जाता है. क्योंकि बाकी 85% हिस्सा जो कि 12,750 करोड़ रुपये है, छोड़ देते हैं. अब कंपनी के पास दो रास्ते होते हैं, या तो वो कम शेयर खरीदें या फिर बचा हुआ पैसा भी पब्लिक और रिटेल को दे दे. अक्सर कंपनियां अपना कोटा एडजस्ट करती हैं, जिससे पब्लिक के लिए पूल बड़ा हो जाता है.

    इससे आपका Entitlement बढ़ जाता है क्योंकि कंपनी को सिर्फ पब्लिक से शेयर खरीदने हैं. इससे जनरल कैटेगरी में कंपटीशन कम हो जाता है और Acceptance Ratio बढ़ जाता है. रिटेल कैटेगरी में भी अक्सर बेहतर Acceptance Ratio मिलता है, यानी रिटेल निवेशकों का इसमें फायदा होता है.विप्रो के पिछले बायबैक्स में acceptance ratio 20–30% के बीच रहा है. इसका मतलब ये कि अगर आपके पास 500 शेयर हैं, तो लगभग 100-125 ही बायबैक के लिए मंजूर होंगे.

    अगर प्रमोटर हिस्सा लेते हैं
    विप्रो में प्रमोटर्स की होल्डिंग अभी 72.6% हैं. ऐसे में 15,000 करोड़ रुपये का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे प्रमोटर के खाते में चला जाता है, इसका मतलब है पब्लिक के बड़े इन्वेस्टर्स (HNI) के लिए वहां जगह कम बचती है. इसको ऐसे समझिए कि बायबैक में शेयरों का एक पूल होता है. जब प्रमोटर्स कहते हैं कि वे भी अपने शेयर कंपनी को वापस बेचेंगे, तो कंपटीशन बढ़ जाता है. अगर वे बड़े पैमाने पर शेयर टेंडर करते हैं, तो जनरल कैटेगरी में बहुत ज्यादा शेयर टेंडर हो जाते हैं. इससे जनरल कैटेगरी का Acceptance Ratio काफी कम हो जाता है. लेकिन रिटेल कैटेगरी पर सीधा असर नहीं पड़ता, क्योंकि वह अलग रिजर्व है.

    मगर ऐसा नहीं है कि रिटेल का कोटा रिजर्व है तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भले ही सीधे तौर पर न पड़े, लेकिन इस केस में कान घुमाकर पकड़ा जाता है. वो कैसे- इसको समझिए

    SEBI का नियम कहता है कि 15% सिर्फ रिटेल निवेशकों या छोटे निवेशकों के लिए रिजर्व है. प्रमोटर्स रिटेल कैटेगरी में नहीं आ सकते क्योंकि उनके पास करोड़ों के शेयर हैं. मतलब ये कि प्रमोटर रिटेल निवेशकों का हिस्सा नहीं छीनते, लेकिन जब प्रमोटर हिस्सा लेते हैं, तो बड़े निवेशक जैसे कि HNI और बड़े-बड़े संस्थान भी अपने ज्यादा शेयर टेंडर कर देते हैं.

    जब प्रमोटर हिस्सा लेते हैं, तो बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को पता होता है कि जनरल कैटेगरी में प्रमोटर्स की वजह से उनका एक्सेप्टेंस रेश्यो बहुत कम रहेगा. ऐसे में वो एक तरकीब लगाते हैं.
    ये बड़े इन्वेस्टर अपने पोर्टफोलियो को तोड़कर छोटे-छोटे रिटेल अकाउंट्स से अप्लाई करते हैं ताकि वे 15% वाले सुरक्षित कोटा का फायदा उठा सकें.

    इसका नतीजा ये होता है कि रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व 15% वाले कोटे अचानक से भीड़ बढ़ जाती है. जिससे रिटेल का भी एक्सेप्टेंस चांस कम हो जाता है.

    विप्रो का Entitlement Ratio

    विप्रो ने अभी अपने इस बायबैक के लिए entitlement ratio घोषित नहीं किया है, हालांकि मार्केट को उम्मीद है कि प्रमोटर की भागीदारी रिटेल निवेशकों के आवंटन पर असर डालेगी.
    Acceptance ratio को भी बहुत ध्यान से देखा जाएगा. विप्रो के 2023 के बायबैक में, रिटेल निवेशकों का entitlement ratio 23.4% तय किया गया था, जबकि जनरल कैटेगरी के लिए ये सिर्फ 4.3% था. उस समय भी प्रमोटर्स ने भाग लेने की मंशा जताई थी.

    रिटेल निवेशकों को कितना फायदा?

    क्या है ब्रोकरेज की राय

    Nomura की राय
    Nomura ने बायबैक के बाद कंपनी के EPS अनुमान (प्रति शेयर कमाई) को 1-2% बढ़ा दिया है।

    Motilal Oswal की राय

    • यह बायबैक पिछले बायबैक्स के मुकाबले सामान्य है, कुल इक्विटी का लगभग 4-5% है
    • अगर पूरा बायबैक पूरा हो जाता है, तो इससे कंपनी की EPS में मिड-सिंगल डिजिट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद
    • डिविडेंड और बायबैक को मिलाकर, पिछले 3 साल में कुल पेआउट रेश्यो करीब 88% हो गया है.
    • ये कंपनी की अपनी घोषित पॉलिसी से भी ऊपर है.

    ये एनालिसिस केवल शिक्षा उद्देश्यों के लिए है. निवेश का निर्णय लेने से पहले SEBI-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह अवश्य लें.

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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