‘बाज़ार’ और ‘जंग’ में जीत हमेशा बाज़ार की हुई! ये वक्त भी गुज़र जाएगा

Markets vs Wars History Shows the Market Eventually Wins middle east crisis This Too Shall Pass

बाज़ार ने न जाने कितनी ही लड़ाईयां देखीं, आतंकी हमले देखे, फाइनेंशियल क्राइसिस देखी, बड़े-बड़े घोटाले देखे…लेकिन बाज़ार कभी रुकता नहीं, गिरता है- उठता है और फिर चल पड़ता है. पीछे रह जाते हैं वो लोग, जो डर जाते हैं और बाज़ार का हाथ झटककर अलग खड़े हो जाते हैं, आगे बढ़ जाते हैं वो लोग जिन्हें मालूम होता है, ये वक्त है, गुज़र जाएगा और बाज़ार का दामन नहीं छोड़ते.

युद्ध और बाज़ार की ‘जंग’

बाज़ार ने बीते 4 दशक में 6 ऐसी ही बड़ी-बड़ी जियोपॉलिटकल आपदाएं देखीं. हर बार बाज़ार ने डर के साये में एक नया बॉटम बनाया और हर बार वो दोगुनी तेज़ी के साथ उबरा. दुनिया एक बार फिर एक ऐसी ही जियोपॉलिटिकल आपदा से गुज़र रही है. मौजूदा वक्त में ईरान -इज़रायल और अमेरिका बीच जारी जंग भी इतिहास के गुज़रे संकटों से अलग नहीं है. बाज़ार टूट रहे हैं, नए बॉटम बना रहे हैं, लेकिन ये जान लीजिए कि बाज़ार इस वक्त से भी गुज़र जाएगा, यही इतिहास ने हमें सिखाया है.

ये कोई कही सुनी बात नहीं है, भले ही, बाज़ार का भविष्य सेंटीमेंट्स पर चलता है, लेकिन बाज़ार का इतिहास आंकड़ों पर तौला जाता है. इसलिए यहां पर आपको आंकड़ों के जरिए एक तस्वीर पेश करने की कोशिश करेंगे, जो इस बात को साबित करती है कि जो लोग संकट की घड़ी में लंबी अवधि का नज़रिया लेकर बाज़ार में आते हैं, बाज़ार भी उनको रिवॉर्ड करता है.

Markets vs Wars History Shows the Market Eventually Wins middle east crisis

1990- इराक वॉर
2 अगस्त 1990 को इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने अचानक अपने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला कर दिया और उसे 2 दिनों में पूरी तरह कब्जा कर लिया. संयुक्त राष्ट्र ने तुरंत इराक की निंदा की और कुवैत से वापस जाने को कहा. अमेरिका ने जनवरी 1991 में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म शुरू किया, सिर्फ 100 घंटे की जमीनी लड़ाई में इराकी सेना बुरी तरह हार गई. 28 फरवरी 1991 को युद्ध खत्म हुआ, कुवैत आजाद हुआ और सद्दाम की सेना कुवैत से भाग गई.

इस पूरे युद्ध के दौरान भारतीय बाज़ार ने करेक्शन झेला. 2 अगस्त, 1990 को जंग शुरू हुई, उसके पहले सेंसेक्स लगातार 4 ट्रेडिंग सेशन में 16% तक चढ़ चुका था, जंग शुरू होने के बाद दुनिया भर के बाज़ार में गिरावट शुरू हुई, भारतीय बाज़ार भी गिरे. आंकड़े बताते हैं कि 36 हफ्तों में सेंसेक्स 14% तक कमज़ोर हुआ. इस करेक्शन के बाद बाज़ार में तेज़ी का दौर शुरू हुआ. अगले एक महीने में ही बाज़ार करेक्शन के निचले स्तरों से 26% तक चढ़ गया, जबकि अगले 6 महीने में ही ये निचले स्तरो से 65% तक उछल चुका था.

1999- भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल वॉर
1999 का कारगिल वॉर भारत-पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 तक लड़ा गया. करीब 3 महीने तक जंग चली, भारत ने पाकिस्तानी सेना को पराजित किया. इस दौरान भारतीय बाज़ारों ने ज्यादा मज़बूती का परिचय दिया. युद्ध की शुरुआत में सेंसेक्स गिरने की बजाय मजबूत हुआ. लड़ाई शुरू होने के शुरुआती 7 ट्रेडिंग सेशन में 13.55% तक मजबूत हुआ था. मगर, इसके बाद बाज़ार में कई मौकों पर करेक्शन देखने को मिला, 6 हफ्ते में सेंसेक्स सिर्फ 11% करेक्ट हुआ. इसके एक महीने में ये सेंसेक्स करेक्शन के निचले स्तरों से 17% तक उछला और 6 महीने में ये 40% तक उछला.

2001- 9/11 अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमला
11 सितंबर 2001 की वो सुबह नहीं भूलेगी जब अल-कायदा के आतंकियों ने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवर्स में प्लेन क्रैश कर हजारों लोगों को मार डाला. ये अमेरिका के इतिहास में अभी तक का सबसे वीभत्स आतंकी हमला था. अमेरिका समेत दुनिया भर के बाज़ारों ने इस पर रिएक्ट किया. जब हमला हुआ तो भारत में बाज़ार बंद हो चुके थे और अमेरिकी बाज़ार खुले हुए थे, अगले दिन यानी 12 सितंबर को भारतीय बाज़ार जब खुले तो भारी गिरावट के साथ शुरुआत हुई. अगले चार ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 15.77% तक टूट गया, 2 हफ्ते में सेंसेक्स में 18% की गिरावट देखने को मिली. मगर, इसके एक महीने में ही बाज़ार इस गिरावट से ऊपर उठ गया और गिरावट के बॉटम से 18% तक उछल गया. 6 महीने में ये करेक्शन के निचले स्तर से ये 45% तक चढ़ गया.

Markets vs Wars History

2008- 26/11 मुंबई पर आतंकी हमला
ये वो वक्त था, जब पूरी दुनिया 2008 की मंदी से गुजर रही थी, भारत भी इससे अछूता नहीं था. नवंबर के महीने में सेंसेक्स पहले ही 15% के करीब टूट चुका था, तभी 26 नवंबर, 2008 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर आतंकी हमला होता है, तीन दिनों तक पूरा देश थम जाता है. जिस दिन आतंकी हमला हुआ, उस दिन सेंसेक्स 3.81% की मजबूती के साथ बंद हुआ, आतंकी हमले की वजह से अगले दिन यानी 27 नवंबर को बाज़ार बंद था, 28 नवंबर की सुबह तक ऑपरेशन खत्म हुआ और बाज़ार फिर खुले और मज़बूती के साथ बंद हुए. इस हमले ने मुंबई की आत्मा पर चोट किया था, जिसे बाज़ार ने भी मज़बूती से सहा. बाज़ार एक साथ 2-2 चुनौतियों से लड़ रहा था, एक तरफ ग्लोबल मंदी थी, तो दूसरी तरफ आतंकी हमलों का घाव, फिर भी बाज़ार ऊपर उठने की कोशिश कर रहा था. एक हफ्ते में सेंसेक्स महज 3% ही करेक्ट हुआ. इसके अगले महीने निचले स्तरों से सेंसेक्स 20 तक उछल गया और 6 महीने में ही 36% तक चढ़ गया.

2019- पुलवामा हमला
पुलवामा अटैक 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुआ. जिसमें 40 CRPF जवान शहीद हुए. इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. ये हमला जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर लेथपोरा के पास दोपहर करीब 3:15 बजे हुआ, और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इसकी जिम्मेदारी ली. जब ये हमला हुआ तो बाज़ार तकरीबन होने को था.
इसके बाद भारत ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर इसका बदला लिया.

हालांकि इस हमले ने भारतीयों के अंदर गुस्सा भर दिया, लेकिन बाज़ार ने बहुत मैच्योरिटी के साथ इसको संभाला. निवेशक ऐसी घटनाओं से वाकिफ थे, 2016 में उरी, और 2008 में मुंबई हमलों को वो देख चुके थे और ये जानते थे कि इसका असर आमतौर पर शॉर्ट-टर्म तक सीमित रहता है. लॉन्ग-टर्म में अर्थव्यवस्था मजबूत थी, FII इनफ्लो अच्छा था. इसलिए बाज़ार में सिर्फ हल्की फुल्की गिरावट आई. अगले कुछ महीनों में बाज़ार मजबूती के साथ आगे बढ़ गए.

2022- रूस-यूक्रेन वॉर
2022 का रूस-यूक्रेन वॉर 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमला करने की घोषणा की. भारतीय बाजार 24 फरवरी को 4.72% तक टूट गए. हालांकि सेंसेंक्स इसके पहले लगातार 6 ट्रेडिंग सेशन से कमज़ोर हो रहा था, और बीते 10 ट्रेडिंग सेशन में वो 8 बार गिर चुका था. ये गिरावट 2.8% थी. मगर, 24 फरवरी को आई गिरावट इकलौती इतनी बड़ी गिरावट थी, उसके बाद बाज़ार इतना नहीं गिरा. इसलिए 23 हफ्तों में सेंसेक्स 11% तक गिरा, फिर एक महीने में ही करेक्शन के निचले लेवल से ये 7% ऊपर आया और 6 महीने में ये उस लेवल से 25% तक चढ़ा. सेंसेक्स उस गिरावट से अब 45% से भी ज्यादा चढ़ चुका है.

2026- ईरान-इज़रायल/US वॉर
1 मार्च, 2026 को शुरू हुई ये जंग में बाज़ार करीब 5% तक टूट चुका है, ये जंग अभी और कितने समय चलेगी और बाज़ार इस पर कैसे रिएक्ट करेगा, वो देखना अभी बाकी है.

इसलिए, इतिहास बार-बार यह साबित करता है कि जंग और जियोपॉलिटिकल संकट बाज़ारों को कुछ समय के लिए डरा सकते हैं, लेकिन उनकी लंबी अवधि की दिशा को नहीं बदल पाते. ऐसे में जो निवेशक डर के माहौल में बाज़ार से दूरी बना लेते हैं, वे अक्सर उसी रिकवरी से चूक जाते हैं, जहां से असली दौलत बनती है. ICICI Securities की रिपोर्ट कहती है कि पिछले 30 सालों में 6 बड़े जियोपॉलिटिकल इवेंट्स में औसतन बाजार 4 हफ्ते तक करेक्शन झेलता है, लेकिन उसके बाद 3 महीने में 28% और 6 महीने में 38% औसत रिटर्न आया.

  • ऐसे घटनाएं लंबी अवधि 2-3 साल के नजरिए से अच्छी खरीदारी के मौके देती हैं
  • अपनी रिस्क क्षमता के आधार पर एकमुश्त या धीमे-धीमे जैसे चाहें निवेश करें
  • कंपनियां FY25 से FY28E तक 10-15% PAT CAGR दे सकती हैं
  • लोअर बैंड (10%) में ऊंची क्रूड कीमतों का असर है, जो लंबे समय तक नहीं रहेंगी
  • ब्रॉडर मार्केट अभी FY28E EPS पर 17.5x के वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है

TOP PICKS OF ICICI DIRECT

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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